जंगल में बाप-बेटी का सेक्स

ही फ्रेंड्स, हाउ अरे योउ ऑल? होप योउ ऑल अरे डूयिंग वेल. और शायद आपको जिसकी लेनी थी, वो मिल गयी होगी, या फिर जल्द ही मिल जाएगी.

बहुत टाइम से मैं मेरी स्टोरी को आयेज कंटिन्यू करने का सोच रही थी, पर हो नही पा रहा था. भाई भी दूसरों की स्टोरीस को नॅरेट कर रहा है. सो फाइनली अपनी बिज़ी लाइफ (योउ नो हाउ बिज़ी इट इस) से मैने टाइम निकाल कर लिखना शुरू किया. सॉरी फॉर तीस लाते पोस्टिंग. चलिए शुरू करते है उसी होटेल से, जहाँ पे आप मुझे मेरे पापा के साथ अकेले छ्चोढ़ आए थे.

हम उसी होटेल से निकल चुके थे. घर का रास्ता भी बीच-बीच तोड़ा सुनसान था. पापा ने होटेल में मेरे 2 होल्स में अपना लंड डाल चुके थे. उन्हे अब मेरा तीसरा होल चाहिए था, मेरी गांद का. और उसके बदले में वो मुझे न्यू इफ़ॉंे भी दिलाने वाले थे.

उन्होने मुझे अपना प्रपोज़ल बता दिया था. अब मुझे ही एस या नो कहना था. मेरे दिल ने माना किया, पर दिमाग़ बार-बार एक ही चीज़ बोले जेया रहा था, की 2 तो दे चुकी हो, 1 और दे डाल. बदले में इफ़ॉंे मिल रहा है. और इस दिल और दिमाग़ की लड़ाई में दिमाग़ जीत जाता है.

अब होटेल तो हम छ्चोढ़ चुके थे, और मों को भी बोल चुके थे की देर रात को घर आ जाएँगे. अब घर पहुँच कर मैं तो गांद देने से रही, क्यूंकी मों का दर्र था. अगर पापा छूट मारते तो मरवा लेती, क्यूंकी उसका मुझे एक्सपीरियेन्स हो चुका था. पर गांद मराई मेरे लिए नयी थी, सो मैं ये रिस्क घर पे तो लेने से रही. तो मैने पापा से कहा-

मे: पापा, मैं आपको अपनी घPअय करने के लिए रेडी हू.

पापा: वाह बेटा, फिर तो तेरा इफ़ॉंे पक्का. घर जेया कर कुछ जुगाड़ करते है तुम्हारे गपे के लिए.

मे: नही पापा, आपने बोला था की आप मुझे होटेल मैं मेरे तीनो होल्स मार कर मुझे पूरी औरत बनाना चाहते है.

पापा: हा बेटा, कहा तो था.

मे: तो बस पापा, समझ लो की मुझे घर पहुचने से पहले वो पूरी औरत बनाना है.

पापा: पर ये कैसे होगा?

मे: वो मैं नही जानती. पर आपके लिए ये घPअय वाली स्कीम हमारे घर पहुँचने से पहले तक की है. बाकी आप देख लो.

पापा: बेटा, अभी घर का रास्ता तोड़ा ही बाकी है. ये कैसे मुमकिन है?

मे: ये मैं नही जानती. आपको मैं अपनी अशोल देने को रेडी हू, पर घर पहुचने से पहले. और कल आप मुझे इफ़ॉंे दिलाएँगे ये पक्का है, आप मेरी गांद मारो या ना मारो. क्यूंकी मैने तो आपको पर्मिशन दे रखी है. पर आप नही मारोगे तो ये आपका फॉल्ट है.

मेरे माइंड में था की बिना गांद मरवाए ही फोन मिल जाएगा कल तो. इसलिए मैं पापा को ज़्यादा पुश कर रही थी. मुझे लगा की ऐसे करके बिना गांद दिए इफ़ॉंे मिल जाएगा. क्यूंकी घर पे मों वेट कर रही थी, सो. पर हुआ कुछ उल्टा ही. पापा ने आयेज जेया कर गाड़ी को ब्रेक किया. फिर मुझसे डोर जेया कर 2-3 कॉल किए, और फिर मेरे पास आए.

पापा: बेटा, तोड़ा हल्का हो लो, फिर निकलते है.

मुझे उतना प्रेशर नही था, पर बिके पे बैठने की वजह से तोड़ा डिसकंफर्ट सा था. सो मैने भी वहाँ एक साइड में जेया कर नीचे बैठ ही रही थी, की पापा ने बोला-

पापा: बेटा यहाँ नही, रोड पास में ही है. तुम रूको मैं आता हू.

पापा ने ये कह कर बिके को वहाँ एक पेड़ के पीछे खड़ा किया. उन्होने हमारा बाग भी ले लिया, और मुझे वहाँ झाड़ियों में ले गये, और मुझे एक जगह दिखाई की तुम वहाँ पे चली जाओ. मैने वहाँ जेया कर सस्यू किया, और वापस आई. मैने देखा जहाँ पापा खड़े थे, वहाँ ज़मीन पे चादर बिछाई हुई थी, और पापा अपना लंड बाहर निकाल के हाथ में लेकर मसल रहे थे.

मे: ये सब क्या है, पापा?

