ही फ्रेंड्स पिछले पार्ट में आपने पढ़ा की पापा मेरी गांद मारने के लिए मुझे खेत की झाड़ियों में ले गये, जहाँ पर अजनबी अंकल ने मेरी जाम के चुदाई की. फिर वो अंकल झाड़ियों में गायब हो गये, और पापा गुस्से से उन्हे जाता देख रहे थे.
फिर मैने अपने कपड़े पहन लिए, पानी से हाथ मूह धो लिया. उसके बाद रोड की और चलने लगी. मैने पापा को इशारा करके बुलाया, और उनका सपोर्ट लेकर हम वहाँ से बाहर आए. पापा मुझे अजीब तरीके से घूर रहे थे.
फिर हम अपना बाग सेट करके बिके पे बैठ गये. मैं पहले जैसे बैठ जाती थी, वैसे आराम से अब बैठ नही पा रही थी. मेरी छूट में तोड़ा पाईं हो रहा था. तो मूह से आ निकल गयी.
पापा: अभी और चुड़वव, उछाल-उछाल के (मैं चुप रही, और अपने होंठ भींच के बिके पे बैठ गयी). साला, मैं अपने लिए लेकर आया था, और मज़े कोई और ही ले गया. और उसे रोकने की बजाए मेडम जी मज़े से अपनी छूट छुड़वा रही है.
मे: मज़े से या मजबूरी से, ये डिसाइड कों करेगा? ह्म्म्म्म?
पापा: तुमने अगर मेरा साथ दिया होता, तो उस मदारचोड़ आदमी को वहीं पे गिरा कर हम भाग जाते. पर तू भी तो अपनी मों की ही बेटी है ना.
मे: इसका मों से क्या रीलेशन?
पापा: तेरी मों भी अपनी जवानी में काई बड़े लंड ले चुकी है, और तूने भी तो आज वैसा ही किया. बड़ा लंड देखा और छूट गीली हो गयी तेरी. तुम भी अपनी मों की तरह रंडी निकली.
मैं फिरसे अपने लिए ये रंडी वर्ड सुन कर एमोशनल हो गयी, और मेरी आँखें भर आई: क्या आपको मैं रंडी लगती हू? वहाँ पे भी आपने मुझे रंडी बना दिया था, और अभी भी मुझे एक रंडी बुला रहे हो! आप गाड़ी रोकिए. साइड में कीजिए आप. मुझे घर नही जाना है.
मेरे दिमाग़ में इतनी सारी उथल-पताल थी, की मुझे समझ नही आ रहा था की मैं क्या करती. पर इस हालत में मों को फेस नही कर सकती थी.
पापा: भोंसड़ी की रंडी, अब रास्ते में ड्रामा मत कर. घर जाके बात करेंगे कल. अभी रात हो चुकी है.
मे: नही, मुझे यहाँ पे साइड में उतार दीजिए, और आप चले जाइए. मैं सुबह वापस घर आ जौंगी.
पापा: और इस सुनसान रोड पे अकेले कैसे जाओगी? अर्रे हा, तुम तो ट्रक वाले से लिफ्ट लेकर उससे छुड़वा के सिटी तक आ जाओगी, और फिर वहाँ किसी ऑटो वाले से छुड़वा के घर तक आ जाओगी. क्यू, मेरी छ्होटी रांड़?
मे (मेरा गुस्सा भी तीसरे आसमान पर पहुँच गया): मैं रंडी तो तू कों हुआ, रंडी-बाज़? जो अपनी सग़ी बेटी को 2 दिन होटेल में छोड़ता है, और झाड़ियों में उसकी गांद मारने के लिए ले जाता है. तो बड़ा रंडी-बाज़ कों है?
ये सुन कर पापा चुप हो गये. मैं भी गुस्से में पापा से तू-तड़क पे उतार आई, और मुझे भी इसका पता नही चला.
मे (रोटी हुई आवाज़ में): उसकी बॉडी आपके मुक़ाबले बड़ी थी. आपको वो कोई नुकसान ना पहुँचाए, इसलिए मैने उस अंकल से डील की, की तुम पापा को कुछ मत करना, क्यूंकी मेरी चुदाई तो वो वैसे भी करने वाले थे. आ (रास्ते में गद्दा आया तो मुझे पाईं हुआ).
मे: मुझे नीचे पाईं हो रहा है, इसका हाल पूछने की बजाए आप मुझे ही दोष दे रहे हो? प्लीज़, आप गाड़ी को साइड में रोकिए. मैं अपनी इस सिचुयेशन में मों को फेस नही करना चाहती. एक बार शरीर का दर्द मैं से लेती, पर आपने जो मुझे एमोशनली पाईं दिया है, वो सहना मुश्किल है. आप मुझे कहीं उतार दीजिए.
