मम्मी की थ्रीसम चुदाई के दर्शन

मैं घास के ढेर के पीछे च्छूप कर बैठ गया था. कुछ 5 मिनिट के बाद मेरे सामने कोई आ कर खड़ा हो गया. वो और कोई नही पर वनिता आंटी थी. वनिता आंटी ने मुझे देख कर स्माइल पास की. वनिता आंटी ने उस दिन पर्पल कमीज़ और वाइट सलवार पहना था. उनका कमीज़ इतना टाइट था की उसमे बड़ी क्लीवेज बन रही थी. उनके बूब्स और उभरी हुई गांद देख कर मेरा मॅन मचल गया.

वनिता आंटी: क्या बात है अभी? मुझे लगा तुम मुझे अब भूल गये होगे. लेकिन तुम तो मेरा पीछा नही छ्चोढ़ रहे. मेरे पीछे-पीछे इतना डोर आ गये (वो हासणे लगी)?

मैं: मैं आपके पीछे नही आया. मैं मेरे काम से आया हू.

वनिता आंटी (मेरे कंधे पर हाथ रख कर): तुम मुझे रंडी, च्चिनाल, वेश्या क्या कुछ बोल चुके हो. तुम कहते थे ना मैं बाज़ारु औरत हू. शादी-सुधा हो कर बाहर चुड़वति हू. आज तुझे एक ऐसी चीज़ दिखती हू, जिसको देख कर तुम पागल हो जाओगे.

वनिता आंटी मेरा हाथ पकड़ कर उस फार्महाउस के पास लेकर गयी.

वनिता आंटी (बहुत धीमी आवाज़ में): तुम यहा बिना कुछ आवाज़ किए शांति से खड़े रहो. मैं अंदर से खिड़की खोल देती हू. तुम चुपके से देखना.

मैने हा मैं अपना सर हिलाया और वनिता आंटी मुझे आँख मार कर अंदर चली गयी.

वनिता आंटी अंदर जेया कर बोली: क्या यार तुम लोग भी इतनी गर्मी में अंदर का टेंपरेचर बढ़ा रहे हो. मैं खिड़की खोल देती हू.

मैने फिर अंदर जो नज़ारा देखा, वो देख कर मेरे होश उडद गये. मेरी मम्मी दो जवान लड़कों के बीच बैठी थी. एक लड़का आयेज से उनके लिप्स चूस रहा था, और दूसरा पीछे से सारी के उपर से उनके बूब्स को सहलाते हुए उनकी नेक पर किस कर रहा था. मुझे दोनो लड़कों की शकल दिखाई नही दे रही थी. उसके बाद पीछे जो लड़का था उसने मम्मी का मूह पीछे किया, और उनके लिप्स को चूमने लगा, और आयेज वाला उनका पल्लू गिरा कर ब्लाउस के उपर से बूब्स और क्लीवेज पर किस कर रहा था.

वनिता आंटी: भावना आज तो तेरे मज़े है. एक साथ 2-2 जवान लड़कों से एंजाय कर रही है. अंकित, कैसे माना लिया इस संस्कारी औरत को?

अंकित ने मम्मी के लिप्स छ्चोढे और बोला: घंटे की संस्कारी, ये तो एक नंबर की रंडी है. एक दिन भी बिना चुडवाए रह नही सकती.

मैने उस दिन पहली बार अंकित को इतना आचे से देखा था. अंकित को देख कर मैं शॉक्ड हो गया. उसको मैं पहले से जानता था, क्यूंकी अंकित की मम्मी जयश्री एक समय पर मेरे से चुडवाया करती थी. जयश्री भी बहुत चुड़क्कड़ है. उसको सिर्फ़ मैने नही पर और भी काई लोगों ने छोड़ा था. साला समय का चकरा ऐसा घूमा की जिसकी मम्मी को मैने अपनी रंडी बना कर रखा था, आज वहीं लड़का मेरी मम्मी को उसकी दोस्त के सामने ज़लील कर रहा था.

वनिता आंटी: देखो ना तरुण कितना खो गया है. भावना को छ्चोढ़ नही रहा.

