सरसों के खेत में अपनी बुआ की लड़की की चोदा

“बहन!! तेरे तो काफी बडे बड़े हो गये है। किसी से दबवाई तो नही!!” मैं बोला मजाक में

“राहुल!! मेरे संतरे को आज तक सिर्फ तूने ही छुआ है। और किसी ने नही” रुपारानी बोली

उसके बाद मैंने फिर से चूसने लगा। काफी देर तक उसकी boobs sucking करता रहा। अब अपना लंड चूसाने का अरमान था।

“रूपरानी!! मेरा लौड़ा चूस जरा!!” मैंने कहा

रूपा का भी मन था। बैठ गयी और मेरे लौड़े को हाथ में लेकर फेटने लगी। मेरा 7 इंची का लौड़ा खड़ा होने लगा। रूपा हाथ को चलाने लगी। और कुछ देर बाद फिर से मेरी मीनार खड़ी हो गयी। रुपारानी झुक गयी और मेरे लंड के मोटे टोपे में मुंह में लेने लगी। फिर अंदर लेकर चूसने लगी। तो मैं “..उंह उंह उंह हूँ..हूँ.हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई.अई.अई…”करने लगा। अब बुआ की लड़की को भी इंटरेस्ट आने लगा। हाथ से मुठ भी देती थी और चूस भी रही थी। डबल मजा मैं उठा रहा था। रूपारानी काफी देर तक मेरे लौड़े को कुल्फी की तरह चूसती रही। मैं उसके सिर को पकड़कर लंड की तरह दबा दिया और उसके गले तक लौड़ा पंहुचा दिया। फिर उसके मुंह को पकड़कर चोदने लगा। इसमें तो मुझे बड़ा मजा मिला और लगा की आज स्वर्ग दिख गया।

“आओ रूपा मेरे लौड़े की सवारी करो!!” मैंने बोला

रूपारानी मेरे उपर आकर बैठ गयी। उसने ही अपनी चूत में मेरे लंड का सुपारा पर लगा दिया और लंड को घुसाते हुए बैठ गयी। मेरे लंड से किसी कुल्हाड़ी की तरह उसकी भोसड़ी को चीरता हुआ अंदर घुस गया। उसे हल्का दर्द हुआ। उसके बाद रुपारानी आगे को झुक गयी। अब सेक्स होने लगा। बुआ की लड़की झटके देने लगी। उसके आमो को मैं दबाने लगा। कितने सुंदर मुलायम दूध थे दोस्तों। अब रूपारानी ही झटके देती जा रही थी। मैं तो मजे से लेटा हुआ था। मेरे लंड पर उसकी चूत रगड़ खाने लगी तो मजा आने लगा। बड़ा अजीब अहसास था। मित्रो लौंडिया को लिटाकर चोदो तो अलग मजा मिलता है। और लंड पर बिठाकर चोदो तो अलग अहसास होता है।

यह कहानी भी पड़े  मामू से कराई बुर की सफाई

मुझे अच्छी कसावट मिल रही थी। रुपारानी “उ उ उ उ उ..अअअअअ आआआआ.सी सी सी सी…ऊँ-ऊँ.ऊँ..”करने लगी। वो किसी ऊँटनी की तरह मटक मटक कर चुदाने लगी। मैं तो उसके तने दूध को बार बार हाथ लगाकर छेड़ रहा था। मैंने उसकी पतली कमर पर हाथ रख दिया और उसे उपर को उचकाने लगा। उसके बाद तो रुपारानी ने जो ठुमके लगा लगाकर चुदवाया की उसकी चूत से पताके फूटने लगे। चट चट पट पट की आवाज आने लगी। दोस्तों एक बार तो मैं झड ही गया था। इसलिए अब जादा और अच्छी बैटिंग कर रहा था। अब मेरी गोलियों में काम बहुत कम था इसलिए खूब मस्ती भी हो रही थी और झड़ भी नही रहा था।

रूपा उचक उचक कर मेरे लौड़े पर कूद रही थी और सेक्स कर रही थी। वो “आऊ…आऊ..हमममम अहह्ह्ह्हह.करने लगी और जल्दी जल्दी मेरे लौड़े पर कूदने लगी। इस तरह से अच्छा मजा हम दोनों को मिल गया। फिर बुआ की लड़की कुछ देर बाद थक गयी और मेरे सीने पर लेट गयी। मैं फिर से उसके लबो को चूसने लगा। उसकी साँसे काफी तेज थी। मेरा लौड़ा उसकी भोसड़ी में घुसकर गर्म गर्म अहसास पा रहा था। मैंने रूपारानी को अपने सीने पर लिटाये रखा और कुछ देर का रेस्ट किया।

” रूपा डारलिंग!!” अब तुम सीधी बैठो। मैं धक्के देता हूँ” मैं बोला

मेरी बुआ की सेक्सी कामातुर और चुदासी लड़की फिर से मेरे लंड पर बैठ गयी। मैं ऊँगली से जरा सा थूक उसकी भोसड़ी में लगा दिया और चूत के दाने को हिलाने और छेड़ने लगा। रुपारानी अई.अई.अई.करने लगी। मैंने उसकी कमर पकड़ी और अब मैं उपर को धक्के देने लगा। उसके दोनों मस्त मस्त कबूतर हिलने और उचकने लगा पर मैं उसके कबूतर को पकड़ न सका। क्यूंकि उसकी कमर को दोनों तरह से पकड़े था। इस तरह मैंने ठुकाई शुरू कर दी और मेहनत से उसे पेलने लगा। काफी देर तक मैंने इस वाले राउंड में बैटिंग की। फिर जाकर उसकी भोसड़ी में ही झड़ गया।

यह कहानी भी पड़े  दोस्त की बहन घर पर अकेली

दोस्तों मेरी बुआ जी और रुपारानी10 दिन मेरे घर में रुके। इस बीच अनेक बार रुपारानीको चोदने का अवसर प्राप्त हुआ। उसकी गांड भी तेल लगाकर मैंने चोद ली।

Pages: 1 2 3

error: Content is protected !!