पापा: ठीक है, अगर ऐसा ही है तो हम दोनो ही अभी घर नही जाएँगे (मैने कुछ रिप्लाइ नही दिया).
पापा ने मेरी सिटी में एंटर होते ही जो एक होटेल थी, वहाँ पे बिके को रोका. फिर समान लेकर पापा चल दिए, और मुझे पीछे-पीछे आने का इशारा किया. हमने होटेल रूम में चेक-इन किया.
पापा ने मों को कॉल करके बताया: बिके रास्ते में खराब हो गयी है. तो हम एक होटेल में रुके है. सुबह घर आएँगे.
रूम का गाते क्लोज़ करते ही पापा ने मुझे पेनकिलर टॅबलेट दी. फिर मुझे वहाँ बेड के उपर बिता कर मेरे घुटनो के उपर अपना सिर रख कर रोने सी हालत में मुझे कहने लगे-
पापा: सॉरी बेटा, की मैने तुम्हे रंडी कहा, तुम्हारा दिल दुखाया. वो भोंसड़ी का तुम्हे बिना कॉंडम लगा कर छोड़ता, इसलिए मैने तुम्हे उसके सामने रंडी बोला, जिससे वो कॉंडम लगाए. और सच काहु, तो उसका बड़ा लंड देख कर मुझे इनसेक्यूरिटी फील हुई. की अगर तुम्हे भी बड़े लंड का चस्का लग गया, तो फिर तुम मेरे आवरेज लंड को भूल ही जाओगी. जैसे तुम्हारी मों को ये उतना सॅटिस्फाइ नही कर पाता, वैसे ही शायद तुम भी.
पापा: और मैं ये भी भूल गया, की तुम्हारे भी अपने सपने है, लाइफ है, जिसे तुम अपने तरीके से एंजाय करना चाहती हो. मैं तुम्हे अपनी प्रॉपर्टी समझ बैठा था, ये ग़लत है. ई’म सॉरी बेटा. ई’म रियली सॉरी.
मे: मैं भी सॉरी हू पापा. उस अंकल का बड़ा लंड देख कर शायद मेरी बड़ा लंड लेने की इक्चा जाग गयी थी. पर आप चिंता मत कीजिए, मेरी सील आपने ही तोड़ी है. तो मेरी छूट पे सबसे पहला हक आपका है. मैं चाहे कितने भी लंड लू, पर आपके लिए मेरी टाँगें हमेशा फैली रहेगी.
और मैने अपनी टाँगें वहाँ फैला दी थोड़ी. इससे पापा का मूह मेरी दो थाइस के बीच में आ गया.
पापा: तनका बेटा, मेरे बारे में इतना सोचने के लिए (पापा अब मेरी छूट को कपड़े के उपर से सहलाने लगे). पर इस तुम्हारी नाज़ुक सी छूट के साथ उस हरामी ने ग़लत किया. ग़लत तरीके से किया (पापा अब अपने हाथ से मेरी सलवार के नाडे को खोलने लगा).
मे: डॉन’त वरी पापा. मैने उस अंकल को चुदाई के टाइम ऐसा लॉलिपोप हाथ में पकड़ाया है, की आपका बदला जैसे पूरा हो जाएगा समझो.
पापा: वो कैसे? (पापा नाडा खोल चुके थे, और मुझे उपर उठाने का इशारा किया)
मे (तोड़ा उपर उठाते हुए): वो हुआ यूँ की अंकल की भी एक बेटी है सुरभि. जिसकी हाल ही में शादी हुई है और.
पापा को मैं पूरा किस्सा बताती गयी, और पापा मेरी थाइस सहलाने लगे, उसे किस करने लगे. पापा का टच और उस अंकल की कहानी, दोनो मिल कर माहौल पूरा रोमॅंटिक सा हो गया था. फिर जब मैने वो पूरा किया, तो मैने देखा की मेरी सलवार पूरी उतार गयी थी.
पापा: वाह बेटा, तुमने तो उस आदमी को अछा सेट कर दिया. तुम तो ग़ज़ब की सेक्स गुरु बन गयी हो. मुझे लगता है की एक दिन तुम पूरी दुनिया को ही घर-घर में चुड़वावगी.
और पापा ने मेरी छूट को पनटी के उपर से ही सहलाया, तो मेरे मूह से हल्की आ निकल गयी.
मे: पापा, अभी भी दर्द हो रहा है.
पापा: बेटा, टॅबलेट तो तुम्हे दे दी कब की. अब छूट पे मूव या स्प्रे नही लगा सकते. अगर कहीं बरफ होता तो काम बन जाता, पर इतनी रात को वो होटेल में कहाँ मिलेगा?
