मेरा पहला प्यार मेरी मौसी

मेरी पहली बार की चुदाई कहानी में पढ़ें कि मैं अपनी अमुसी को पसंद करता था और उनसे सेक्स करना चाहता था. मेरी यह तमन्ना कैसे पूरी हुई?

दोस्तो, कैसे हैं आप?
मैं सेक्सी बॉय अपनी जिंदगी सच्ची और पहली घटना लेकर आपके सामने आया हूँ।
अन्तर्वासना सेक्स कहानियाँ मैं बहुत पहले से पढ़ रहा हूँ.

पहले मैं आपको अपना परिचय दे दूँ क्योंकि वो अति आवश्यक है. क्योंकि अब मैं आपको अपनी रियल की सच्ची कहानियाँ सुनाता रहूंगा जिसे सुनकर आप लोग मुट्ठी मारने पर और लड़कियाँ उंगली डालने के लिए मजबूर हो जाएंगी।

तो दोस्तो, अब आते हैं कहानियों के पात्रों पर!
इस कहानी में जो पात्र हैं, वो कुछ कुछ आगे की कहानियों में भी मिलेंगे।

लेकिन अभी आप इनको जानिए बस!

मेरा नाम सुरेंद्र है। भगवान की दया से बचपन से ही मेरा शरीर सुडौल और लंबा है।
मेरे अलावा मेरे घर में मेरी माँ पापा और तीन भाई रहते हैं। एक भाई मुझसे छोटा और दो भाई मुझसे बड़े हैं।

मेरी माँ की उम्र काफी ज्यादा हो चुकी है।
लेकिन जो मेरी मौसी थी वो मुझे बचपन से ही पसंद थी।

अब मैं अपनी मौसी के बारे में आपको क्या बताऊँ … मेरी सिर्फ एक ही मौसी है. उनकी भी शादी हो चुकी है और तीन बच्चे हैं।
मेरी मौसी का क़ातिलाना फिगर देखकर कोई भी मुठ्ठी मार ले क्योंकि उनके बूब्स बहुत ही बड़े हैं. मौसी की गांड तो ऐसे मटकती है जैसे वो आपके लंड को बुलावा दे रही हो।
उनकी स्माइल तो लाजवाब है।

मैं उन्हें बचपन से ही चोदना चाहता था। लेकिन वो मुझे हमेशा बच्चा समझती रही।

दोस्तो, आपको ज्यादा बोर नहीं करता लेकिन पात्र बताने भी जरूरी थी।
और मेरी मौसी की उम्र तो मैंने आपको बताई नहीं … मेरी मौसी करीब 36 साल की होगी। क्योंकि ये कहानी 2 साल पहले की है जब मैं 19 का हुआ था और मैं वर्जिन था।

तो दोस्तो … हुआ यूं कि हर बार गर्मियों की छुट्टियों में मेरे पापा को छोड़कर सब लोग मेरी नानी के यहां जाते हैं।
लेकिन इन छुट्टियों में सब किसी ना किसी कारण से नानी के यहाँ नहीं जा रहे थे। लेकिन मुझे नाना के गांव जाना बहुत पसंद था।

तो मम्मी ने कहा- बेटे हम लोग तो कोई जा नहीं रहे. तुम्हारी मौसी का फोन आया था कि वो जाएंगी. वो भी अकेली है तो तुम चले जाओ और मौसी को लिए जाओ. नहीं तो बाबू लोग कहेंगे कि इस बार कोई न आया।
हम सब लोग अपने नाना को बाबू कहते हैं।

मैं तो मन ही मन इतना खुशी हुआ कि आप पूछो मत!
मुझे यह जानकर बहुत ज्यादा खुशी हुई कि मौसी मेरे साथ जा रही है और हम दोनों के अलावा कोई नहीं जा रहा है।

दोस्तो, कसम से … मैं फूला नहीं समा रहा था।

फिर मैं मौसी के गांव गया बाइक लेकर!
मेरी मौसी का घर हम लोगों के पास में है लेकिन मामा का बहुत दूर है।

मौसी मुझे देखकर प्रसन्न हुई।
फिर हम लोग चलने लगे तो मौसी बाइक पर एक ही तरफ को पैर करके बैठने लगी.

यह कहानी भी पड़े  पति के दोस्त की दुल्हन बनकर सुहागरात

तो मैंने सोचा ये मौका कैसे गंवा दूँ.
मैंने मौसी से कहा- मौसी, कस के पकड़ लीजियेगा. सफर बहुत लंबा है।

करीब 2 घंटे बाद हम नाना के घर पहुँच गए।

अब मेरे दिमाग में सिर्फ मौसी को चोदने के ख्याल आ रहे थे।

क्योंकि बहट पहले से जब भी वो मेरे सामने आती तो मेरे सामने सिर्फ यही फीलिंग आती थी।
और आज भी आती है।

मेरे नाना के घर में नाना हैं, नानी हैं, मामा – मामी हैं.
और उनके दो बच्चे जो अभी बहुत छोटे हैं।

अपनी मामी का वर्णन मैं अपनी दूसरी कहानी पर बताऊंगा।
अभी इसी कहानी पर आते हैं.

तो मुझे गांव में 3 दिन हो गए. थे मौसी के अंदर कोई ख्याल न था मुझसे चुदने का … लेकिन मैं उनको सोच कर देखकर रोज मुट्ठ मारता था।

लेकिन कहते हैं न … भगवान के घर देर है अंधेर नहीं!