तरुण: ये आंटी इतना मज़ा देती है ना. काश मेरी गर्लफ्रेंड इनकी तरह होती.

अंकित: ब्रो अछा है तेरी गर्लफ्रेंड इसके जैसी नही है. वरना किसी और के साथ ऐसे मज़ा करती. ये तो बहुत बड़ी रंडी है.

तरुण: सही कहा ब्रो. चल आज इस कुटिया को ऐसा मज़ा चखाते है की साली हम दोनो से चुडवाए बिना रह ना सके.

वनिता आंटी: ठीक है, आप तीनो एंजाय करो. तब तक मैं बाहर खुले में घूम कर आती हू.

अंकित: मदारचोड़ तुझे यहाँ आने को किसने कहा था? तेरी भी छूट में खुजली होने लगी है क्या?

वनिता आंटी (हेस्ट हुए): मेरी छूट तो तरुण से चूड़ने के लिए मचल रही है.

अंकित: चल भाग यहाँ से रंडी. इसके बाद तेरी बारी आने वाली है. देख तेरे होते हुए ये रंडी शर्मा रही है (अंकित मम्मी को बहुत गांडी गालियाँ दे रहा था).

अंकित: तरुण यार कभी-कभी तेरे से जेलासी होती है. सेयेल कॉलेज में लड़कियाँ तेरी दीवानी, ये मदारचोड़ औंतीयाँ भी तेरे पीछे पागल है. और ये भावना तो तुझसे मिलने के लिए थ्रीसम के लिए मान गयी.

तरुण: यार इसको मैने पहली बार यहाँ छोड़ा था. तब से इसको दूसरी बार छोड़ने के लिए तड़प रहा हू. तुमने मुझे कितने दिन का इंतेज़ार करवाया (मम्मी ये सब सुन कर हैरान हो गयी, क्यूंकी अंकित ने उसका फ़ायदा उठाया था).

अंकित: हा लेकिन तुझे मेरी शर्त तो पता है ना, बाद में मुकर गया तो मैं तेरी गांद मार लूँगा.

तरुण: तू साला बहुत बड़ा कमीना है, मुझे बहुत आचे से पता है की भावना के बदले तुझे मेरी कज़िन रीना को पटना है. और उसके लिए तुझे मेरी हेल्प चाहिए.

अंकित: हा यार रीना से मैं सक्चा प्यार करता हू. सेयेल एक दिन तेरा जीजा बनूंगा मैं.

तरुण: बन जाना यार, उससे पहले इसका मज़ा चख लेने दे.

इतने में वनिता आंटी मेरे पास आ कर खड़ी हो जाती है, और मुझे मम्मी को इशारे से दिखती है. मैं शरम के मारे मेरा सर उपर नही कर पता. और मैं किस कदर अपना मूह किसी को दिखा पाता. मेरी मम्मी की सकचाई अब दुनिया के सामने आने लगी थी. उस टाइम पर मेरे अंदर जो गुस्से की आग थी, वो मुझे कुछ भी करने से रोक नही सकती थी.

वनिता आंटी के प्रेज़ेन्स से मैं खुल कर रो भी नही सकता था. और उस दिन वनिता आंटी को बहुत सही मौका मिला था, मुझे एहसास करने का की वो नही मेरी मम्मी बाज़ारु, रंडी, च्चिनाल और वेश्या थी.

वनिता आंटी (ताना मारते हुए): अभी मेरी जान, कैसा लगा मेरा सर्प्राइज़?

मैं कुछ बोल नही रहा था, बस चुप-छाप साइड पर खड़ा हो गया. मेरे पास उनको कहने के लिए शब्द नही थे. मैं समझ गया था की अभी मेरा खराब टाइम चल रहा था. इस समय पर गुस्से से नही पर दिमाग़ से काम करना पड़ेगा. और उस टाइम पर मेरा दिमाग़ ये कह रहा था की अब जो हो गया उसको कोई बदल नही सकता था. पर जो हो रहा था, उसको महसूस करने का अवसर आ गया था.