मे (कुछ देर सोचने के बाद): बरफ नही. पर ठंडी चीज़ ज़रूर मिलेगी. चलो मेरे साथ.
और मैं पापा को बातरूम में ले गयी. फिर मैने शवर ओं कर दिया, और हम दोनो उसमे भीगने लगे. पापा ने सब कपड़े निकाल दिए, और बेडरूम में रख दिए. मैं टॉप, ब्रा और पनटी में थी. पापा मेरे बूब्स को दबाने लगे, मुझे स्मूच करने लगे.
पापा: वाउ बेटी क्या मस्त माल हो तुम. ई’म लकी की तुम जैसा पताका मुझे छोड़ने को मिल रहा है.
मे: ह्म. और इसी पताके को आज तुमने रंडी बोल दिया.
पापा: ई’म सॉरी बेटा, उसके लिए.
मे: अगर माफी माँगनी है, तो उसकी माँगो, जिसकी तुमने आज बेइज़्ज़ती की है (और मैने पापा को मेरी छूट की और इशारा किया).
पापा बिना देर किए मेरे आयेज घुटनो पे बैठ गये, और मेरी फूली हुई छूट को उपर से ही सहलाने लगे. मैं मोन करने लगी. पापा पनटी के उपर से ही मेरी छूट को रगड़ने लगे. फिर अचानक उन्होने मेरी पनटी को निकल फेंका और अपने मूह को छूट के उपर लगा दिया.
शवर से गिरता ठंडा पानी, और छूट की गर्मी, दोनो फीलिंग्स एक साथ आ रही थी. पापा अपनी टंग को अंदर डाल कर छूट को चूस रहे थे, और मैं मोन कर रही थी.
मे: आ पापा आ धीरे से, दर्द हो रहा है.
पापा: हा बेटा, दर्द तो होगा ही. इतना बड़ा लंड जो लिया था तुमने अपनी छूट में. देखो, तुम्हारी छूट भी कितनी सूज गयी है. लाओ, इसे तोड़ा सहला देता हू.
और पापा मेरी छूट में उंगली डाल के उसे सहलाने लगे. मुझे दर्द और मज़ा दोनो आ रहा था. मैं मोन भी कर रही थी. फिर पापा ने मुझे पीछे से पकड़ा, और मेरे उपर के कपड़े निकालते हुए मेरे बूब्स दबाने लगे. नंगे निपल्स पे पापा का टच और उपर से शवर की ठंडी बूंदे. आ, क्या मज़ा आ रहा था.
पापा ज़ोर-ज़ोर से मेरे बूब्स को निचोढ़ रहे थे. फिर उन्होने मुझे आयेज झुकाया, और अपना लंड मेरी छूट के उपर सेट करके अंदर प्रेस किया. इस बार उनका लंड आराम से अंदर जाने लगा, क्यूंकी अंकल के बड़े लंड ने मेरी छूट को आचे से खोल दिया था. इसलिए पापा का लंड सरसरते हुए अंदर चला गया. उसकी वजह से और सूजन की वजह से मुझे पाईं हो रहा था.
मे: आ पापा. तोड़ा आराम से डालो ना, आ.
पापा: एस बेटा. पर क्या करू, तुम्हे नंगी देख कर कंट्रोल ही नही होता.
और पापा फिर से लंड बाहर निकाल कर मुझे फिर से दाना दान छोड़ने लगे. हर झटके के साथ मैं मोन कर रही थी पाईं की वजह से, जो पापा को उत्तेजित और और तेज़ छोड़ने के लिए प्रेरित कर रहा था.
मे: आ पापा आ, बस करो. आ पाईं हो रहा है.
पापा: साली कुटिया. वहाँ खेत में तो मज़े से चुड रही थी, उछाल-उछाल कर लंड ले रही थी. और यहाँ पे तेरी मैया चुड रही है मेरा लंड लेने में. वहाँ पे तो तुझे ऐसा ख़याल नही आया रंडी, ह्म्म्म्म?
मे: तो भद्वे. आ उसके लिए मैं एक लड़की थी छोड़ने के लिए. पर तेरी तो बेटी भी हू. आ, तू मेरा ख़याल नही रखेगा तो कों रखेगा चुदाई के टाइम. ह्म्म्म्म? बोल ना भोंसड़ी के? मैं हू ना तेरी बेटी? या लंड अंदर डालने के बाद सब भूल गया? आ.
पापा: नही बेटा, याद है मुझे की तू मेरी बेटी है, और मैं बेटी को ही छोड़ रहा हू. और जब तू मुझे गाली देकर बात करती है, और तू कह के बुलाती है, तब तुझे छोड़ने में और भी मज़ा आता है. क्यूंकी तेरी मों भी जवानी में ऐसे ही चुड़वति थी.
