सर्दी के मौसम में सगे भाई से चुद गयी

मैं नीचे नजर डाली तो आलोक का ताकतवर लंड मेरे भोसड़े की दीवार, उसके सुरक्षा कवच को भेद चुका था। उसका लंड जल्दी जल्दी मेरी चूत में अंदर बाहर सरक रहा था। मै चुद रही थी। फिर अलोक ने मेरी ढीली नाईटी के गले से मेरे दोनों चूचियों को बाहर निकाल लिया और मुंह में लेकर चूसने लगा। मुझे जन्नत जैसा मिल रहा था। वो मेरे दूध पी पीकर मुझे पेल रहा था। मैं भी कितनी छिनाल बहन थी की अपने सगे भाई से चुदा रही थी। मैं बिलकुल भी शर्म नही कर रही थी। मेरे जिस्म में सेक्स का ज्वालामुखी फट चुका था। मेरी चूत में तो वासना के शोले धधक रहे थे। मेरी चूत किसी भट्टी की तरह गर्म हो गयी थी। बार बार मैं अपनी गांड और कमर हवा में उपर उठा देती थी।

“अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ..अअअअअ..आहा ..हा हा हा… तुम मस्त चुदाई कर रहे हो भाई..करते रहो.रुकना मत.. अहहह्ह्ह्हह.चोदो चोदो मुझे और कसके चोदो भाई” मैं इस तरह से किसी रांड की तरह चिल्ला रही थी और अपने सगे भाई का मनोबल बढ़ा रही थी। फिर आलोक और जोश में आ गया। उसने मेरे दोनों बूब्स को हाथ से पकड़ लिया और कस दिया और जल्दी जल्दी मुझे पेलने लगा। मैं बिस्तर से कुछ इंच उपर उछली जा रही थी। मुझे मैं सेक्स की चरम सीमा को महसूस कर रही थी। 1 मिनट के लिए आलोक रुक गया। उसका मोटा लंड मेरे भोसड़े में घुसा हुआ था। वो 1 मिनट के लिए रुक गया और मेरे होठ फिर से किस करने लगा। मैंने शरारत की और उसके नीचे के होठ को दांत से काट लिया। ऐसा करने से लड़के और जादा सेक्सी हो जाते है। उसके बाद मेरे भाई आलोक ने फिर से मेरे भोसड़े में लंड की सप्लाई शुरू कर दी।

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वो मुझे फिर से पेलने लगा। मैंने भी अपने दोनों पैर खोल दिए थे। आलोक मुझे फटाफट चोद रहा था। मेरे पेट में मरोड़ उठ रही थी। फिर आलोक ने अपनी स्पीड अचानक से बढ़ा दी। और बिजली की रफ्तार से मेरी बुर चोदने लगा। मैंने भी अपने दोनों पैर हवा में उठा दिए। मजबूरन सर्दी के मौसम में भी मुझे रजाई हटानी पढ़ गयी थी। मुझे रजाई के साथ चुदाई ठीक से नही हो पा रही थी। मैंने रजाई को पकड़कर जमीन में फेंक दिया। अब आलोक खुलकर मेरे भोसड़े में बड़े, और गहरे शॉट मार सकता था। मैं फिर से “उ उ उ उ उ..अअअअअ आआआआ. सी सी सी सी… ऊँ-ऊँ.ऊँ..” बोलकर चिल्लाने लगी। फिर आलोक ने ऐसा ही किया। वो जोर जोर से लम्बे शॉट्स मेरी चूत में मारने लगा। जैसे कोई फुटबालर गोल करने की कोशिश कर रहा था। फिर आलोक ने अपना सीधा हाथ मेरे चूत के दाने पर रख दिया और जल्दी जल्दी घिसने और मसलने लगा। अब तो मैं पागल हुई जा रही थी।

“भाई…आआआआआ.औररर..जोररर से चोदोदो दो..सी सी सी..ईई. आज फाड़ के रख दो मेरा भोसड़ा। किसी रंडी की तरह आज तुम मेरी चूत मारो” मैंने कहा और मैं किसी बेहया और बेशर्म लड़की की तरह खुद अपने चूत के दाने को घिसने और मसलने लगी। अलोक मुझे जल्दी जल्दी चोदने लगा। लगा की मुझे टॉयलेट हो जाएगी। फिर मैंने जल्दी से अपने मुंह से कुछ थूक लिया और चूत के दाने पर लगा दिया और जल्दी जल्दी दाने को घिसने लगी। मुझे चरम सुख मिल रहा था। 35 मिनट आलोक ने मुझे चोदा और फिर लंड 1 सेकंड के लिए बाहर निकाल लिया। उसने अपनी हाथ की बीच वाली 2 लम्बी ऊँगली मेरी बुर में डाल दी और जल्दी जल्दी मेरी चूत फेटने लगा। आखिर मेरे सब्र का बाँध टूट गया। मेरी चूत अपना झरना छोड़ने लगी। पिच्च पिच्च पिच्च पिच्च कम से कम 8 10 बार मेरी चूत से पानी निकला जिसमे आलोक का पूरा मुंह भीग गया। फिर उसने लंड मेरे भोसड़े में वापिस सरका दिया और मुझे 10 मिनट और चोदा। दोस्तों सुबह जब मैं उठी तो मैं अपना कुवारापन खो चुकी थी। अपने सगे भाई के साथ मैंने कसके चुदाकर अपनी सील तुडवा ली थी। खून के दाग बेडशीट पर लगे हुए थे। मैं चुद चुकी थी वो भी अपने आगे भाई आलोक से।

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