स्कूल की पुरानी मस्त यादें

मेरा नाम रवि है, और आज मैं आप सब के लिए एक बहुत मस्त कहानी ले कर आया हूँ. ये कहानी मेरे पहले सेक्स की है, जो काफ़ी मजेदार था. वैसे तो इस बात को काफ़ी टाइम हो गया है.

पर आज बैठे बैठे मुझे वो हसीन पल याद आ गये. मैने सोचा क्यो ना आज उन हसीन पॅलो, को एक खूबसूरत कहानी मे बदल दु. तो ये मेरी एक छोटी सी कोशिश है, अगर पसंद आए तो मुझे ज़रूर बताना.

उस टाइम मैं 18 साल का था, और मैं स्कूल मे 10+2 क्लास मे ही गया था. मेरी क्लास मे मीनू नाम की लड़की नयी आई थी. जब मैने उसे पहली बार देखा, तो तभी मैने उसे अपना दिल दे दिया था.

मैने इससे पहले उससे सुंदर लड़की कभी न्ही देखी थी. उसके पापा रेलवे मे काम करते थे. वो पहले करनाल मे रहती थी, पर अब वो देल्ही मे आ गई थी. वो बहुत खूबसूरत थी, उसके आते ही. सब लड़के उसको पटाने मे लग गये.

पहले दिन ये बात पूरे स्कूल मे आग की तरह फैल गई. मैं भगवान से कह रहा था, की काश ये मेरी क्लास मे ही आ जाए. और देखिए भगवान ने मेरी सुन ली, वो 10+2 क्लास मे आ गई.

मैं कसम से उस दिन काफ़ी खुश था. अब मुझे यकीन हो गया था, जब भगवान ने मेरा साथ यहाँ तक दे दिया है. तो इसकी चूत मारने तक भी वो मेरा ही साथ देगा.

मीनू वो लड़की थी, जिसका जिस्म देख कर मेरा उस पल उसके साथ सेक्स करने का मन होने लग गया. मीनू का रंग गोरा, उसके बूब्स करीब 30 के होंगे. जो उसके सूट मे से बाहर आने को तड़प रहे थे. उससे नीचे उसकी पतली सी कमर जिसे देख कर मेरा मन उसकी कमर को चाटने का कर राहा था.

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उसके नीचे उसकी मस्त मोटी गांड थी, जिस के दीवाने पूरे स्कूल के लड़के हो गये थे. उसका साइज़ 34 होगा. पर उसकी गांड की खास बात ये थी, की उसकी गांड बाहर की ओर निकली हुई थी.

जब वो चलती थी, तो उसकी गांड बहुत ही मस्त तरीके से मटकती थी. मेरा मन उसकी गांड मारने का होने लग गया था. उस टाइम मैं स्टडी मे काफ़ी अच्छा था. इसलिए क्लास के सारे स्टूडेंट मुझसे ही अपनी प्राब्लम सॉल्व करवाते थे.

मैं दिखने मे हॅंडसम ही था, इसलिए मैने मीनू के आते ही उस पर लाइन मारना शुरू कर दिया. स्कूल के बाद मैं जान बुझ कर उसके साथ घर जाता था. रास्ते मे मैं उससे बात करता था.

एक दिन मैने उससे पूछा की मैं उससे दोस्ती करना चाहता हूँ. वो झट से मान गई. उसकी हा सुन कर मैं खुशी से झूम उठा. हम दोनो ने एक दूसरे के नंबर ले लिए. और फिर मैं उससे घर जा कर भी बातें करता था.

हम दोनो की दोस्ती धीरे धीरे आगे बढ़ रही थी. फिर हमारी गर्मियो की हॉलिडेज़ आ गई. हम दोनो ने पूरा एक महीना फोन पर ही बात करी. फिर जब हम फिर से स्कूल आए तो मुझे पता चला की उसका जन्मदिन कल है.

मैने रात को ठीक 12 बजे उसे फोन किया और उसे विश किया. विश करने के बाद हम दोनो और बातें करने लग गये. मैने मौका सही समझा और उसे आई लव यू कह दिया.

मीनू –आई लव योउ टू रवि, मैं भी तुमसे अब प्यार करने लग गई हूँ.

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मैं – आई लव यू सो मच मीनू, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ. मुझे तुम बहुत पसंद हो.

मीनू – मुझे सब पता है, अच्छा वैसे स्कूल के अब 3 महीने ही रह गये है. क्या हम दोनो इन 3 महीने मे कुछ कर पाएगें.

मैं – अगर उपर वाले ने चाहा तो ज़रूर कर पाएगें.

फिर हम दोनो ने 10 मिनिट और बात करी, और फिर फोन कट करके हम दोनो सो गये. अगले दिन सनडे था, मुझे मेथ्स की अपनी कॉपी मीनू के घर से ले कर आनी थी. इसलिए मैं तयार हो कर उसके घर चला गया.

उसके घर जा कर मैने देखा की उसके पापा ड्यूटी पर जा रहे थे, और उसकी मम्मी तयार हो रही थी. मैने उसकी मम्मी को नमस्ते करी, और सोफे पर बैठ गया.

आंटी – और बेटा स्टडी कैसी चल रही है.

मैं – ठीक चल रही है आंटी.

आंटी – गुड वेरी गुड, अच्छा मीनू को ज़रा मेथ्स की प्राब्लम समझा देना. अभी वो नहा रही है, और उसे कह देना की मैं साथ वाली आंटी के साथ मार्केट जा रही हूँ. मुझे आते हुए रात हो सकती है.

मैं – ठीक है, आंटी मैं कह दूँगा.

फिर आंटी भी घर से चली गई, अब मैं और मीनू घर पर अकेले थे, मैं तो खुशी से उछलने लग गया. क्योकि आज मेरी दिल की तमन्ना पूरी होने वाली थी. मीनू को न्ही पता था, की मैं घर पर हूँ. और उसके घर वाले घर से चले गये है.

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