परिवार मे चुदाई – ये कैसा ससुराल

डॉली की नायाब सी चूत
“अरे जरा याद करो, आज दोपहर में जब चाचा जी पीछे से अपना लंड तुम्हारी चूत में पेल रहे थे, तब तुम्हें जरा भी बुरा लगा क्या. तब तो तुम मजे से पापा जी का लंड अपने मुंह में चुभला चुभला के चूस रहीं थीं. एक ही जिन्दगी मिली है. इसे एन्जॉय करें. इसे क्यों बेकार में ऐसे ही जाने दे जमाने के बेकार के नियम मान कर?” दीपक बोला.
“ह्म्म्म…. तो तुम कब से चुदाई के खेल खेल रहे हो?”
“बस मेरी रानी, जब से अठारह का हुआ, तबसे पेलाई कि प्रैक्टिस कर रहा हूँ. ताकि जब भी तुम जैसी कोई मिले उसे जीवन का पूरा मज़ा दे सकूं.”
“और कितने रिश्तेदार शामिल होते हैं इस समारोह में?”
“अब चाचा का तुम्हें पता ही ही है. चाची भी एक नम्बर की चुदाक्कड हैं. मैं जब उनके यहाँ जाता हूँ, मुझे चाचा चाची के रूम में सोना पड़ता है. बाकी के रिश्तेदारों के बारे में धीरे धीरे पता चल जाएगा”
“और गौरव और विजय?”
“जब भी घर में कोई जन्मदिन वगैरह मनाते हैं. हम सब मिल के मम्मी कि चुदाई करते हैं. जिसका जन्मदिन होता है उसे सब से पहले लेने को मिलती है.”
“हे भगवान्…” डॉली अभी भी हैरानी में थी
“कल छुट्टी है, गौरव और विजय को भी तुमसे मिलवा देंगे” दीपक बोला
“नहीं दीपक. इस परिवार ने मुझे इतना चुदाक्कड बना दिया है. गौरव और विजय से तो मैं अब अपने अंदाज़ से मिलूंगी. थोडा मुझे भी नए जवान लड़कों को रिझाने का मज़ा लेने को तो मिले”
“अरे बिलकुल डॉली रानी. उन सालों कि किस्मत खुल जायेगी.”
“हाँ दीपक. बड़ा मज़ा आएगा मुझे मेरे दोनों देवरों को एक साथ चोद के”. डॉली पूरे उत्तेंजना में थी.
“दो दो मर्दों को एक बार चोद लिया आज तो अब दो से कम में काम नहीं चलेगा तुम्हारा लगता
है.”
“नहीं दीपक. एक बात मैं एकदम साफ़ कर दूं. अब मैं किसी से भी चुदूं या कुछ भी करू. पर सच्चा प्यार मैं हमेशा तुमसे ही करूंगी.” डॉली ने बोला.
“डॉली रानी तुम मेरी हो और सदा मेरी रहोगी. ये मेरा वादा है”. दीपक ने उसका हाथ अपने हाथ में ले कर वादा दिया.
“तो क्या तुम लोगों कि बहनें भी?”
“मैंने पहले ही बताया कि मेरा पूरा परिवार एक दुसरे से एकदम खुला हुआ है. जब भी हम में से कोई भी अठारह वर्ष का हुआ, उसे पारिवारिक चुदाई समरोह का टिकट तुरंत दे दिया गया”, दीपक ने बोला.
“धीरे धीरे सब पता चलेगा. अभी इन चीजों का मजा एक एक कर के लो. सब इकट्ठे ले नहीं पाओगी” दीपक ने बोला.
“आप ठीक कहते हो” डॉली ने बोला.
इस परिवार की इस सारी चर्चा पर डॉली कि चूत में एक अजीब सी सरसराहट होने लगी . उसकी चुंचियां टाइट हो कर उठ गयीं. दीपक के लंड में भी जैसे जान आ गयी थी.
दीपक बिस्तर छोड़ कर जमीन पर खड़ा हो गया. डॉली ने देखा उसका लंड एकदम टाइट हो चुका था.
