फ्रेंड्स मेरी भाभी सेक्स कहानी की अगली किश्त में आपका स्वागत है. लेट’स स्टार्ट-
मैं ऑफीस गया, और लॅपटॉप पर काम में लगा था. पर दिमाग़ में सिर्फ़ सिद्धि घूम रही थी. मैं प्लॅन्स बना रहा था की ऐसे छोड़ डू या ऐसे छोड़ डू, पर कोई फुल प्रूफ प्लान नही मिल रहा था, और दिमाग़ पर चुदस चढ़ रही थी. तो सोचा की चलो जब तक सिद्धि नही मिलती बजाने को, तब तक फोकस रोहिणी भाभी पर किया जाए. वो तो पहले से ही इंप्रेस थी, तो बस उसको बजाना था. ज़्यादा कोई प्लान आउट नही करना था उसके लिए तो.
ऑफीस से आते टाइम 1 वीक के लिए वर्क फ्रॉम होमे का बोल दिया मॅनेजर को. और क्यूंकी ज़्यादा कोई काम था नही, तो मॅनेजर ने भी अप्रूव कर दिया. ऑफीस से लौट-ते टाइम एक कोलीग बोली की उसे फेशियल करना था, तो मैं उसे जान-बूझ कर रोहिणी भाभी के पार्लर ले गया.
उनके पार्लर पर मुझे देख कर वो एक-दूं से शॉक्ड हो गयी, और तोड़ा शर्मा भी रही थी. क्यूंकी उन्हे तो पता ही था की उन्होने अपना प्रपोज़ल भेजा था मेरे पास. और शायद सिद्धि ने मेरा जवाब भी बता दिया होगा. तो मुझे देख कर वो कन्फ्यूज़्ड सी लग रही थी.
उस लड़की ने अपने फेशियल के लिए बोला तो रोहिणी भाभी ने ही अटेंड किया, और उसको चेर पर बिताया और उसे कुछ-कुछ पूछने लगी. पर नज़र बचा-बचा कर मुझे देख रही थी.
मैने ये नोटीस किया तो मैं फुल ओं बेशर्मी पर आ गया, और बस उसे ही घूर्ने लगा सारा टाइम. अब उसे अनीज़ी फील होने लगा. उसने मेरी साइड अपनी बॅक की और फेशियल करने में लग गयी. पर मैं तो घूरते ही रहा उसकी बॅक को, और अपने लिप्स बीते करता. फिर मिरर में देखता की रोहिणी भाभी मुझे उसको देखते देख रही थी, और बहुत ही ज़्यादा अनकंफर्टबल हो रही थी. वो शायद तुर्न ओं भी हो रही थी.
मैं बहुत खुश हो रहा था मॅन ही मॅन की चलो फिलहाल हाथ से काम नही चलना पड़ेगा. एक छूट तो सेट थी अब मेरे लोड के लिए. उसका फेशियल होने में 1 घंटा करीब लगा होगा. तब तक मैं रोहिणी भाभी के जिस्म के एक-एक अंग को घूरता रहा, और उससे डाइरेक्ट आइ कॉंटॅक्ट भी किया. वो मुझे देख रही थी, तो मैं जान-बूझ कर उसके बूब्स देखने लगता था.
पहली बार आज गौर से देखा उसे, तो ये समझ आया की माल तो थी साली कतीली. क्यूंकी शादी-शुदा थी तो हज़्बेंड भी खूब बजाया खाया होगा. इसलिए शरीर एक-दूं भरा-भरा था साली का.
बड़े बूब्स, मोटी गांद, मतलब हेल्ती बॉडी चर्बी थी बॉडी पर. मगर मोटी नही बोल सकते थे, क्यूंकी आचे से मेनटेन कर रखा था खुद को. और क्यूंकी पार्लर चलती थी, तो साज-धज कर रहती थी मेकप आंड ऑल, टिप-टॉप बन कर.
