हेलो फ्रेंड्स, मैं प्रीथनका गुप्ता अपनी नयी सेक्स कहानी के साथ वापस आई हू. मेरी पहले की सेक्स स्टोरीस को जो आपने प्यार दिया है, उसके लिए आप सब का धन्यवाद. चलिए अब इस स्टोरी पर चलते है.
पहले मैं अपने बारे में बता डू. मैं पुंजब के लुधियाना शहर से हू, और 23 साल की हू. मेरा फिगर 34-29-36 है. रंग मेरा गोरा है, और मैं बहुत सेक्सी हू. मेरी लेने के लिए लड़के कुछ भी करने को तैयार हो जाते है, लेकिन मैं इतनी आसानी से किसी को नही देती. ये कहानी मेरी कुछ दिन पहले हुई चुदाई की है, जो मेरे पापा ने की. चलिए बताती हू, क्या हुआ और कैसे हुआ.
उस दिन घर वाले पापा के किसी दोस्त की पार्टी पर जाने वाले थे. प्लान तो मेरा भी था, लेकिन ऑफीस में काम इतना था, की मैं तक गयी. जब मैं घर आई, तो गर्मी की वजह से मैं पसीने से भारी पड़ी थी. मैने लेगैंग्स और कमीज़ पहना था, जो पसीने की वजह से मेरे बदन से चिपका पड़ा था.
जब मैं घर आई, तो पापा ने दरवाज़ा खोला. दरवाज़ा खोलते ही वो मेरी तरफ घूर कर देखने लगे. मेरा कमीज़ पसीने की वजह से ट्रॅन्स्परेंट हो चुका था, जिससे मेरा बदन आराम से देखा जेया सकता था. पापा उसी ना मज़ा ले रहे थे.
फिर मैं अंदर गयी तो मम्मी ने पार्टी के लिए तैयार होने को कहा. लेकिन मैने माना कर दिया, ये बोल कर की मैं तक गयी थी. फिर मम्मी-पापा, और भाई चले गये. मैं थोड़ी देर सोफा पर ही बैठी एसी की हवा लेने लगी. पसीना तो सूख गया, लेकिन पसीने की स्मेल अभी भी आ रही थी.
फिर मैने सोचा क्यूँ ना ठंडे पानी से नहा लिया जाए. ये सोच कर मैं बातरूम में गयी, और ठंडे पानी से नहा कर आ गयी. मैने सिर्फ़ टवल बाँधा हुआ था, और मैं आके एसी की ठंडी हवा में बैठ गयी.
मैं टवल में ही आराम से सोफा पर लेट गयी. अभी तक घर वालो को गये काफ़ी देर हो चुकी थी. तभी दरवाज़ा खुला, और कोई अंदर आया. जब मैने देखा, तो वो पापा थे. जो गिफ्ट वो अपने दोस्त के लिए लाए थे, वो घर ही भूल गये थे, इसलिए मम्मी और भाई को पार्टी पर छ्चोढ़ कर वो वापस गिफ्ट लेने आए थे.
पापा को देख कर मैं दर्र गयी. उन्होने भी मुझे देख लिया. मैं जल्दी से खड़ी हुई, और अंदर जाने लगी. तभी साइड पर पड़े टेबल की कुण्डी में फ़ासस कर मेरा टवल निकल गया. अब मैं पापा के सामने पूरी नंगी हो गयी थी. पापा मुझे उपर से नीचे आँखें फाड़ कर देख रहे थे.
तभी मैं टवल उठाते हुए बोली: सॉरी पापा, वो गर्मी लग रही थी, इसलिए एसी की हवा लेने आ गयी.
पापा कुछ बोले नही, बस ऐसे ही मुझे घूर कर देखते रहे. फिर मैने जल्दी से अपने कमरे की तरफ आने लगी. मैं अपने कमरे में पहुँच कर जैसे ही दरवाज़ा बंद करने लगी, तभी पापा ने दरवाज़े पर हाथ रख दिया.
