ठण्ड का मौसम और दोस्त की सुन्दर बहन

बात दो महीने पहले की है.. मैं अपने कॉलेज के दोस्त से मिलने उसके गाँव गया था।
वहाँ मेरी मुलाक़ात उसकी सेक्सी कजिन स्नेहा से हुई.. स्नेहा बारहवीं में बायोलॉजी की स्टूडेंट है।

स्नेहा एक बहुत ही खूबसूरत परियों जैसी लड़की है। उसका फिगर देख कर अच्छे-अच्छों के लंड से पानी निकल जाए। वो बहुत ही सेक्सी लड़की है..
उसे देख कर मेरा लण्ड खड़ा हो गया।
अगर वो अकेली होती.. तो पता नहीं उसके साथ मैं उस वक़्त क्या करता।

वैसे तो मैंने कभी उसे बुरी नज़र से नहीं देखा.. पर जब मैं.. मेरा दोस्त.. उसकी गर्लफ्रेंड प्रिया और स्नेहा मंदिर घूमने गए.. तब मेरी स्नेहा से अच्छे से बात हुई।

मेरा दोस्त और उसकी गर्ल-फ्रेंड प्रिया दोनों एकांत में मुझे और स्नेहा को छोड़ कर चले गए। वहाँ पर मेरी और स्नेहा की बहुत अच्छी दोस्ती हो गई।

वापिस घर आने पर शाम हो गई ठण्ड का मौसम शुरू हो रहा था.. इसलिए शाम को ठिठुरन लग रही थी।

स्नेहा अपने कमरे में.. और मैं मेरे दोस्त के कमरे में जाकर कपड़े बदलने लगे।

उसी वक़्त बाहर कुछ हल्ला हुआ, जाकर देखा तो पता चला कि दोस्त की नानी की तबियत बहुत खराब है.. तो उसके माँ और पापा चले गए थे।

स्नेहा के मम्मी-पापा उसके भाई से मिलने भोपाल गए हुए थे तो अब घर में 3 लोग ही बचे थे, मैं.. स्नेहा और मेरा दोस्त।

कुछ देर बाद दोस्त की गर्ल-फ्रेंड का फ़ोन आया।
उस वक़्त रात के 9 बज रहे थे हम तीनों खाना खा रहे थे।

दोस्त ने मेरे कान में धीरे से कहा- आज मेरा और मेरी गर्लफ्रेंड का सेक्स करने का प्लान बना है.. तो तू स्नेहा को कोई भी बहाना बता दे.. ताकि मैं रात भर अपनी गर्लफ्रेंड के घर रह कर मजे ले सकूँ।

मैंने कहा- ओके..

दोस्त 10 बजे चला गया।
अब घर में सिर्फ मैं और दोस्त की सेक्सी बहन स्नेहा रह गए।

स्नेहा ने मुझसे कहा- मुझे पता है कि भैया अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने गए हैं।
मैं चौक गया.. फिर बोला- यार उसे मज़े करने दो।

उसके बाद हम टीवी देखने लगे.. अचानक से किसिंग सीन आया.. तो मैंने चैनल बदलने को कहा.. तो स्नेहा ने टीवी बन्द कर दिया।

वो मेरे पास आई और बोली- आप बहुत सीधे हो।
मैंने पूछा- क्यों?

तो कहने लगी- इतना शरीफ हर कोई नहीं होता कि एक सुन्दर लड़की सामने हो ठण्डी का मौसम हो और लड़का चुप रहे।
मैंने कहा- स्नेहा साफ़ कहो.. कहना क्या चाहती हो?
उसने कहा- आई लव यू।

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मैं एकदम सन्न रह गया और उससे कहा- कब से यार?
तो वो बोली- जब आप पिछले साल आए थे.. तब से मैं आपको लाइक करती हूँ.. पर आपसे कभी बात करने का मौका नहीं मिला।

मैंने कहा- ये सही नहीं है।

वो बोली- आज मैं हूँ.. आप हो हमारे बीच दूसरा कोई नहीं आएगा, मुझे प्यार करो अमित.. मैं तुम्हें बहुत प्यार करती हूँ।
ऐसा बोलकर वो मेरे गले लग गई।

मेरी तो जैसे दिल की दुआ कबूल हो गई कि जिस लड़की के नाम की ‘आहें’ भरता था.. वो आज मेरी बाँहों में है।

मैंने स्नेहा को कसकर पकड़ लिया और ‘आई लव यू टू’ कहा।

मैंने स्नेहा को गोद में उठाया और बिस्तर पर ले जाकर किस करने लगा, वो भी मुझे मेरे बालों को पकड़ कर चूमने लगी।
उसने मेरी शर्ट का बटन खोल दिया और मेरे सीने को चूमने लगी।

दस मिनट की चुम्मा-चाटी के बाद मैंने स्नेहा के टॉप को निकालना शुरू किया तो वो और गर्म होने लगी।