मेरी बहुत इक्चा थी की कोई मेरी मम्मी को आचे से छोड़े, और मैं उनको देख साकु. उस दिन मुझे मेरी मम्मी की चुदाई देखने का मौका मिल गया था. मम्मी उस दिन एक नही पर 2-2 यंग लड़कों से एंजाय कर रही थी. वो देख कर मेरे अंदर एक लेहायर उठ गयी.

मैने मेरी नज़रें उठा कर उस कमरे में देखा. तब तक मम्मी की सारी निकाल चुकी थी, और वो लाइट ग्रीन ब्लाउस और वाइट पेटिकोट में खड़ी थी. मम्मी का फिगर इतना सेक्सी दिख रहा था की अब मेरा अंदर का नज़ारा देख कर लंड में हरकत होने लगी.

तरुण ने मम्मी को कमर से पकड़ कर ज़बरदस्त लीप लॉक लगा दिया था, और अंकित मम्मी की बॅक को चूमते हुए उनका ब्लाउस पीछे से खोल रहा था. उसके बाद तरुण ने मम्मी का ब्लाउस आयेज से खींच कर साइड में फेंक दिया. मम्मी अब हाफ कप रेड ब्रा और वाइट पेटिकोट में खड़ी थी.

मम्मी के आधे बूब्स ब्रा में से बाहर दिख रहे थे. क्या सेक्सी नज़ारा था दोस्तों. मैं अब भूल गया की अंदर जो औरत चुड रही थी, वो मेरी मम्मी थी.

तरुण की बात करू तो वो बहुत हॅंडसम लड़का था. और वो जिस तरह मम्मी को किस कर रहा था मैं समझ गया था की मम्मी क्यूँ उसकी दीवानी हो गयी थी. तरुण हर के चीज़ में मेरे से आयेज था. मम्मी अब मदहोश हो कर तरुण के उपर चढ़ गयी, और उसको किस में रेस्पॉन्स करने लगी.

तरुण काफ़ी स्ट्रॉंग लकड़ा था. उसने खड़े-खड़े मम्मी को गोदी में उठा लिया, और लिप्स किस कर रहा था. मम्मी का पेटिकोट थाइ के उपर तक चला गया था, और वो मम्मी की थाइस को सहला रहा था.

जब मम्मी को तरुण ने नीचे उतरा, उसके बाद अंकित ने उनको अपनी तरफ खींचा और उनके लिप्स को चूमने लगा. मम्मी अंकित को भी रेस्पॉन्स देकर किस कर रही थी. इतने में तरुण ने मम्मी के पेटिकोट का नाडा खोला और वो सरक कर उनके पैरों में आ गया.

मम्मी ने अंकित को किस करते छ्चोढ़ तरुण की तरफ देखा, और वो मुस्कुरा रही थी. मैं समझ गया था की मम्मी दोनो लड़कों के साथ एंजाय कर रही थी.

वनिता आंटी (मेरे एक-दूं करीब आ कर): देख अभी तेरी मम्मी कैसे मज़े कर रही है. तेरी मम्मी तो संस्कारी बनने का ढोंग करती है. देख वो तो मेरे से भी बड़ी रंडी है.

मैं वनिता आंटी की बातों को इग्नोर करके मम्मी की लिव चुदाई देख रहा था. अब तरुण ने मम्मी की बॅक को किस करते हुए उनके ब्रा का हुक खोल दिया. मैं देख सकता था की दोनो के पंत के उपर तंबू बन गया था. और दोनो आयेज और पीछे से मम्मी की पनटी के उपर से छूट और गांद पर अपना लंड रग़ाद रहे थे.

मम्मी भी मुस्कुरा कर दोनो को रेस्पॉन्स दे रही थी. अब अंकित ने आयेज से मम्मी के ब्रा को खींच कर निकाल दिया, और तरुण ने मम्मी का पनटी उनके पैरों से निकाल दी. अंकित मम्मी के बूब्स को पकड़ कर चूस रहा था. तरुण घुटनो पर बैठ कर मम्मी की गांद में मूह घुसा कर उनकी छूट चाट रहा था. मम्मी ने अब अपना असली रंग दिखना शुरू कर दिया. उसके मूह से सेक्सी आवाज़ निकालने लगी.