पापा: तुझे पूरी औरत बनाने की तैयारी (ये सुन कर मैं थोड़ी सी अनकंफर्टबल हो गयी).

मे: नही, यहाँ पे नही, घर चलते है.

पापा: बेटा जी, तुम कुछ भी बोलो. आज तो तुम्हारी गांद का सील यहीं पे टूटेगी.

मे: नही दाद, प्लीज़ घर चलो. मुझे यहा दर्र सा लगता है.

पापा: डरना तो तोड़ा चाहिए भी. आज पहली बार अपनी गांद जो मरवावगी. पर एक बार उसे छुड़वाने के बाद तुम्हारा दर्र हमेशा के लिए चला जाएगा.

ये सुन कर मैं वहाँ से बिके की और चलने लगी. पर पापा ने मेरा हाथ पकड़ कर मुझे अपनी तरफ खींच लिया, और मेरे होंठो को चूसने लगे, और मेरे बूब्स और थाइस पे अपना हाथ फेरने लगे. वो मेरे बूब को हाथो में लेकर दबाने लगे, मसालने लगे. मेरा हाथ पकड़ कर अपने लंड को डबवाने लगे. मैने फिर से अलग हो कर बिके की और जाना चाहा, पर इस बार उन्होने मेरे बालों को पकड़ कर खींचा.

पापा: साली रंडी, कहाँ जेया रही है. आज तो तुझे औरत बना कर ही घर वापस लेकर जौंगा.

और पापा ने बाल खींचे हुए ही मुझे वापस किस्सिंग करना चालू किया. वो किस कम और मेरे होंठो को काट ज़्यादा रहे थे. मुझे पाईं फील हो रहा था, पर खुले आसमान के नीचे झाड़ियों के बीच इस वाइल्ड सेक्स में मज़ा भी बहुत आ रहा था.

पापा ने वापस मुझे मेरे बालों को खींच कर घुटनो के बाल बिताया, और अपनी पंत खोल कर अपना लंड मेरे मूह में डाल दिया. फिर मेरे मूह की चुदाई करने लगे. मूह को मेरे छोड़ते हुए पापा ने मुझे नीचे झुकाया, और मेरा पिछवाड़ा अपनी तरफ किया.

सलवार तो पहले ही नीचे सरक गयी थी. मेरी पनटी को नीचे करके फिर उन्होने कुछ जेल्ली जैसा मेरी गांद के उपर लगाया. फिर अपने लंड को अशोल पे रख कर अंदर इनसर्ट करने लगे.

एक दो बार लंड फिसल गया, पर तीसरी बार पापा ने मेरी कमर को दबाया, जिससे में ज़्यादा हिलू नही. फिर एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर मेरी गांद के अंदर डालना शुरू किया. मैं घोड़ी बने हुए झटपटा रही थी. जैसे ही लंड ने मेरी गांद की दीवारों को खोलना शुरू किया, मेरे मूह से ज़ोर से आ की चीख निकल गयी. ये सुन कर पापा ने मेरा मूह दबा दिया.

पापा: साली रंडी, चिल्ला मत. कोई आवाज़ सुन लेगा तो? ये होटेल रूम नही है.

मे: यार, पापा जान-बूझ कर थोड़ी किया है. वो पाईं हुआ तो मूह से चीख निकल गयी. और प्लीज़ मुझे ये रंडी कहना बंद करो. क्या मैं कोई रंडी हू?

पापा (मेरे बालों को वापस खींचते हुए): मैने बोला की घर जेया कर तेरी गांद मारूँगा. पर नही, तुझे तो अभी मर्वानी थी. तो ले मरवा अपनी.

अब पापा को कैसे समझती की मुझे तो बिना अपनी गांद मरवाए ही फोन चाहिए था. इसीलिए तो मैं बिके की तरफ वापस भाग रही थी. पर जब पापा ने बिके रोक कर मुझे झाड़ियों में ला कर नंगा किया, तो मुझे लगा की मेरी किस्मत में ऐसे ही मेरी गांद का सील तुड़वाना लिखा होगा. पर ये सब पापा को कैसे कहती?

पापा ने वापस अपने लंड को मेरी गांद में डालने का ट्राइ किया. मैं अपना सिर झुका के, बेबस हो कर वेट कर रही थी, उस मोमेंट का, की जब पापा का लंड मेरी गांद में पूरा सेट हो जाए. पर उसके बदले मेरे कानो में एक आवाज़ आई, “अरे भैसब, अकेले-अकेले ही मज़ा लोगे क्या? कुछ मौका हमे भी डाई द्यो.”

मैने और पापा ने एक साथ मूड कर पीछे देखा तो पापा की आगे का ही एक आदमी पीछे खड़ा था. उसने अपना मोबाइल हमारी और तां रखा था, की जैसे हमारी वीडियो ले रहा हो. मेरी नज़र उसके चेहरे पे गयी. फिर नीचे गयी तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी.

उसने अपने हाथो में अपना लंड पकड़ के रखा था, जिसे वो हिला रहा था. पापा से ज़्यादा साइज़ का मोटा और काला लंड देख कर तो मेरा मूह सूख गया.

सो फ्रेंड्स कैसा लगा स्टोरी का ये वाला पार्ट कॉमेंट्स में ज़रूर बताईएएगा.

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