मे: सच में? आ, तो अछा है फिर तेरे लिए. पर तू समझ ना यार, तेरी इस रंडी ने पहली बार बड़े साइज़ का लंड लिया है. इसलिए छूट में पाईं हो रहा है. तू समझ सकता है.
पापा: एस, मेरी रंडी. और मैं ये भी जानता हू की अगर एक पाईं से बड़ा पाईं अगर किसी को डेडॉ ना, तो वो पुराना वाला पाईं भूल जाता है.
मे: क्या मतलब?
पापा: मतलब यह की…
ये बोलते हुए पापा ने मुझे मेरी कमर को दबा कर नीचे झुकाया. और मैं कुछ समझू, उससे पहले मेरी आस पे पहले कुछ गीला सा महसूस हुआ (जो पापा ने वॅसलीन लगाई थी). उसके नेक्स्ट मोमेंट ऐसा महसूस हुआ के किसी ने मेरी गांद में कोई गरम पिघलता हुआ लोहा डाल दिया हो.
आक्च्युयली पाप मेरी गांद में अपना लंड डाल कर उसे दबा रहे थे. पापा ने वक़्त रहते मेरे मूह में मेरी ब्रा को घुसा दिया, वरना मेरे मूह से एक ज़ोर की चीख निकालने वाली थी, जो मूह में ही डब कर रह गयी. लंड आधे से ज़्यादा मेरी गांद में था. मैं झटपटा रही थी, और पापा इस चीज़ को एंजाय कर रहे थे.
पापा ने धीरे-धीरे करके अपना पूरा लंड मेरी गांद के अंदर इनसर्ट कर दिया. मेरी साँसे तेज़ हो गयी थी, और पापा अपना लंड मेरी आस में डाले हुए खड़े थे.
मे (मूह से ब्रा निकालते हुए): प्लीज़ पापा. निकालो इसे, बहुत पाईं और जलन हो रही है मेरी गांद में. प्लीज़ पापा, निकालो अपना लंड बाहर.
पापा: बेटा बस कुछ देर की बात है. तोड़ा पाईं तो होगा. फिर तुम्हे भी मज़ा आएगा. और वैसे भी तुम्हारा ही तो आइडिया था ना इफ़ॉंे के लिए घPअय करने का. तो फिर करो अभी अपनी गांद पे.
फिर पापा ने अपना लंड बाहर निकाला, और फिर से मेरी गांद में वापस डाल दिया. अब वो मेरी गांद की चुदाई करने लगे. मेरा बॅलेन्स नही रहा तो मैं वहाँ फ्लोर पे बैठ गयी. पर उतनी जगह नही थी, वरना पापा मुझे वही पे लिटा कर ही गांद मारते मेरी.
पापा का लंड मेरी गांद से बाहर निकलते ही मैं बेडरूम की और भागी, और पापा ने मुझे पीछे से आ कर पकड़ कर मुझे बेड पे उल्टा गिरा दिया. फिर वो पूरा मेरे उपर आ गये. बेडशीट को मेरे मूह में डालते हुए, वापस अपना लंड सेट किया, और मेरी गांद में डाल दिया. जब वो फिसल गया, तो वापस वॅसलीन को मेरी गांद पर और अपने लंड पे लगा कर फिर ट्राइ किया.
इस बार लंड अंदर जाने लगा, मेरी गांद की दीवारों को चीरता हुआ. वो गरम लोहे सा अंदर फील होने लगा.
पापा: भोंसड़ी की रंडी, आराम से गांद मरवा ले. इससे तेरी छूट की तरह गांद का च्छेद भी खुल जाएगा. और फिर तुझे उतना पाईं भी नही होगा.
और फिर मैने भी हार मान कर चादर को हाथो में भींच कर उल्टी लेती रही. अब पापा मेरी गांद में लंड अंदर-बाहर करते हुए मुझे छोड़ने लगे. धीरे-धीरे फिर मुझे भी दर्द और जलन कम होने लगी. पापा ने करीब 20 मिनिट्स तक मेरी गांद मारी, और लास्ट में अपना गरम-गरम पानी मेरी गांद में ही निकाल दिया. फिर वहीं हम दोनो नंगे सो गये.
उसके बाद फिर पापा ने दूसरे दिन मुझे 2 से 3 बार पीछे से छोड़ा. अब मुझे भी कंफर्टबल हो गया था गांद मरवाने में. फिर शाम को हम वापस अपने घर पहुँच गये.
सो फ्रेंड्स, इस तरह फाइनली मैने पापा को घPअय किया. सो, ये स्टोरी आपको कैसी लगी, कॉमेंट्स ज़रूर कीजिएगा.