ऑटो ड्राइवर ने की पहली चुदाई

हेलो दोस्तों, मेरा नाम शिखा है, और मैं अभी 24 साल की हू. मैं दिखने में बहुत ही ज़्यादा सुंदर हू. मेरा रंग गोरा है, और मेरा फिगर भी बहुत ही ज़्यादा ज़बरदस्त है.

मैं मेडिकल की च्चात्रा हू, और अपनी पढ़ाई को लेकर बहुत ही ज़्यादा सीरीयस रहती हू. मेरे घर वाले बहुत ही ज़्यादा स्ट्रिक्ट है. मेरे दोस्त भी कम है. मैं कोई बाय्फ्रेंड वग़ैरा भी नही बनाई हू, ताकि मेरी पढ़ाई डिस्टर्ब ना हो. पर जैसे ही जवानी चढ़ि वैसे ही मेरी छूट कुलबुलाने लगी थी.

मैं कहानियाँ और पॉर्न देख कर अपनी छूट की प्यास को उंगली से ही बुझा लेती थी. पर अब मेरी छूट लंड माँग रही थी. मैं कॉलेज आया करती थी, तब मुझे रास्ते में एक ऑटो वाला मिलता था. वो मुझे डेली कॉलेज आते-जाते देखा करता था. मेरी सहेलियों ने काई बार देखा था और मुझे बोली भी थी की, “लगता है वो ऑटो वाला तेरा आशिक़ है. देख कैसे तुम्हे घूर रहा है.”

वो दिखने में च्छपरी टाइप था. बड़े-बड़े बाल, और उपर से रंग बिरंगे बाल थे उसके. शर्ट के उपर के बटन खुले, और पतला सा दिखने वाला सावला रंग का था.

मैं उनकी बातों पर हस्स दी, और हम सभी दोस्त हेस्ट हुए वहाँ से दूसरे ऑटो पकड़ कर चले गये. एक दिन की बात है, जब मैं कॉलेज अकेली आई थी, तो उस दिन मेरे दोस्त नही थे, और मैं अकेली ही थी. मैं जब च्छुतटी में घर जाने के लिए निकली, तो वो ऑटो वाला सामने ही खड़ा था. तब मैं सोची की आज इसके साथ ही चलती हू, देखती हू ये मेरा आशिक़ है या कुछ और.

मैं उसके ऑटो में बैठ गयी. वो मेरे बैठते ही देख कर मुस्कुराते हुए जल्दी ही ऑटो स्टार्ट करके वहाँ से निकल गया. फिर मुझे आईने में से घूर्ने लगा.

मैं भी उसे ही देख रही थी, और वो मुझे आईने में से देख कर अपने होंठ पर जीभ फिरा रहा था, और मुस्कुरा रहा था. मैं भी हल्की-हल्की मुस्कुरा रही थी. उसका रंग रूप तो मुझे पसंद नही थे, पर उसका स्टाइल मुझे पता नही क्यूँ अछा लग रहा था.

इसी तरह मैं घर आ गयी और मैने उसे पैसे दिए. फिर मैं घर चली गयी. उसके बाद मैं जब तक घर के अंदर नही चली गयी, तब तक वो वहीं खड़ा हो कर मुझे देखता रहा. मैं अंदर गयी और खिड़की से देखी तो अभी वो वहीं खड़ा था. मैं च्चत पर गयी, और उसे इशारे से पूछी क्या बात है. तब वो मेरी तरफ देख कर मुस्कुराया और ऑटो स्टार्ट करके चला गया. फिर मैं भी अपने कमरे में आ गयी.

दूसरे दिन भी मेरी दोस्त नही आने वाली थी, तो मैं अकेली ही कॉलेज जाने लगी. रास्ते के चौराहे पर वहीं ऑटो वाला मुस्कुराते हुए खड़ा था. मुझे तोड़ा अजीब लगा, पर मैं उसी के ऑटो में बैठी.

वो कलाज की तरफ चल दिया. मैं उससे पूछी: कल क्यूँ रुके थे?

तब वो मुस्कुराते हुए बोला: अपुन को तुम अची लगती हो. बस देखने का मॅन करता है.

मैं मुस्कुराइ और दाँत-ते हुए बोली: तुम्हे शरम नही आती मेरा पीछा करते हो?

वो घबराया पर साहस से बोला: अपुन किसी का पीछा नही करता, बस अची लगती हो तो खुद से खिछा चला आता हू.