मेरे ट्राउज़र में तंबू बन गया था. पर मैने बाग से, किसी भी चीज़ से च्छुपाया नही. उसे दिखाया खुल कर, की मेरा खड़ा हो रहा था उसे देख कर. लंड भी बाहर आने को झटके मार रहा था बार-बार. बहुत मज़ा आ रहा था उसे अनकंफर्टबल देख कर यार.
फिर हम दोनो वहाँ से निकले, और मैने अपनी कोलीग को उसके घर छ्चोढा, जो उस शॉप से लगभग 2 केयेम की दूरी पर था. उसे वहाँ छ्चोढ़ कर आते टाइम देखा के पार्लर बंद हो चुका था. तो सोचा की चलो रोहिणी को उसके फ्लॅट पर जेया कर मिलता हू, उसका रिक्षन देखता हू.
फिर आयेज का प्लान करता हू क्या करना था. कुछ होगा भी या नही. पर एक बात जो मेरे दिमाग़ में क्लियर थी, वो ये थी की रोहिणी से बात-चीत में टाइम नही गवाना था. छूट के लिए गिड़गिडना नही था. सीधा आक्षन होगा तो ठीक, वरना वो अपने रास्ते, और मैं सिद्धि के रास्ते.
रोहिणी से मुझे ऐसा कोई ख़ास लगाव नही हुआ था, की उसकी छूट के लिए बेचैनी हो. मुझे मिली तो बाजौंगा, नही तो सिद्धि को पाटने में लग जौंगा. चलते-चलते उसके फ्लॅट के सामने पहुँचा और बेल बजाई. उसने दरवाज़ा खोला.
विवेक: ही भाभी जी.
रोहिणी मुझे फ्लॅट के बाहर देख कर फुल शॉक्ड: ही, तुम?! मेरा मतलब आप यहाँ कैसे? क्यूँ? ई मीन अंदर आइए.
मैने सोचा: विवेक, बस ये साली चूड़ेगी तो तू डाइरेक्ट टूट पद. टाइम मत वेस्ट कर.
और ये सोचते-सोचते मैं अंदर की तरफ बढ़ा. रोहिणी भी अंदर की तरफ बढ़ी. मैं एक टक्क उसे देखे जेया रहा था, और वो कभी मुझे कभी नीचे देख रही थी.
रोहिणी: प्लीज़ ऐसे मत देखो विवेक.
मैने उसका गला पकड़ा एक हाथ से, और दूसरे से दरवाज़े में धक्का दिया, जिससे दरवाज़ा बंद हो गया.
रोहिणी: क्या कर रहे हो विवेक?
विवेक: वहीं जो आप चाहती हो. जो आपने बोला था सिद्धि दीदी को मुझे करने के लिए.
रोहिणी: पर मैने, उम्म्म.
और मैने दूसरे हाथ से उसे अपने पास खींचा, और अपने होंठो को उसके होंठो पर रख दिया. वो एक-दूं शॉक्ड, आँखें बड़ी-बड़ी, और हाथ हवा में ही रुके हुए थे. मैं तोड़ा रुका, माहौल समझा, और फिर उसके होंठो को चूसना शुरू किया. पहले तो उसने रेज़िस्ट किया, पर मैने घुमा कर उसे दरवाज़े से सत्ता दिया, और एक दूध पकड़ लिया उसका.
उसको समझ ही नही आ रहा था की क्या करे, क्या कहे. पर कसम से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था भाई उसके होंठ चूसने में. बहुत मीठी सी कोई लिपस्टिक लगी थी, और रसीले होंठ अफ. यार भाभियों में साला कुछ तो बात होती है, जो कक़ची कलियों में नही होती है. भरा-भरा जिस्म उनका इसीलिए लड़कों को अपनी तरफ खींचता है ज़्यादा.
मैने उसके होंठो को चूस्टे-चूस्टे उसके बूब्स दबाने शुरू किए, और धीरे-धीरे उस पर मदहोशी छ्चाने लगी. कुछ ही देर में हम दोनो के बीच जुंग होने लगी की कों किसके होंठ कितने आचे से चूस्टा है? कों किसके मूह में कितनी अंदर तक जीभ घुसा सकता है.