मम्मी: उम्म… आह… छातो दोनो. कितना मज़ा आ रहा है, और आचे से चूसो.

मम्मी अंकित के बालों पर हाथ सहलाते हुए उसके बूब्स चुस्वा रही थी. वो पीछे से तरुण के फेस को अपनी छूट पर दबा रही थी, और ये दोनो भी मम्मी को खुश करने की पूरी कोशिश कर रहे थे. अब अंकित आयेज से घुटनो पर बैठ गया और तरुण पीछे से खड़ा हो गया.

तरुण पीछे से मम्मी का मूह अपनी तरफ करके लिप्स किस करने लगा, और साथ में पीछे से हाथ डाल कर उनके दोनो बूब्स दबा रहा था. अंकित ने मम्मी का एक पैर अपने कंधे पर लिया, और मम्मी की आयेज से छूट चाटने लगा. मैं देख रहा था की अंकित छूट को चाट नही पर खाने की कोशिश कर रहा था. मम्मी भी उसका मूह अपनी छूट में दबा रही थी.

तरुण (मम्मी के बूब्स को हार्ड्ली प्रेस करते हुए): क्या सेक्सी माल हो तुम. इतनी उमर में भी एक जवान लड़की से भी ज़्यादा गरम हो. मैने ऐसा फिगर आज तक नही देखा.

अंकित (मम्मी की चुप पर से मूह हटा कर): ब्रो इसकी छूट की गर्मी की अब आदत लग गयी है. साला जितना भी छोड़ो मॅन नही भरता.

तरुण (मम्मी से): मज़ा आ रहा है ना जानेमन?

मम्मी: बहुत ही ज़्यादा मज़ा आ रहा है. तुम दोनो मेरी जाम कर चुदाई कर चुके हो. कल अंकित ने कहा की तुम दोनो मुझे एक साथ छोड़ना चाहते हो. तब से मैं खुशी से पागल हो रही हू.

अंकित: ब्रो मैने कहा था ना ये एक नंबर की रंडी है. हम दोनो का लंड एक साथ लेने के लिए मान जाएगी.

तरुण: ये जैसी भी है, लेकिन मुझे ये पसंद आ गयी है. जब तक इसकी छूट लंड ले सकती है तब तक चुदाई करनी है.

अब तरुण ने मम्मी को अपनी गोदी में उठा लिया, और खड़े-खड़े उनको किस करने लगा. उसके बाद उसने बड़े प्यार से मम्मी को बिस्तर पर लिटा दिया. मम्मी अब बिस्तर पर नंगी लेती हुई सेक्सी अंगडायाँ ले रही थी. और उसका नंगा जिस्म देख कर तरुण और अंकित पागल हो रहे थे. मम्मी दोनो को आँखों की शरारत से ललचा रही थी. अब दोनो मम्मी को हवस भारी निगाहों से देखते हुए अपने कपड़े निकाल रहे थे.

मम्मी का ऐसा रणदीपना देख कर मेरे अंदर कुछ होने लगा. जब अंकित और तरुण अपनी पंत खोल रहे थे, तो मम्मी उनका लंड लेने के लिए तड़प गयी. वो अब बेड पर बैठ गयी, और उनके लंड बाहर निकालने का बेसब्री से इंतेज़ार करने लगी. दोनो के लंड बहुत बड़े और मोटे थे. मम्मी उनके लंड की तरफ देख रही थी, और फिर उनकी आँखों में देख रही थी. दोनो समझ रहे थे की ये रंडी अब चूड़ने के लिए तड़प रही थी.

वनिता आंटी (मेरी पंत के उपर से लंड को सहलाते हुए): देखो तुम्हारी मम्मी को कैसे दो लड़कों एक साथ मज़ा कर रही है. ये होती है संस्कारी रंडी.

अब उसके बाद मैने कैसे वनिता आंटी की बकबक बंद की, और मम्मी की कैसे चुदाई हुई, वो नेक्स्ट पार्ट में बतौँगा. आपको स्टोरी कैसी लग रही है वो कॉमेंट करके बताए और आपका फीडबॅक मूडछंगेरबोय@गमाल.कॉम पर मैल करे.

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