उसका जवाब सुन मैं हस्सी ना रोक पाई. इसी तरह मेरा कॉलेज आ गया. पैसे दी तो बोला की जाते टाइम दे देना. मैं उसकी चालाकी समझ रही थी. मैं ना जाने क्यूँ उसके ही ख़यालों में पूरा टाइम डूबी रही. शाम को फिर से उसके साथ ही घर गयी. उसने फिर से ऐसी ही प्यार भारी बातों से मेरा मॅन बहला दिया.

जाते टाइम फिर से पैसा नही लिया, और अपना नंबर देते हुए बोला: कभी भी कॉल कर लेना. अपुन तेरे को कॉलेज या बेज़ार छ्चोढ़ देगा.

मैं उसके नंबर नही लेना चाहती थी, पर फिर भी रख ली. अगले दिन से मेरी दोस्त भी आने लगी. उसके सामने मुझे घूरता था, पर कहता कुछ नही था. धीरे-धीरे मुझे उसकी बातें सुनने को कान तरसने लगे. तो एक दिन रात को कॉल कर ली. वो बहुत खुश हुआ. मैं ना चाहते हुए भी उससे घंटो बात की.

फिर ऐसे ही अब वो च्छपरी मुझे अछा लगने लगा था. जब मेरी दोस्त नही होती, तो वो मुझे अपने साथ ऑटो में किसी ख़ास अकेली जगह ले जाता. मुझे बहुत मज़ा आने लगा था.

अब जब भी दोस्त मेरी नही आती, तो मैं कॉलेज बंक कर उसके साथ कही सुनसान जगह चली जाती, जहाँ मुझे मज़ा आ जाता था. उसने कभी भी मुझसे ज़बरदस्ती छिपकने की कोशिश तक नही की थी. जिससे वो मुझे और ज़्यादा पसंद आने लगा था. मैं खुद उससे चिपक जाती थी, क्यूंकी कोई और वहाँ होता नही था.

मुझे अब उसके साथ अछा लगने लगा था. एक दिन ऐसे ही वो मुझे एक सुनसान जंगल के बीच ले गया, और पेड़ के चाओं में ऑटो लगा कर, पीछे मेरे साथ बैठ गया. मैं उसे देख रही थी. वो शांत मुझे देख रहा था.

मुझे जाने क्या हुआ, मैं अपने होंठ उसके होंठो पर रख दी. वो अपनी आँख बंद करके मेरे कोमल होंठों को चूसने लगा. वो मुझसे चिपक गया और मेरी चुचिया उसके सीने से चिपक गयी. अब वो मेरे होंठो को पीने लगा.

मैं मदमस्त हो चुकी थी. सब कुछ भूल कर सुनसान जंगल में च्छपरी ऑटो ड्राइवर के साथ उसकी गोद में बैठ कर अपनी जवानी लूटा रही थी. थोड़ी देर में मैने खुद ही अपनी शर्ट के बोट्तों खोले, और चुचिया उसे पिलाने लगी. मेरी गोरी-गोरी चुचियों को बड़े प्यार से चूस रहा था.

फिर मैं उसके लंड को पंत से बाहर निकली. लंड देख कर मेरे होश ही उडद गये. वो खुद दिखने में पतला था, पर उसका लंड लंबा और मोटा था. उफ़फ्फ़… मैं उसे मूह में भर के चूसने लगी. वो आँखें बंद करके मज़ा ले रहा था.

फिर वो मेरी स्कर्ट उपर करके पनटी को निकाला, और मेरी चिकनी छूट पर थूक लगा कर लंड डालने लगा. मेरी छूट अभी लंड नही ली थी, जिसकी वजह से टाइट थी. बार-बार फिसलने के बाद लंड तोड़ा सा अंदर गया. मुझे काफ़ी दर्द हुआ.

पर वो आराम से मेरी चुचियों को सहलाते हुए और धक्का मारा, और लंड अंदर घुसा दिया. दर्द से मैं तड़प उठी, पर वो मुझे सहलाते हुए धीरे-धीरे छोड़ने लगा. थोड़ी देर बाद मैं सब दर्द भूल कर उसके गले में अपनी बाहों को डाल कर छुड़वाने लगी.

वो ज़ोर-ज़ोर से मेरी चिकनी छूट को छोड़ रहा था. उफ़फ्फ़ कॉलेज बंक करके ऑटो ड्राइवर से चूड़ने में अलग ही मज़ा आ रहा था. उसके बाद हम दोनो झाड़ गये, और फिर घर आ गये.

फिर हम ये रुटीन लिए, और ये तब तक चला जब तक मैं फैल नही हो गयी. फैल होने के बाद मुझे बहुत पछतावा हुआ और फिर सब छ्चोढ़ कर पढ़ाई में लग गयी.

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