फिर पापा ने दरवाज़ा खोला, और अंदर आ गये. अब वो मेरे सामने खड़े थे. मुझे कोई अंदाज़ा नही था, की वो मेरे रूम में क्या करने आए थे. तभी वो मेरे करीब आए, और मेरी कमर में बाजू डाल कर बोले-
पापा: तू तो बहुत जवान हो गयी है प्रीथनका. ज़रा मुझे भी मज़ा ले लेने दे अपनी जवानी का.
मैं: पापा आप क्या बोल रहे हो? मैं आपकी बेटी हू.
पापा: बेटी हो तो क्या हुआ? तुम एक औरत भी हो. और हर औरत को एक मर्द चाहिए होता है.
इससे पहले मैं कुछ और बोल पाती, पापा ने अपने होंठ मेरे होंठो से चिपका दिए, और मेरा टवल गिरा दिया. अब मैं पूरी नंगी अपने पापा की बाहों में थी. पापा मेरे होंठ चूस रहे थे, और साथ में मेरे नंगे शरीर पर हाथ फेर रहे थे.
मैने पापा को अपने से डोर करने की कोशिश की, लेकिन उनकी पकड़ मुझ पर मज़बूत थी. लगातार उनके किस करने से, हाथ फेरने से, और मेरे अंगो को सहलाने से मैं गरम हो गयी. अब मैं भी उनका किस में साथ देने लगी.
मेरे साथ देने पर पापा ने किस तोड़ी, और मुझे बिस्तर पर लिटा दिया. फिर उन्होने जल्दी से अपने कपड़े उतारे, और मेरे उपर आ गये. अब उन्होने मेरी टाँगें खोली, और मेरी छूट को चूसने लग गये. मैं आ आ करने लगी, और वासना की आग में पागल होने लगी. मैं पापा के सर को अपनी छूट में दबा के मज़ा ले रही थी.
कुछ देर छूट चूसने के बाद पापा मेरा पेट चाटने लगे, और फिर उपर आ कर मेरे बूब्स दबा कर पर पीने लगी. मैं तो मदहोश हुई पड़ी थी. फिर पापा ने अपना लंड मेरी छूट पे सेट किया, और उसको रगड़ने लगे. मेरी सिसकियाँ निकालने लगी.
उसके बाद पापा ने एक ज़ोर का धक्का मारा, और अपना लंड मेरी छूट में घुसा दिया. पहले धक्के में आधा लंड अंदर गया, और मैं चीखने लगी. मैं उनको रुकने के लिए कहने लगी, लेकिन तभी उन्होने दूसरा धक्का मारा. इससे तो मानो मेरी जान ही निकल गयी.
अब उनके लंड पूरा मेरे अंदर था. मुझे दर्द हो रहा था, लेकिन वो मेरे होंठ और बूब्स चूज़ जेया रहे थे. कुछ देर में मैं इतनी गरम हो गयी, की दर्द कम होना शुरू हो गया. ये देख कर पापा ने लंड अंदर-बाहर करना शुरू कर दिया. अब मुझे मज़ा आने लगा था. पापा का लंड रग़ाद खाते हुए अंदर-बाहर हो रहा था, और मेरी आ आ निकल रही थी.
पापा मेरे होंठ चूस्टे हुए मेरी छूट मार रहे थे. कुछ देर ऐसे ही छोड़ने के बाद वो बेड पर लेट गये, और मुझे अपने लंड पर बिता कर लंड छूट में घुसा दिया. इससे मेरी फिर से चीख निकल गयी. अब पापा नीचे से ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगा रहे थे, और मुझे जन्नत का फील मिल रहा था. मैं अपने बूब्स पकड़ कर उनके लंड पर उछाल रही थी.
कुछ देर बाद पापा ने मुझे लंड से उतरा, और घोड़ी बना कर पीछे से छोड़ने लगे. इस पोज़िशन में लंड मेरी बच्चे-दानी को लग रहा था. इसका अपना अलग ही दर्द और मज़ा है.
तकरीबन आधे घंटे तक पापा मुझे ऐसे ही छोड़ते रहे. फिर उन्होने लंड छूट से निकाला, और मुझे सीधी लिटा लिया. अब वो मेरे मूह के पास आके लंड हिलने लगे. कुछ ही सेकेंड्स में मेरे मूह पर उनके माल की पिचकारी निकली. उसके बाद वो चुप-छाप कपड़े पहने, और वहाँ से चले गये.