टॉप और निक्कर निकाल कर उसके मम्मों को.. जो रसीले आम की तरह थे.. वो चूसने लगा।
वो भी मुँह से आनन्द भरी आवाजें निकालने लगी।

फिर मैं धीरे से उसके लोअर में हाथ डाल कर उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को सहलाने लगा।
उसने कहा- अभी ये सब नहीं..
पर मैं कहाँ मानने वाला…

मैंने अपनी पैंट उतारी और सिर्फ चड्डी में हो गया और स्नेहा की लोअर और चड्डी एक साथ उतार कर फेंक दिया।

अब वो पूरी नंगी मेरे सामने थी।
मैंने उसकी चूत में उंगली डाल दी.. पर उंगली घुस नहीं रही थी.. क्योंकि वो वर्जिन मतलब अनचुदी थी।

मैं उसकी चूत चाटने लगा तो वो उत्तेजित हो कर बोली- आह्ह.. फ़क मी अमित.. और मत तड़पाओ.. अब डाल दो।

फिर मैंने अपनी चड्डी उतारी.. मेरा लम्बा लण्ड देख कर स्नेहा बोली- बाप रे इतना मोटा.. मेरी चूत को फाड़ देगा।
मैंने कहा- मज़ा भी बहुत आएगा।

मैंने उसे सीधा लेटा दिया.. अब उसके ऊपर आ गया और लण्ड को उसकी चूत के मुँह पर रख दिया।
पहले झटके में लण्ड फिसल गया..
फिर एक झटका मारा तो लण्ड आधा घुस गया और स्नेहा जोर से चिल्लाने लगी- माआआ.. निकालो.. मैं मर जाऊँगी प्लीज.. निकालो..
पर मैंने एक और जोर से झटका मार दिया तो मेरा लण्ड उसकी चूत में समा गया।
वो छटपटाने लगी.. पर मैं नहीं रुका।

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उसकी चूत से खून निकलने लगा और वो रोने लगी।

मैं लण्ड को धीरे-धीरे अन्दर-बाहर करने लगा। कुछ देर बाद वो भी जोश में आ गई.. उसका दर्द कम हो गया और वो भी चुदाई के मज़े लेने लगी ‘फ़क मी हार्ड.. फ़क मी’ बोलने लगी।

काफी देर तक इसी पोजीशन में चुदाई की और कुछ देर में स्नेहा झड़ गई।

कुछ मिनट बाद मेरा भी लण्ड अकड़ने लगा। मैं भी उसकी चूत में पूरा झड़ गया.. माल को उसकी चूत में भर दिया।

मैंने अपना लण्ड निकाला.. तो देखा कि मैंने प्यार की मुहर उसकी चूत पर मार दी है। उसके होंठ चूम कर हल्के से काट लिया.. उसके बाल बिखरे थे।

हम दोनों ठण्ड के मौसम में कम्बल के अन्दर नंगे एक-दूसरे से चिपके हुए थे।
रात के 12 बज गए, मेरा लण्ड फिर खड़ा हुआ.. इस बार मैंने उसे घोड़ी बना कर चोदा।

वो भी मुझसे बहुत मज़े ले रही थी, वो बोली- मैं आपके साथ बहुत खुश हूँ।
मैंने भी उसे ‘लव यू’ कहा..

उसने कहा- आपका लण्ड काफी बड़ा है.. पोर्न एक्टर की तरह है।
मैंने भी कहा- तुम भी सनी लियोनी से कम नहीं हो।
वो हँसने लगी।

उसके बाद उस रात मैंने स्नेहा की एक बार और चुदाई की.. उसकी चूत सूज गई थी और फूल गई थी। बिस्तर पर खून ही खून हो गया था।
रात में 3 बजे तक की चुदाई के बाद हम दोनों नंगे ही एक-दूसरे के साथ कम्बल में सो गए।

सुबह 5 बजे दोस्त का फ़ोन आया कि वो शाम को आएगा।
मेरी मुराद और पूरी हो गई।

हम दोनों सुबह 9 बजे सोकर उठे, सुबह में ठण्डी थी.. तो मेरी लण्ड फिर खड़ा हो गया।

फिर मैंने एक बार और स्नेहा को चोदा। स्नेहा के बदन पर मेरे प्यार के बहुत सारे निशान बन गए थे.. उसकी चूत को मैंने 4 बार चोदा था।

उस दिन के बाद आज तक मैंने स्नेहा को 8 बार चोद चुका हूँ.. और वो मेरे लण्ड की पूरी तरह दीवानी हो गई है।

अभी 4 दिन पहले ही मैंने स्नेहा की गांड भी चोदी है। बहुत मज़ा है स्नेहा के साथ सेक्स करने में।

मेरी कहानी कैसी लगी, ज़रूर बताना।

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