प्यासी भाभी को रफ सेक्स की चाहत

माहौल थोड़ा गरम होने लगा तो मैं उनसे उनकी फेवरिट पोजीशन पूछी.
सुकन्या- देखो, मैंने ज्यादा ट्राई तो नहीं किया है लेकिन वीडियो देखती हूँ तो उसमें डॉगी स्टाइल पसंद है.
मैं-आप पोर्न भी देखती है?
सुकन्या- नहीं बस कभी कभार ऐसे ही!
मैं- किस तरह के वीडियो ज्यादा पसंद करती हैं?
सुकन्या- मैंने बताया न ज्यादा नहीं देखीं है लेकिन वो वाली जिनमें लड़की के साथ रफ़ तरीके से करते हैं, बाल खींचते हैं, मुंह में जबरदस्ती डालते हैं. मुझे तो उससे देखकर ही झुरझुरी सी आ जाती है.
मैं- मतलब आपको रफ़ सेक्स पसंद है?
सुकन्या- केवल पसंद होने से क्या होता है?
मैं- तो जल्दी समय निकालिये न, प्रैक्टिकल भी हो जायेगा.

सुकन्या ने होटल में जाने से मना कर दिया था कुछ व्यक्तिगत कारणों से, मैंने ज्यादा दबाव नहीं डाला इसलिए जगह का चुनाव थोड़ा मुश्किल हो रहा था.
इसी बीच गर्मियों की छुट्टियां आ गयीं और इनके सास-ससुर अपने पोते यानि कि सुकन्या जी के बेटे को लेकर गाँव चले गए.

हमें भी चुदाई का सुनहरा मौका मिल गया. देर न लगाते हुए अगले ही दिन का प्लान बन गया. सुकन्या जी ने अपना पता वगैरह सेंड करके बता दिया और साथ ही साथ गाड़ी या बाइक लाने के लिए भी मना कर दिया था.

अगली सुबह मैंने ऑटो लिया और उनके घर के सामने पहुँच गया … काल किया तो उन्होंने कहा कि मेन गेट खुला है, उसे बंद करते हुए अंदर आ जाइये!
मैंने उनके आदेश का पालन करते हुए घर में प्रवेश किया तो सुकन्या रानी सज धज के तैयार बैठी थी … और आज तो साड़ी में और भी सेक्सी लग रही थी.

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मैं उनके यौवन के दर्शन करते हुए सामने सोफे पर बैठ गया.
“आप बैठिये, मैं आती हूँ!” कहकर सुकन्या जी अंदर किचन में गयीं.
पानी और नाश्ता वगैरह लेकर दोबारा हाज़िर हुईं.

सब कुछ बहुत ही सामन्य रूप से घटित हो रहा था लेकिन यह केवल तूफ़ान आने के पहले वाली शांति थी. खेल शुरू ही होने वाला था … नाश्ता करते हुए मैंने उनसे पूछा- दोबारा सोच लो, चुदाई के प्लान में कोई बदलाव है या वैसा ही होगा?
मेरा इशारा सुकन्या रानी समझ गयीं और होंठ चबाते हुए बोली- क्यों? नहीं होगा क्या आपसे?

इतना सुनते ही मैं सुकन्या को एकटक देखने लगा और वो उसी तरह होंठ चबाते हुए मुस्कुरा रही थी. इतने में मैं अपनी जगह से उछल पड़ा और जूठे हाथों से ही सुकन्या के गालों को पकड़ कर उसकी आँखों में देखकर बोला- रानी, आज तुम्हारी वो चुदाई होगी जैसा तुम पहले कभी नहीं चुदी होगी.
सुकन्या रानी भी मूड में आकर बोली- बातें बहुत करते हैं आप!

इस बार मेरा एक हाथ सीधे उसके पल्लू पर गए और मैं उसकी स्लीवलेस ब्लाउज को उतारने लगा, उतारने क्या लगा, फाड़ने लगा.
साली ने ब्रा नहीं पहनी थी … मोटी मोटी चूचियाँ उछल पड़ी मेरी आँखों के सामने … मैंने दोनों चूचियों को दोनों हाथों से पकड़ कर मरोड़ दिया, सुकन्या रानी आँखें बंद करके और मुंह खोल के सीसिया उठी- आअह उउउउम्म …

मैंने बैडरूम की तरफ चलने को बोला, बैडरूम में पहुँचते ही सुकन्या रानी की साड़ी उतार कर पूरी नंगी करके बेड पर पटक दिया. मैंने नीचे गिरी साड़ी उठाकर उसके दोनों हाथों और दोनों टांगों को फैलाकर बेड में बाँध दिए.
सुकन्या रानी की दिल की धड़कनें और मचलाहट बढ़ गयी थी. बेधड़क नंगी सुन्दर सुकन्या रानी साड़ी के बंधन से खुद को छुड़ाने का झूठा प्रयास करते हुए बहुत ही गर्म माल लग रही थी … एक एक अंग उभर के नुमाया हो रहा था … ऊपर तो उसके गुलाबी गाल और रसीले होंठ मुझे मानो कह रहे हों कि आओ और मेरे रसों को निचोड़ लो … उसकी बढ़ी हुई साँसों से बेधड़क ऊपर नीचे हिलती हुई छाती जैसे बुलावा दे रही हो कि इन उरोजों को अपने सख्त हाथों में लेकर मसल दो … इसकी घुंडियों को अपने नुकीले दांतों से काट खाओ … नीचे आते हैं तो सपाट पेट पर गहरी नाभि खुद में डूब जाने को कहती है.

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और उसके नीचे सुकन्या की अत्यंत निजी, अति कोमल, परम उत्तेजना पूर्ण, हल्की झांटों से घिरी हुई और पाँव रोटी सी फूली हुई चूत, जिसकी मुहाने से बहकर निकलती हुई प्रीकम का गीलापन मेरी जीभ को आमंत्रित करते हुए कि अपने जीभ से चूत के पोर पोर को चाटकर उद्वेलित कर दो … बाहर और अंदर जितना जीभ घुस सकती हो घुसेड़कर इतना चाट खाओ कि सुकन्या उत्तेजना के बर्दाश्त न सकने की हद पर पहुँच जाए और तुम्हारे मोटे लण्ड को अपनी चूत में डलवाने को गिड़गिड़ाने लगे … और तब उस पर अपने मूसल सरीखे लण्ड से उसकी चूत पर इतना वार करो कि उसकी नस नस में चुदाई का परमानन्द पहुँच जाये और चूत कि हरेक कोशिकाएं चरमरा जाएं!

ख्यालों की दुनिया से बाहर आकर जब मैंने सुकन्या रानी को देखा तो वो उत्तेजना और उत्सुकता के मिले जुले भाव से मेरे अगले करतब के इंतज़ार में थी.

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