“आ जाओ जानेमन ….इस खड़े लंड का कुछ इंतज़ाम कर दूं….दोपहर की बात याद दिला कर मेरी चूत में भी पानी आ रहा है….” डॉली पुकार उठी.
“ये हुई न बात. पर आज के दिन को थोडा और स्पेशल बनाएंगे डॉली रानी.” कहते हुए दीपक दरवाजे तक गया.
डॉली हैरान थी कि नंगा बदन दीपक कहाँ बाहर की तरफ जा रहा है.
दरवाजा खोल कर अपना चेहरा बाहर निकाल कर बोला,
“आ जाइए”
बस कहने की देर थी कि दो मिनट के अन्दर ही उसकी सासु माँ, उसके ससुर और ससुर के भाई साहब कमरे के अन्दर आ गए.
डॉली को समझ आ गया कि उसकी जिन्दगी में अब चुदाई की तादाद अब जोरों से बढ़ने वाली है. और उसे इस बात से कोई शिकायत नहीं थी. जब उसके पति दीपक की रजामंदी इसमें शामिल है तो उसे क्या ऐतराज़ होगा.
परिवार की इस सारी चर्चा पर डॉली कि चूत में एक अजीब सी सरसराहट होने लगी . उसकी चुंचियां टाइट हो कर उठ गयीं. दीपक के लंड में भी जैसे जान आ गयी थी.
दीपक बिस्तर छोड़ कर जमीन पर खड़ा हो गया. डॉली ने देखा उसका लंड एकदम टाइट हो चुका था.
“आ जाओ जानेमन ….इस खड़े लंड का कुछ इंतज़ाम कर दूं….दोपहर की बात याद दिला कर मेरी चूत में भी पानी आ रहा है….” डॉली पुकार उठी.
“ये हुई न बात. पर आज के दिन को थोडा और स्पेशल बनाएंगे डॉली रानी.” कहते हुए दीपक दरवाजे तक गया.
डॉली हैरान थी कि नंगा बदन दीपक कहाँ बाहर की तरफ जा रहा है.
दरवाजा खोल कर अपना चेहरा बाहर निकाल कर बोला,
“आ जाइए”
बस कहने की देर थी कि दो मिनट के अन्दर ही उसकी सासु माँ, उसके ससुर और ससुर के भाई साहब कमरे के अन्दर आ गए.
डॉली को समझ आ गया कि उसकी जिन्दगी में अब चुदाई की तादाद अब जोरों से बढ़ने वाली है. और उसे इस बात से कोई शिकायत नहीं थी. जब उसके पति दीपक की रजामंदी इसमें शामिल है तो उसे क्या ऐतराज़ होगा.
दो मिनट के अन्दर ही उसकी सासु माँ, उसके ससुर और ससुर के भाई साहब कमरे के अन्दर आ गए. डॉली ने घबरा कर चादर खींच कर अपने नंगे बदन को धक् लिया. पर उन तीन लोगों ने अपने कपडे उतार फेंकने में एक पल भी नहीं लगाया.
“अरे डॉली बेटी हम सब तो दोपहर में तुम्हें पूरा नंगा देख चुके हैं. अब हमसे कैसा पर्दा.” ससुर जी कहा.
“हमारे इस खुले परिवार में तुम्हारा स्वागत है बेटी” सासु माँ ने कहते हुए उसकी चादर खींच कर फ़ेंक दी.
डॉली की खुली दूध के जैसी गोरी चुंचियां छलक रही थीं. उसने अपनी टाँगे कास के बंद कर रखीं थी पर उसकी चूत का ऊपर का हिस्सा साफ़ नज़र आ रहा था. वो अभी भी शर्म से पानी पानी थी.
चाचा जी उसके बगल में बैठ कर उसकी चुंचियां सहलाने लगे. और पापा जी ने अपने हाँथ उसकी टांगों के बीच घुसा कर उसकी चूत खोल थी और और गीली चूत के ऊपर से अपनी उंगलिया फिराने लगे. डॉली को ये सब अच्छा भी लग रहा था और अजीब भी.
