मेरी सौतेली बहन की कामुकता

मेरा तो पहला जैसा ही रूटीन रहा, आशिमा भी सुबह निकल जाती थी पर वह मेरे आने से पहले ही घर होती थी. शाम को हम लोग कुछ छोटी मोटी बातें कर लेते, उसे कुछ रोजमर्रा की तकलीफ होती तो मैं उसका हल बता देता. कभी लेट आता था तो वह खाना खा लेती थी, वरना हम दोनों इकट्ठे ही खाते थी. बाद में दोनों अपने अपने कमरे में सोने चले जाते थे.

अब तक सब वैसा ही चल रहा था जैसे एक आम घर में चलता है.

एक दिन मेरी तबीयत कुछ ढीली थी तो मैं जल्दी घर आ गया और यहीं से ऑफिस के सर्वर में लॉग कर लिया और काम करने लगा.

करीब चार बजे सर भारी सा लगा तो उठ कर किचन में गया और कॉफ़ी तैयार करने लगा. हमारा घर सबसे ऊपर की तीसरी मंजिल पर था, और दूसरी पर तब कोई नहीं रहता था. किचन में एक खिड़की थी जो बाहर आगे की और खुलती थी.

जब मैं कॉफ़ी बना रहा था तो नीचे एक कार रुकने की आवाज़ आई, क्यूंकि मेरी कार भी वहीं खडी थी मैंने खिड़की की ग्रिल से नीचे झाँका. क्या देखता हूँ कि एक हौंडा सिटी रुकी है और आशिमा उस कार से उतर रही थी. ड्राईवर साइड से एक लड़का भी उतरा और दोनों सीढियों की ओर बढे.

एक बार तो मैं कुछ चौंका, मगर फिर सोचा कोई कॉलेज का दोस्त होगा, इधर आ रहा होगा तो यह भी साथ हो ली होगी. फिर सोचा, अब इतनी छोटी भी नहीं है, उन्नीस की हो जायेगी, अगर कोई बॉयफ्रेंड बन भी गया हो तो क्या बुराई है.
इसी ऊहापोह में पांच-दस मिनट निकल गए, मगर आशिमा ऊपर नहीं आई, ना ही वह गाड़ी ही वहां से हिली.

यह कहानी भी पड़े  बहुत मीठा स्वाद थी बहन की चूत की

मुझसे रहा न गया और मैंने धीरे से दरवाज़ा खोल नीचे सीड़ियों में झाँका. दूसरी मंजिल, और हमारे वाली मंजिल पर सीढ़ियों की लाइट नहीं जल रही थी मगर उससे नीचे वाली मंजिल पर लाइट जल रही थी. उसी बल्ब की रोशनी ऊपर भी आ रही थी.

देखता हूँ कि दूसरी मंजिल की सीढ़ियों के मोड़ पर वह लड़का दीवार के सहारे खड़ा है और उसने आशिमा को बांहों में भींच रखा है. वे दोनों लगातार किस किये जा रहे हैं और वह लड़का आशिमा के मुंह पर अपना मुंह लगा कर चूस रहा था. आशिमा भी उसका पूरा साथ दे रही थी.

चूंकि मेरे फ्लोर पर अँधेरा था तो उन्हें मैं आसानी से नज़र नहीं आ सकता था. दूसरा आशिमा को यह उम्मीद भी नहीं थी कि मैं घर पर हूँगा.
किस करने के साथ वह लड़का नीचे से आशिमा की गांड को अपने हाथों के जोर से अपनी तरफ तरफ दबा रहा था ताकि कपड़ों के ऊपर से ही सही, उसका लंड आशिमा की चूत के आसपास लग जाए.

कुछ देर बाद उसने आशिमा को कन्धों से नीचे की और दबाने की कोशिश की, मैंने देखा आशिमा प्रतिरोध कर रही थी, मगर वह बहुत बलिष्ट था, आशिमा से दो-तीन साल बड़ा भी लग रहा था, शायद कोई हरियाणा का जाट या गुर्जर होगा.

उसके मर्दाने जोर के आगे आशिमा की एक ना चली, और उसने आशिमा को नीचे की होकर बैठने को मजबूर कर दिया. आशिमा अब उस कोने वाली बड़ी सीढ़ी पर उसके सामने घुटने के बल बैठ गयी.
लड़के ने ज़िप खोली और लंड बाहर निकालने की कोशिश करी. मगर क्यूंकि शायद उसका लंड शायद बुरी तरह तना था वह बाहर निकल नहीं पा रहा था. उसने उसी समय अपनी बेल्ट खोली, पैन्ट और चड्डी थोड़ी से नीचे करी. उसका लोड़ा उछल के बाहर निकल आया.

यह कहानी भी पड़े  पति के दोस्त की दुल्हन बनकर सुहागरात

जब उसका लंड बाहर आया तो मैंने देखा उसका लंड काफी बड़ा और मोटा सा था. वह खुद तो गोरा था, मगर उसका लंड कुछ काला था. उसने एक हाथ अन्दर डाल के अपने टट्टे भी बाहर निकाल दिए.
उसके बाद उसने आशिमा के सर को अपने लंड की और दबाया ताकि वह उसे मुंह में ले ले.

आशिमा ने एक बार तो मुंह में लिया मगर फिर बाहर निकाल दिया और उस लड़के से हल्के से कुछ बोली. मेरा ख्याल है उस लड़के का लंड उस समय पूरी तरह साफ़ नहीं था, वैसे भी गर्मी का मौसम था, ऐसे में लंड और टट्टे अगर साफ़ ना हों तो एक नशीली सी बदबू देते हैं जो हर लड़की को पसंद हो यह ज़रूरी नहीं.

लड़के ने जेब से एक वेट नेपकिन निकाला और उस से लंड को और टट्टे को अच्छे से साफ़ किया. साफ़ होने के बाद उसने फिर से लोड़ा आशिमा के मुंह में लंड ठूँस दिया. आशिमा धीरे धीरे उसका सुपारा चूसने लगी.

अब तक लड़का ठरक से ज़ालिम हो चुका था, उसके चेहरे से यह ज़ाहिर हो रहा था, उसने आशिमा का सर को दोनों तरफ पकड़ लिया और खुद आगे-पीछे होकर उसके मुंह की तेज़-तेज़ चुदाई करने लगा. यह चोदना लगभग पांच सात मिनट तक चला. उसका लोड़ा आशिमा की थूक और उसके प्री-कम से बुरी तरह से चमकने लगा था. साथ-साथ उसके मुख से सिसकारियां भी निकल रहीं थीं.

Pages: 1 2 3

error: Content is protected !!