प्यासी भाभी को रफ सेक्स की चाहत

मैंने उसके सिराहने पहुँच कर उसके गालों को एक हाथ से दबाते हुए पूछा- रानी कैसा लग रहा है?
सुकन्या ने धीरे से बस एक ही शब्द कहा- अच्छा!
ग्रीन सिग्नल मिलते ही मेरे हाथ उसकी कुछ कड़क कुछ नाज़ुक चूचियों को पकड़कर मसलने लगे, मरोड़ने लगे.
सुकन्या- उउह उउउहा … निचोड़ दो इन्हें… आअह्ह्म्म …

मैं तो वही कर रहा था. फिर एक चूची की घुंडी को पकड़ के ऐंठने लगा और दूसरी पर चमाट मारने लगा ऐसा ही दूसरी चूची को भी चमाट पड़े. सुकन्या तो जैसे मस्त नागिन की तरह हिल डुल
रही रही थी.
फिर मेरा हाथ नीचे सरक कर नाभि के अंदर अठखेलियां करके नीचे कोमल चूत की तरफ बढ़ने लगे. मेरी अंगुलियां हल्की झांटों की चुभन को महसूस करते हुए पावरोटी सी चूत को सहलाने लगी. कुछ सहलाने पुचकारने के बाद अचानक मैंने अपने हाथों की पकड़ को मज़बूत करते हुए सुकन्या रानी की चूत को मुट्ठी में भर के दबा लिया.

रानी चीखती हुई छटपटा पड़ी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह्ह हमम महहआ … आराम से कर न …
लेकिन अब मैं किसी भी रियायत के मूड में नहीं था क्योंकि साफ़ दिख रहा था कि सुकन्या रानी के ये बोल दिखावा भर थे, असलियत में मज़ा तो उन्हें भी आ रहा था.

अब मैंने चूत पर अपनी पकड़ ढीली कर दी और बिना समय गवाएं सुकन्या की नाज़ुक सी चूत पर एक साथ थप्पड़ पर थप्पड़ लगाने लगा. हर एक थप्पड़ पर सुकन्या रानी कसमसाकर अपने हाथ पैर पटके जा रही थी.
थप्पड़ों के बाद मैंने एक अंगुली उसके चूत में हल्के से घुसेड़ दी. सुकन्या उचक सी गयी- ऊह्ह्ह ह्हुउ उआउच.
और मैं धीरे धीरे उंगली को अंदर बाहर करने लगा.
सच में बहुत टाइट चूत थी, पहले एक ही उंगली थी फिर मैंने अपनी तीनो उंगलियों को चूत-सेवा में समर्पित कर दिया.

यह कहानी भी पड़े  जाटणी के यार से अपनी चूत की प्यास बुझवाई

धीरे धीरे वाली शुरुआत अब व्यग्र रूप ले चुकी थी… मैं अपनी तीनों उंगलियों को उसकी कसी हुई चूत में इतनी तेज़ी से अंदर बहार कर रहा था कि मेरी कलाई भर आयी.
कि तभी सुकन्या रानी अपनी गांड उछाल उछाल कर मेरी उंगलियों के ताल से ताल मिलाने लगीं और थोड़ी देर में सुकन्या चीखते हुए आंखें बंद करके चरमानंद का सुख महसूस करने लगी.

सुकन्या की चूत से काम रस बह निकला और उसे चाटने को मेरी जीभ लालायित हो उठी … मैं उसकी चौड़ी हुई टांगों के बीच बैठ गया और अपनी जीभ चूत के मुहाने पर रख कर सड़प सड़प सड़प करके चूत चाटने लगा … चूत की मादक गंध ने मेरे अंग अंग को उत्तेजित कर दिया.

मेरी जिह्वा ने सुकन्या की चूत के साथ ऐसा उत्पात मचाया कि सुकन्या रानी अभद्र भाषा पर आ गयी- अब क्या जान लेगा क्या भोसड़ी के?
सुकन्या की गाली जैसे जाकर मेरे लण्ड को लगी … मेरा लण्ड जीन्स में अब घुटन सा महसूस करने लगा. बिल्कुल भी देरी न करते हुए मैंने जीन्स और शर्ट उतार फेंकी और बिल्कुल नंगा हो गया. सुकन्या की नज़र मेरे लण्ड पर गड़ गयी और मैं जानता था कि आगे करना क्या है. झट से मैंने पोजीशन बदली और मैं घुटनों के बल बैठकर सुकन्या के मुंह के ऊपर पहुँच गया.

सुकन्या ने देर न करते हुए अपने चेहरे को थोड़ा सा उठाकर लण्ड को गप से मुंह में भर लिया. मैं भी ऊपर से मुखचोदन करने लगा.
पूरी मस्ती से मेरे लण्ड को सुकन्या रानी खाये जा रही थी … मैं एकाध बार उसके मुंह पर ही कुछ देर के लिए बैठ जाता था जिसकी वजह से उससे सांस लेना भी दूभर हो जाता था … लेकिन इसी
में तो मज़ा है … उसकी मुंह की गर्मी और इस उत्तेजना भरे माहौल में मेरा लण्ड भी चरम पर पहुँचने लगा … मैंने उसके मुंह में झटके मारने की क्रिया को लगभग दोगुनी कर दी और आँखें बंद करके वीर्य को उसके मुंह में ही छोड़ दिया.
सुकन्या रानी स्वाद ले लेकर वीर्य को चाटने लगी और मेरे लण्ड को पूरा निचोड़ लिया.

यह कहानी भी पड़े  एक कुंवारी एक कुंवारा-1

मैं भी कुछ देर के लिए रिलैक्स होकर उसके ऊपर ही लुढ़क गया.
यहाँ एक बात मैं आप लेडीज को बता दूँ कि ज्यादातर मर्दों का लण्ड पहले डिस्चार्ज के बाद और भयानक हो जाता है मतलब चुदाई में लगने वाले समय में इजाफा हो जाता है.
थोड़ी सी चूमा चाटी के बाद मेरा लण्ड फिर से तैयार था.

मैं नीचे उसकी फैली हुई चूत के सामने घुटनों के बल बैठ गया और अपने लण्ड पर थूक लगाया और चूत को भी थोड़ा सा सहलाया. लण्ड को उसकी चूत पर सेट करके जोरदार झटके के साथ चूत में घुसेड़ दिया. चूत में लोढ़े(मूसल) से मोटे लण्ड का एहसास होते ही सुकन्या रानी चिहुंक सी गयी और चीख पड़ी- आउच ह्ह्हम्म्म …
और मेरा मोटा पिस्टन उसकी नाज़ुक सी टाइट चूत को फाड़ने लगा, फच फच फच बस यही सुर लगने लगे. यही सुर लगाते हुए बड़ी बेदर्दी के साथ मैं उसकी चूत मार रहा था.

Pages: 1 2 3 4

error: Content is protected !!