सांवली सलोनी लड़की की पहली चुदाई

मैंने पहले ब्लू फिल्म्स में देखा था ऐसा होते हुए, तो मुझे पता था कि अब क्या करना है. पहले मैंने उसकी गुलाबी चूत के जी भर के दर्शन किए क्यूंकि किसी लड़की की चूत भी आज मैंने पहली बार ही देखी थी.

तभी उसने मेरा पूरा लंड अपने मुँह में ले लिया और मेरी सिसकारी निकल गयी. अब वह मेरे लंड पर काबिज थी और मैंने अपनी जीभ से उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया. उसके छोटे छोटे चूचे मेरे पेट पर छू रहे थे और उसकी चूत की खुशबू पूरे कमरे को महका रही थी.

तभी शायद वो तीसरी बार स्खलित हो गई, मेरे लंड ने भी मेरा साथ छोड़ दिया और उसके मुँह में मेरी प्यार की निशानी बह निकली.

वह उठी और मेरे लंड पर थप्पड़ मारते हुए बोली- बस इतना ही दम था इसमें?
मुझे बड़ी शर्म सी महसूस हुई, परन्तु बात सँभालते हुए बोला- इतनी भी क्या जल्दी है … रात अपनी है.

यह कहते हुए मैंने उसको अपनी बांहों में उठाया और कमरे में ले गया. इस दौरान हम फिर से किस करने लगे. बेडरूम में उसको लिटा कर मैं कंडोम लेने बाहर चला गया और जल्द ही वापिस आ गया. वह बिस्तर पर लेटी मेरा इंतज़ार कर रही थी.

मैं उसके बाजू में जा कर लेट गया और उस्ताद के वापिस मस्ती में आने का इंतज़ार करने लगा, लेकिन शायद मुझसे ज़्यादा जल्दी मेरे उस्ताद को थी, जैसे ही मैं उसके पास लेटा, उस्ताद तुरंत वापिस हरकत में आ गया.

बिंदु ने यह देख लिया और फिर से उस्ताद को हाथ में ले लिया और हम फिर से किस करने लगे. मैंने उसे नीचे लिटाया ही था कि उसने कहा- अभी नहीं, मुझे ऊपर आने दो.

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वो मुझे नीचे लिटा कर मेरे ऊपर आ गयी और फिर से मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया. थोड़ी देर बाद मेरे पेट पर किस करते हुए मेरे निप्पलों को चूसते चूसते उसने मेरा लंड अपनी चूत में डाल लिया और अपने कूल्हे हिलाने लगी.
उस वक़्त मुझे एहसास हुआ कि अगर दुनिया में कहीं जन्नत है, तो यहीं है … यहीं है … यहीं है.

वह मेरे ऊपर बैठ कर चुदाई का आनन्द ले रही थी और मैं नीचे लेट कर उसका साथ उसकी चूत में धक्के मार मार के दे रहा था. उसकी सिसकारियां पूरे कमरे में गूँज रही थीं. मुझे डर इस बात का लग रहा था कि कहीं पड़ोसियों तक आवाज़ ना चली जाए.

बस तभी उसने अपने कूल्हे ज़ोर ज़ोर से हिलाये और मेरी छाती पर ढेर हो गयी और ज़ोर ज़ोर से सांस लेने लगी.

उस्ताद अभी भी उसकी चूत के अन्दर ही था. तभी मैंने उसको उठा के बिस्तर पर नीचे लिटा दिया और अपना लंड उसकी चूत के मुहाने पर रख कर एक हल्का सा झटका दिया … ताकि लंड का सिर्फ अग्रिम भाग चूत के अन्दर चला जाए. उसकी एक टांग मेरे कंधे पर थी और दूसरी बिस्तर पर.

जैसे ही लंड चूत के अन्दर घुसा, वह चिल्ला उठी और बोली- बस अब और नहीं.
पर मैं तो भूखा बैठा था और खाना मेरे सामने था. मैंने कोई दया न दिखाते हुए अपने पूरा लंड उसकी चूत में ठोक दिया और उसकी तड़प देखने लगा. जब उसका दर्द थोड़ा शांत हो गया, तो मैंने अपने धक्कों को बढ़ाया और पहले थोड़ी थोड़ी देर में एक एक झटके के साथ स्पीड बढ़ाने लगा.

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अब उसको भी मज़ा आने लगा और उसने अपनी दूसरी टांग मेरे दूसरे कंधे पर रख दी. मेरा लंड पूरी तरह उसकी चूत में जा चुका था और हम दोनों आनन्द के सागर में गोते लगा रहे थे.

तभी मुझे लगा कि मैं स्खलित होने वाला हूँ और मैंने अपना सारा प्यार उसकी चूत में उड़ेल दिया और निढाल हो कर उसके ऊपर गिर गया. वो प्यार से मेरे बालों को सहलाने लगी.

फिर उस रात हमने बिना रोक टोक तीन बार एक दूसरे को प्यार किया और यह सिलसिला उसकी शादी हो जाने तक चलता रहा.

कई बार एबॉर्शन की नौबत भी आयी और वह भी करवाया. उसके पिताजी की ज़िद के चलते हमारी शादी नहीं हो पायी, इस बात का मुझे आज तक मलाल है. इसलिए मैंने अपना और उसका नाम इस कहानी में बदल दिया है.

इसके बाद मेरे कई और लड़कियों औरतों, तवायफों के साथ सम्बन्ध बने, उनकी कहानियां मैं आने वाले संस्करण में बताऊंगा. अभी के लिए विदा.

कहानी का उत्तर आप मेरी ईमेल आईडी पर भेज सकते हैं.

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