मेरी सौतेली बहन की कामुकता-2

मैं सेक्स करते हुए गालियाँ देता हूँ, विशेषतः जब वीर्य छूटने को होता है, मगर पता नहीं क्यूं अभी भी आशिमा को जिस टाइप की गाली देने का मैं आदी था, कहने में झिझक हो रही थी,
बस सेक्सी, बिच जैसे अंग्रेजी शब्द ही मुंह से निकल रहे थे.

कुछ देर में ही यह सब मेरे लोड़े की बर्दाश्त के बाहर हो गया और मैं बोला ‘ये ले मेरी बिच, अपने भाई का सीमन ले!’ और मेरा लोड़ा ज़ोरदार धार मारने लगा, मेरे हल्के पीले सॉलिड माल से आशिमा की सारी पैन्टी भीग गयी.

थोड़ी देर में मैं उठा, आशिमा की ही दूसरी पैन्टी से अपने लंड को पौंछ कर साफ़ किया और फिर आँखें बंद करके कुछ देर के लिए लेट गया.

जब उठा तो बाथरूम गया, पैन्टी को वॉशबेसिन पर थोड़ा धोया ताकि मेरा माल छूट के निकल जाए, और फिर लांड्री बास्केट में फ़ेंक दी.
पता नहीं क्यूं अब मुझे डर नहीं रहा था कि आशिमा या मेड को शक हो जाएगा.

रात को सोते हुए मैं सोच रहा था कि अब यह किस्सा जहाँ पहुँच गया है, आशिमा को चोदे बगैर मुझे चैन नहीं आएगा. अब यही सोचना है कि किस तरह से इसे अंजाम दिया जाए कि कुछ ज़बरदस्ती भी ना हो और काम भी बन जाये.

मन में शर्म और ग्लानि थी ही नहीं. बायोलॉजिकली ना तो आशिमा मेरी बहन थी ना मेरे बाप की बेटी. रिश्ते में ज़रूर मेरी बहन थी, मगर मैं कोई इस से ज़बरदस्ती करने वाला तो नहीं था, अगर कुछ होना है उसकी मर्ज़ी से ही होना था, फिर इसमें बुरा क्या!

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