होंठ चूस्टे-चूस्टे मैने उसके ब्लाउस की बटन्स को खोलना शुरू किया, तो वो भी मेरी शर्ट के बटन्स खोलने लगी. मैने उसका ब्लाउस निकाला. फिर उसने मेरी शर्ट निकली. मगर हम दोनो ने ही एक-दूसरे के होंठ नही छ्चोढे.
फिर मैने दोनो हाथ पीछे ले जेया कर उसकी गांद पकड़ी, और एक पैर उठाया. तो उसने वो पैर मेरी कमर पर घुमा लिया. अब मैं उसके होंठो को चूसा. फिर उसकी नेक को, उसकी उपर की चेस्ट को, ऐसे चूस रहा था, जैसे एमरान हाशमी तनुश्री डटा को चूस्टा है स्टेर्स पर.
रोहिणी को फुल मज़े आ रहे थे. वो मेरे बालों में हाथ घुमा घुमा कर पूरा साथ दे रही थी मेरा.
रोहिणी: एम्म उउउंम्म अफ विवेक चूसो, चूसो मुझे. तरस गयी हू मैं किसी मर्द के टच के लिए. बहुत भूखी हू, और बहुत प्यासी हू विवेक
मैं उसकी किसी बात का कोई जवाब नही दे रहा था. बस उसको चूसने में लगा रहा. करीब 10 मिनिट उसे चूस-चूस कर खाया जगह-जगह. फिर मैं उससे डोर हटता. हम दोनो हाँफ रहे थे बहुत तेज़, और हानफते-हानफते मैने उसे देखा.
वो बिल्कुल लाल हो गयी थी, और गोरे-गोरे बदन पर जहाँ-जहाँ मैने बीते किया, उसके निशान सॉफ दिख रहे थे. रेड कलर की ब्रा में उसके बूब्स सिर्फ़ नाम को च्छूपे थे. मैं पास में गया, और बूब्स पकड़े ज़ोर से.
उसने बोला: हाए रे, आअहह.
विवेक: खोल डू?
रोहिणी: बिना बोले इतना कुछ कर दिया. अब इसे खोलने के लिए पूच रहे हो.
विवेक: मैं ब्रा नही छूट खोलने की पूच रहा हू.
रोहिणी: हाए धात! बड़े बेशरम हो यार तुम तो (मेरे कंधे पर अपनी दोनो कोहनी टीका कर). इतना खुल कर तो मेरा पति नही कभी बोला मुझे, जब की उसने तो बहुत बजाई मेरी छूट.
विवेक: और गांद?
रोहिणी: नही वो उसने नही बजा पाया. तब तक वो एक्सपाइर हो गया.
विवेक: ऑश बहनचोड़, मतलब गांद अभी तक नही खुली? मेरे लिए छ्चोढ़ गये भैसाहब?
रोहिणी: नही-नही यार गांद नही दूँगी, बहुत पाईं होता है उसमे सुना है मैने सिद्धि से.
विवेक: सिर्फ़ पाईं का बताया है क्या? उस पाईं के बाद का जो मज़ा है उसके बारे में नही बताया? अछा तो अभी छूट खुद्वाने को तो रेडी हो मतलब?
रोहिणी भाभी को जब रीयलाइज़ हुआ के वो क्या बोल गयी, तो शर्मा कर मूह च्छूपा लिया अपना.
रोहिणी: बहुत ज़्यादा ही बेशर्म हो यार तुम. वैसे मेरे नीचे से नदी बह रही है.
विवेक: नीचे? नीचे कहाँ से?
रोहिणी भाभी समझ गयी की उसे खुल कर बात करनी पड़ेगी वरना, तो मैं उसे च्चेड़ता रहूँगा.
रोहिणी: नीचे मेरी छूट से नदी बह रही है. अब ठीक है?
विवेक: हा अब आएगा ना मज़ा.