पारूल दीदी का भीगा बदन

पहले मैं अपना परिचय दे रहा हूँ : मेरा नाम समीर है, उम्र 28 साल है, कद 5 फ़ीट 9 इंच और मेरा लंड 7 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा है।

दोस्तो, बात तब की है जब मैं 21 साल का था, अपनी छुट्टियों में अपनी मामा के घर गया था। उसी दिन मेरी मामा की लड़की यानि पारूल का फ़ोन अपनी मम्मी के पास आया कि किसी रिश्तेदार की मौत हुई है, आप और पापा मेरे घर आ जाओ, हम लोग मिलकर जायेंगे।

मामा शहर से बाहर गए हुए थे तो मैं ही मामी को लेकर पारूल के घर गया और हम तीनों जाकर वापस आ गए और पारूल दीदी ने मुझे रोक लिया अपने घर पर यह कह कर कि दो चार दिन यहीं रुक जाएगा समीर तो मामी अपने घर चली गईं।

मेरे दीदी का नाम पारूल है, तब वो 25-26 साल की थी, उसके पति आर्मी में हैं, साल में कभी कभार ही घर आते हैं। मेरी दीदी को कोई बच्चा नहीं था उनकी शादी को तब चार साल ही हुए थे लेकिन जीजा जी शादी से पहले ही आर्मी में थे इसलिए दीदी के साथ ज्यादा समय नहीं रह पाए थे।

अगले ही दिन दीदी अपनी किसी सहेली के घर किट्टी में गई हुई थी कि अचानक बारिश शुरू हो गई। मैं टी वी पर मूवी देख रहा था, मूवी में कुछ सीन थोड़़े से सेक्सी थे जिन्हें देख कर मन के ख्याल बदलना लाजमी था। उस समय मेरे मन में बहुत उत्तेजना पैदा हो रही थी। मैं धीरे धीरे अपने लंड को सहलाने लगा।

तभी दरवाज़े की घण्टी बजी, मैंने जाकर दरवाजा खोल दिया। बाहर दीदी खड़ी थी, उनका बदन पूरी तरह पानी से भीगा हुआ था और वो आज बहुत जवान और खूबसूरत लग रही थी। मैंने दरवाजा बंद कर दिया।

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दीदी ने सामान रखा और मुझसे बोली- समीर, मैं पूरी भीग चुकी हूँ, मुझे अंदर से एक तौलिया ला दो, मैं तौलिया ले आया तो दीदी मुस्कुराते हुए बोली- सामान हाथों में लटका कर लाने से मेरे हाथ दर्द करने लग गए हैं इसलिए तुम मेरा एक छोटा सा काम करोगे?

मैंने पूछा- क्या काम है?

दीदी बोली- जरा मेरे बालों से पानी सुखा दोगे?

मैंने कहा- क्यूँ नहीं?

दीदी ज़मीन पे बैठ गईं और मैं सोफे पे बैठ गया । मैंने देखा बालों से पानी निकल कर उनके बूब्स की धारीओं से लेके नाभि तक बह रहा था। मैं दीदी के पीछे बैठ गया, उनको अपने पैरों के बीच में ले लिया और बालों को सुखाने लगा। दीदी का गोरा और भीगा बदन मेरे लंड में खुजली पैदा कर रहा था। बाल सुखाते हुए मैंने धीरे से उनके कंधे पर अपना हाथ रख दिया। दीदी ने कोई आपत्ति नहीं की। धीरे से मैंने उनकी कमर सहलानी शुरू कर दी।

तभी अचानक दीदी कहने लगी- मेरे बाल सूख गए हैं, अब मैं भीतर जा रही हूँ।

वो कमरे में चली गई पर मेरी साँस रुक गई। मैंने सोचा कि शायद दीदी को मेरे इरादे मालूम हो गए। कमरे में जाकर दीदी ने अपने कपड़े बदलने शुरू कर दिए। जल्दी में दीदी ने दरवाजा बंद नहीं किया। मेरी निगाह उनके कमरे पे रुक गई। वो बड़े शीशे के सामने खड़ी थी। मेरे मुँह से तो सिसकारी ही निकल गई, आज से पहले मैंने पारूल दीदी को इतना खूबसूरत नहीं समझा था। वो बिस्तर पर सिर्फ अपनी ब्रा और पैंटी में खड़ी थी।

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दूधिया बदन, सुराहीदार गर्दन, बड़ी बड़ी आँखें, खुले हुए बाल और गोरे गोरे जिस्म पर काली ब्रा जिसमे उनके 36 साइज़ के दो बड़े बड़े उरोज ऐसे लग रहे थे जैसे किसी ने दो सफेद कबूतरों को जबरदस्त कैद कर दिया हो। उनकी चूचियाँ बाहर निकलने के लिए तड़प रही थीं। चूचियों से नीचे उनका सपाट पेट और उसके थोड़ा सा नीचे गहरी नाभि, ऐसा लग रहा था जैसे कोई गहरा कुँआ हो। उनकी कमर 26 से ज्यादा किसी भी कीमत पर नहीं हो सकती। बिल्कुल ऐसी जैसे दोनों पंजों में समा जाये। कमर के नीचे का भाग देखते ही मेरे तो होंठ और गला सूख गया।

उनके चूतड़ों गांड का साइज़ 36″ के लगभग था। बिल्कुल गोल और इतना ख़ूबसूरत कि उन्हें तुंरत जाकर पकड़ लेने का मन हो रहा था। कुल मिलाकर वो पूरी सेक्स की देवी लग रही थीं…

मेरा दिल अब और भी पागल हो रहा था और उस पर भी बारिश का मौसम जैसे बाहर पड़ रही बूंदें मेरे तन बदन में आग लगा रही थी। अचानक दीदी मुड़ी और उन्होंने मुझे देख कर मुस्कुराकर दरवाज़ा बंद कर लिया। मुझे उनकी आँखों में अपने लिए प्यार और वासना साफ़ नजर आ गई थी।

वर्षा ॠतु चल रही थी, जुलाई का महीना था, सुबह धूप थी पर दोपहर होते होते मौसम बहुत ख़राब होने लगा था, बूंदाबांदी शुरू हो गई थी। किसी भी वक्त तेज़ बारिश हो सकती थी, दीदी बोली- समीर मैं कपड़े लेने जा रही हूँ छत से।

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