सुहागरात में बहन के साथ धोखा

दोस्तों मैं सलिल अपनी बेहन की सुहग्रात की कहानी लेके आया हू. क्या आप लोगों ने पिछला पार्ट पढ़ लिया है? अगर किसी ने नही पढ़ा है, तो पहले उसको ज़रूर पढ़ ले. तभी आपको ये वाला पार्ट समझ में आएगा.

पिछले पार्ट में आपने पढ़ा की मैने बेट्टिंग में बहुत सारे पैसे गावा दिए, जो मैने मोहित नाम के बदमाश से लिए थे. जब मैं उसको पैसे दे नही पाया, तो उसने एक रात के लिए मेरी बेहन माँग ली.

फिर मैने बेहन की सुहग्रात वाले दिन उसके पति और ससुराल वालो को बेहोश कर दिया, और मोहित को दूल्हा बना कर उसके कमरे में भेज दिया. मैं भी उसके पीछे चला गया. अब आयेज-

मोहित सेहरा पहन कर कमरे में गया. उसने तोड़ा दरवाज़ा खुला ही छ्चोढ़ दिया कमरे की लाइट जल रही थी, और बेहन फूलों से सजे बेड पर घूँघट ओढ़ कर बैठी हुई थी. फिर मोहित दीप्ति के पास जाके बैठ गया, और चुप-छाप उसका घूँघट उठाने लगा.

बेहन का घूँघट उठा, तो उसने शर्मा कर मोहित की तरफ देखा. लेकिन मोहित को सेहरा पहले देख कर वो बोली-

दीप्ति: आप सेहरा अभी तक पहने हुए है?

मोहित: वो क्या है ना. हमारे घर का रिवाज़ है की पहली रात दूल्हा दुल्हन को अपना चेहरा नही दिखता. तो अगर तुम कहो तो मैं लाइट बंद कर डू? क्यूंकी अंधेरे में तुम मुझे देख नही पावगी. और वैसे भी सेहरा पहन कर मेरा सर दुखने लग लग गया है.

दीप्ति (हेस्ट हुए): जी कर दीजिए.

मोहित स्मार्ट था. उसने अपना काम करने का रास्ता बना लिया था. फिर वो उठा, और उसने लाइट बंद कर दी. अब कमरे में पूरा अंधेरा था. थोड़ी रोशनी बाहर से आ रही थी, लेकिन उससे सिर्फ़ परछाई दिख रही थी, शकल नही. अब वो बेड पर गया, और बोला-

मोहित: दीप्ति तुम बहुत सुंदर हो. ई लोवे योउ.

दीप्ति शरमाने लगी और बोली: ई लोवे योउ 2.

फिर मोहित मेरी बेहन के करीब गया, और उसके होंठो से होंठ चिपका दिए. अब वो उसके होंठ चूसने लगा. मेरी बेहन के मूह से ह्म ह्म की आवाज़े आने लगी. होंठ चूस्टे हुए उसने दीप्ति के सर का टीका, और गले का हार निकाल दिया. फिर उसने किस तोड़ी, और उसके सारे गहने निकाल कर साइड में टेबल पर रख दिए.

उसके बाद मोहित ने बेहन को लिटा लिया, और उसके उपर आके उसकी गर्दन और क्लीवेज को चूमने लगा. बेहन आ आ कर रही थी. फिर उसने बेहन को दोबारा उठाया, और उसकी चोली, और ब्रा पीछे से खोल कर निकाल दी. अब मेरी बेहन के खूबसूरत बूब्स उसके सामने थे.

उसने बेहन को फिर से लिटाया, और उसके बूब्स को चूसने लगा. बेहन की साँसे और तेज़ होने लगी, और वो उसके बालों में हाथ डाल कर सहलाने लगी. वो मोहित को धीरे-धीरे बोल रही थी, क्यूंकी शायद वो उसके निपल्स काट रहा था.

फिर मोहित नीचे गया, और उसके पेट पर किस करते हुए स्कर्ट खींच कर निकाल दिया. अब बेहन सिर्फ़ पनटी में थी. मोहित ने बेहन की पनटी भी निकाल दी. उसके बाद उसने जैसे ही उसकी छूट पर मूह लगाया, उसके मूह से आ निकली, और वो बोली-

बेहन: जी आप ये क्या कर रहे है?

मोहित: तुम्हे प्यार कर रहा हू.

बेहन: ऐसा ना कीजिए, ये गंदा है.

मोहित: तुम्हारा सब कुछ मेरा है, और ये मेरे लिए अमृत है.