इसी बीच डॉली ने देखा कि उसका पति दीपक बिस्तर पर खड़ा है. दीपक कि माँ सुजाता देवी अपने बेटे का खड़ा लंड अपने मुंह में लेकर चुभला रहीं हैं. दीपक के लंड पांच मिनट पहले ही डॉली की चूत का बाजा बजा रहा था. इसका मतलब ये था कि डॉली कि सास अपनी बहु की चूत का रस अपने बेटे के लंड से चाट रहीं थीं.
डॉली इस सबसे बड़ा गरम हो चुकी थी. उसने अपनी टाँगे अब पूरी खोल दीं. और चाचा जी को उनके होठों पर चूमने लगी. दीपक ने अपनी “मासूम” बीवी का ये रूप आज तक देखा नहीं था. वो अपनी माँ के बड़े बड़े मम्मे जोरों से दबाने लगा.
डॉली को बिस्तर पर लिटा दिया गया. पापा जी उसके ऊपर चढ़ गए और आना मोटा लंड उसकी गीली चूत में पेल दिया. चाचा जी ने अपना लंड उसके चेहरे पर लहराया तो डॉली को इशारा समझने में एक पल भी लगा. उसने गपाक से चाचा जी का लंड अपने मुंह में ले लिया और उसके लेमन चूस कि भाँति चूसने लगी.
डॉली ने दीपक के तरफ देखा. दीपक ने अपनी माँ को कुतिया के पोस में लिटाया हुआ था. दीपक एक एक्सपर्ट खिलाड़ी कि तरह धीरे और लम्बे धक्कों से सुजाता देवी कि चूत में लंड पेल रहा था. डॉली और दीपक कि नज़रें मिलीं और दीपक ने उसको आँख मारी और बोला,
“डॉली पापा जी और चाचा जी का आशीर्वाद ठीक से लो”
“बहु कि चूत इतनी टाइट है कि मज़ा आ रहा है कसम से” ससुर जी बोला.
“भैया अगर आपको ऐतराज़ न हो तो मैं थोडा इस टाइट चूत का आनंद ले लूं” चाचा जी ने डॉली के ससुर से पूछा.
“अरे बिलकुल जरूर. डॉली को हमारे घर में सब का प्यार मिलना चाहिए.” कहते ही ससुर जी ने अपना लंड उसकी चूत ने निकाल लिया.
चाचा जी ने डॉली को उठा कर कुतिया के पोस में बिठाया और अपना लम्बा और मोटा लंड उसकी चूत में एक ही झटके में पेल दिया.
डॉली सिहर उठी.
डॉली ने देखा कि ससुर जी बिस्तर पर बैठे है और उनका लंड तना हुआ है. इसी बीच सासु माँ ने दीपक को दीपक को हटा लिया और कुतिया बने बने ससुर के पास आईं और अपने पति का लंड चूसने लगीं. दीपक चल कर डॉली के पास आया और अपनी माँ के रस से सना हुआ लंड उसके मुंह में दाल दिया.
उधर सासु माँ अपने पति के लंड के ऊपर बैठ कर अपनी गांड ऊपर नीचे हिलाने लगीं. चाचा जी डॉली की चूत में बहुत जोर से पेलने लगे. डॉली अभी तक एक बार झड चुकी थी और उसे लगा कि वो एक बार और झड़ने वाली है. उधर सासु माँ चीख चीख कर चुद रहीं थीं. डॉली को दीपक का लंड अपने मुंह में फूलता हुआ महसूस हुआ.
थोड़ी ही देर में पाँचों लोग एक एक कर के झड गए. आज के दिन में डॉली ने तीन लोगों का लंड अपनी चूत में लिया और दो दो लोगों के लंड का रस अपने मुंह में.
डॉली वैसे तो इस परिवार में विबाह कर के लगभग एक साल बाद आयी थी, पर वास्तव में वो परिवार का असली हिस्सा आज बनी.

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