सांवली सलोनी लड़की की पहली चुदाई

उसने हामी में सिर हिलाया और हम फ्लैट के अन्दर आ गए. मैंने दरवाज़ा अन्दर से डबल लॉक कर दिया कि कहीं कोई गलती से दूसरी चाबी से खोल न ले.

फिर मैंने उससे पूछा- तुम क्या खाओगी?
उसने बताया और मैंने खाने का आर्डर दे दिया. अब हम दोनों सोफे पे बैठ कर टीवी देखने लगे.

तभी वह बोली- सूट में मुझे आराम नहीं लग रहा है … मैं कपड़े बदल लूँ?
मैंने ओके कह दिया.

तो वह चेंज करने चली गई. जब वह वापिस आयी तो उसने नीले रंग की हॉट सी हाफ पैन्ट और बादामी रंग की बिना आस्तीन की एक टी-शर्ट पहनी हुई थी. वो इस ड्रेस में बड़ी गजब की छमिया लग रही थी.

हम दोनों को ही मूवी देखने का शौक है, इसलिए मैंने टीवी पर एक फिल्म ‘इश्किया’ चला दी. हम दोनों फिल्म देखते हुए खाना आने का इंतज़ार करने लगे. कुछ देर में खाना आया और हमने साथ में बैठ कर खाना खाया. खाने के बाद सोफे पर ही बैठ कर हम दोनों मूवी का मज़ा ले रहे थे.

तभी अरसद वारसी और विद्या बालन का किस सीन आया. जिससे हम दोनों ही असहज हो एक दूसरे की तरफ देखने लगे. मुझे उसकी आंखों में तैरती हुई प्यास का आभास हो चुका था, इसलिए थोड़ा सा उसके पास सरक गया और उसका हाथ पकड़ लिया. शायद वह भी इसी का इंतज़ार कर रही थी और पिघली हुई आइसक्रीम की तरह मेरी बांहों में सिमटती चली गयी.

मैंने उसके गर्म होंठों पर अपने होंठ रख दिए और हमारी मोहब्बत का आगाज़ हो गया. उसके गर्म होंठ ऐसे लग रहे थे मानो जन्मों से किसी सुलगते हुए ज्वालामुखी का ऊपर बारिश हुई हो.

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मैंने अपने हाथ उसकी कमर पर रखा, तो उसके मुँह से एक सिसकारी निकल गयी. जिसने मेरी चूमने की ताक़त को दुगना कर दिया और मैं उसके होंठों पर ऐसे टूट पड़ा, जैसे भूखा भेड़िया अपने शिकार पर टूटता है.

लगभग 10 मिनट तक हम दोनों एक दूसरे के होंठों के रस का स्वाद लेते रहे. फिर ऐसा लगा जैसे वो चरम पर पहुंच के स्खलित को चुकी हो और उसके होंठों की पकड़ मेरे होंठों पर थोड़ी सी कम हो गयी.

तभी मैंने उसकी टी-शर्ट को ऊपर किया, जिसके नीचे उसने ब्रा नहीं पहनी हुई थी और यहां पहली बार मेरा सामना किसी नारी के नग्न ऊपरार्ध से हुआ था.

मेरे सामने उसके दो प्यारे प्यारे मध्यम आकार के चूज़े मेरी तरफ पानी चोंच निकाले देख रहे थे और जैसे मुझसे प्रेम प्रार्थना कर रहे थे. मैंने भी उन्हें प्यार करने में देर नहीं की और एक को अपने हाथों से और दूसरे को अपने मुँह में भर लिया.

बिंदु की सिसकारियां अब और भी तेज़ हो गयी थीं और वह मुझे अपनी चूचियों को प्यार से चूसते हुए देख रही थी. उसके हाथ मेरे बालों में थे और जब वह उनको खींच रही थी, तो मुझे उसके आनन्द का अनुभव हो रहा था.

मेरा लंड मेरी जीन्स फाड़ के बाहर आने को पागल हो गया था. तभी मुझे एहसास हुआ कि शायद उसका दूसरी बार भी स्खलन हो गया, क्योंकि उसकी पकड़ मेरे बालों पर कमज़ोर पड़ रही थी.

अब मेरी बारी थी, मैंने अपनी जीन्स उतारनी शुरू कर दी. उसने मेरी टी-शर्ट ऊपर करके मेरी छाती को चूमना शुरू कर दिया. उसने मेरे निप्पलों को चूसते हुए अपने एक हाथ को मेरे अंडरवियर के अन्दर घुसा दिया, जहां छोटू उस्ताद पूरी मुस्तैदी के साथ उसका स्वागत करने के लिए तैयार खड़ा था.

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शायद उसका भी पहली बार था, इसलिए उस्ताद से संपर्क में आते ही एक पल के लिए उसका हाथ ठिठका … परन्तु अगले की पल उसने उस्ताद को पूरा पकड़ लिया और अपने हाथ से ही उस्ताद की चमड़ी को ऊपर नीचे करने लगी.

मैं अपने कमोबेश अपने चरमोत्कर्ष पर था, परन्तु दोस्तों से सुना था कि अगर एक बार पुरुष स्खलित हो गया, तो दुबारा तैयार होने में बीस मिनट का वक़्त लग जाता है और मेरे पास इतना इंतज़ार करने का वक़्त नहीं था. इसलिए मैंने उसकी पैन्ट उतार दी और उसकी चड्डी भी निकाल दी.

अब वह मेरे सामने पूरी निर्वस्त्र खड़ी थी और मैं भगवान की बनायी इस क़यामत का दीदार और भगवान् का शुक्रिया अदा कर रहा था.

जैसे ही मैंने उसको नीचे लिटाया, वो मुझे धकेल कर मेरे ऊपर आ गयी और बोली- इतनी भी क्या जल्दी है, रात हमारी है.
यह कह कर उसने मेरे लंड पर एक किस कर दिया. मैं तो जैसे सातवें आसमान पर जा बैठा.

तभी उसने मेरे लंड को हाथ में पकड़ा और मेरे टट्टों को चाटना शुरू कर दिया. मेरी आंखों के सामने अँधेरा छाने लगा. अपनी जीभ से मेरे लंड को पूरी तरह चाटने के बाद उसने मेरे लंड के आगे वाले हिस्से को अपने मुँह में ले कर चूसना शुरू कर दिया और घूम कर अपनी चूत को मेरे मुँह के पास ले आयी.

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