ये कह कर मोहित दीप्ति की छूट चाटने लगा. इससे बेहन मदहोश होने लगी, और तड़पने लगी. उसकी उत्तेजना बहुत बढ़ रही थी. कुछ देर मोहित लगातार बेहन की छूट चाट-ता रहा, और उसमे जीभ डालता रहा. इससे बेहन आ आ करती हुई झाड़ गयी. मोहित ने उसका सारा पानी पी लिया.

फिर वो बेड से उतरा, और अपने कपड़े उतार दिए. उसका लंड बहुत बड़ा लग रहा था. उसके बाद वो बेहन के उपर चढ़ गया, और उसके बूब्स पर गांद रख कर बैठ गया. फिर उसने अपना लंड हाथ में लेके बेहन के होंठो पर लगाया, और बोला-

मोहित: चलो जान चूसो इसको.

बेहन ने पहले ऐसा ना कभी किया था, और ना देखा था. तो वो बोली-

दीप्ति: क्या करना है जी?

मोहित: चूसो इसको.

दीप्ति: ची! ये कैसे चूस सकती हू मैं.

मोहित: चूसोगी नही तो सुहग्रात शुरू कैसे होगी.

दीप्ति: लेकिन…

मोहित: अर्रे लेकिन-वेकीन कुछ नही. सब पत्नियों को पतियों का लंड चूसना पड़ता है. तुम्हारी मम्मी भी चूस्टी होगी तुम्हारे पापा का.

ये सुन कर बेहन को लगा की शायद चूस्टे होंगे, और उसने मूह खोल दिया. मोहित ने मेरी बेहन के मूह में लंड डाला, और ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा. उसने उसके मूह में लंड थोक-थोक कर उसका बुरा हाल कर दिया.

फिर जब लंड बाहर निकाला, तो बेहन की साँस उखाड़ रही थी. मोहित उसके उपर आके उसके होंठ चूसने लगा. होंठ चूस्टे हुए उसने नीचे से लंड छूट पर सेट किया, और धक्का मार कर छूट में पेल दिया.

मेरी बेहन दर्द से तड़पने लगी, और किस से मूह बंद होने की वजह से उसके मूह से सिर्फ़ ह्म ह्म की आवाज़े निकल रही थी. अब मोहित धक्के मार कर बेहन की चुदाई करने लगा. कुछ देर तक वो चुदाई और किस दोनो साथ में करता रहा. फिर उसने बेहन का मूह रिलीस कर दिया.

अब मेरी बेहन आह आ की कामुक सिसकियाँ ले रही थी. वो बोल रही थी-

दीप्ति: आ, बहुत मज़ा आ रहा है. आहह मेरी जान हो आप. आज तक ऐसा महसूस नही हुआ कभी. आज मैं आज़ाद महसूस कर रही हू. आ करते रहो आ.

मेरी बेहन की छूट को पहली ही रात में लंड का स्वाद लग गया था. वर्जिन छूट जब फट-ती है तो दर्द तो होता है, लेकिन जब आग पकड़ती है, तो मज़ा भी बहुत आता है.

कुछ देर वैसे ही छोड़ने के बाद मोहित ने मेरी बेहन को घोड़ी बना लिया. फिर उसने पीछे से उसकी चुदाई शुरू कर दी. वो साथ में बेहन की सॉफ्ट गांद पर थप्पड़ मार रहा था, और हर थप्पड़ पर बेहन आ आ की आवाज़े निकाल रही थी.

एक घंटे तक अलग-अलग पोज़िशन में बेहन की चुदाई करने के बाद मोहित ने आ आ करके अपना सारा माल बेहन की छूट में निकाल दिया. फिर वो उसके साथ ही लेट गया. बेहन कपड़े पहनने लगी तो उसने माना कर दिया. फिर जब बेहन सो गयी, तो वो उठ कर बाहर आ गया.

पहली चुदाई के बाद बेहन बहुत तक गयी थी, तो सुध-बुध खो कर सोई हुई थी. मैने लाइट जलाई तो बेहन नंगी सोई थी. उसकी छूट पर पहली चुदाई का खून लगा हुआ था, लिपस्टिक होंठो पर फैली हुई थी, और माँग का सिंदूर पुर माथे पर फैला हुआ था. उसके बूब्स पर मोहित के दाँतों के निशान थे.

फिर मैने चादर से उसको धक दिया, और नीचे बिना कपड़ों के सोए जीजू को उसके पास लाके सुला दिया ताकि दोनो को लगे की उनके दोनो के बीच सेक्स हुआ था. फिर मैं दूसरे रूम में जाके सो गया.

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