तो वही हुआ … सब लोग नीचे सोते थे और मैं छत पर सोता था।
हुआ यह कि रात को 11 बजे लाइट चली गयी।
आपको पता ही है देहात में लाइट जाती ही रहती है।

तो मेरी मौसी की नींद खुल गयी और वो आधी जगी सी ऊपर छत पर आयी और मेरे साथ मेरी खटिया पर लेट गयी।

भाई … मैं तो हवा में था सिर्फ ये जानकर कि मौसी मेरे साथ लेटी है।
मैंने सोचा ‘सुरेंद्र बेटा … अगर अभी नहीं तो कभी नहीं।

पता है … मौसी के जिस्म से एक अलग ही खूशबू आ रही थी।
उन्होंने गर्मी की वजह से अपनी साड़ी उतार कर एक तरफ रख दी।

वो शायद सोच रही थी कि मैं सो रहा हूँ।

उनकी कमर का खुला हुआ भाग और उनकी नाभि चंद्रमा के श्वेत रंग में यों चमक रही थी जैसे कोई अप्सरा।
मैंने सोचा कि अभी मौसी की चमकदार नाभि का रसपान करूं!
फिर मैंने सोचा कि मेरी जल्दबाजी से कहीं वो खफा ना हो जाएँ … नीचे न चली जाए।

इसीलिए मैंने बिल्कुल जल्दबाजी नहीं दिखाई।
पर मैंने धीरे धीरे उनकी कमर पर हाथ रख दिया।

इतनी मुलायम कमर कि मेरा हाथ खुद उस जगह से उठना नहीं चाहता था।
मौसी मेरी ओर अपनी गांड किये हुए थी।

तो मैं सोने का नाटक करता हुआ अपना हाथ उनकी कमर नाभि पर घुमाने लगा।

वो जग गयी और उन्होंने मुझे नींद में समझ कर अपने बेटे की तरह मेरी तरफ करवट लेकर मेरी पीठ पर हाथ थपथपाने लगी।
मुझे लगा लाइन क्लियर है क्योंकि उस रात मुझे बस उन्हें चोदना था बस!

मैं धीरे धीरे नीचे खिसक गया और अपने मुंह से उनके बलाउज के ऊपर से ही उनके मम्मे पीने लगा. उनका बलाउज मैंने गीला गीला कर दिया।
सिर्फ इतना ही करने पर मेरा लैंड उफान मार रहा था।

पर पता नहीं मौसी ने मुझे रोका क्यों नहीं।

अब मेरी हिम्मत और बढ़ गयी थी मैं मौसी का पेटीकोट ऊपर उठा रहा था.
तभी मौसी जग गयी और बोली- कोई दिक्कत है बेटा?
मैंने भी न में सिर हिलाया।
तो वो बोली- सो जाओ।

अब ये तो पक्का हो गया था कि मौसी जग रही है।
और जब बुब्बू पीने में नहीं रोका तो आज ये पक्का चुदेंगी।

यह कहानी भी पड़े  भाभी ने माँ को चुदवाया

मैंने मौसी का पेटीकोट उपर तक उठा दिया।
मेरी मौसी न ब्रा पहनती है और न पैंटी।
उनकी नंगी चूत मेरी आँखों के सामने थी।
जिसका मुझे कई सालों से इंतजार था।

मैंने अपनी मौसी की चूत में हाथ लगाया तो वो गीली थी।
मैंने सोचा शायद मौसी एक बार झड़ गयी है।

उनकी चूत बिल्कुल गीली थी और वो जग रही थी बस सोने का नाटक कर रही थी।

आज मेरी जन्नत मेरे सामने थी।

मैंने तुरन्त मौसी के बलाउज के बटन खोल दिये मौसी ने अपनी आंखें जोर से भींच ली।
और अब मैं उनके नंगे स्तन का रसपान कर रहा था। जो मेरे लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं था।
फिर मैंने मौसी के होंठो पर अपने होंठ बिना डरे रख दिये।

अब मौसी ने पूरा जोर लगा दिया मेरे होंठ चूसने में!
कसम से इतना मज़ा आ रहा था कि मैं आपको क्या बताऊँ.

मैंने मौसी की मम्मे बहुत जोर जोर से दबाने शुरू किए।
मौसी जोर जोर से आहें भरने लगी.

तभी मैंने उनका ब्लाऊज पूरा अलग कर दिया और उनका पेटीकोट भी उतार दिया।

ये मेरी जिन्दगी की पहली चुदाई थी।

मैंने अपने आप अपने होंठ मौसी की चूत में रख दिये।
मेरी मौसी की चूत की खुशबू मुझे पागल कर रही थी।

मैंने मौसी की तरफ देखा तो मौसी मादक आहें निकाल रही थी।

मौसी की सहमति जानते हुए मैंने मौसी की चूत में अपना 7 इंच लंबा और 3 इंच मोटा लण्ड टिकाया और घिसने लगा.

अब मेरी मौसी से सहन नहीं हो रहा था।
लेकिन अभी तक उनके मुख से ये नहीं निकला था कि ‘मुझे चोदो या दूर रहो.’
बस मैं यही सुनना चाहता था।

मुझे पता था कि अब इस हालत में कोई भी औरत मना नहीं कर सकती है।

तभी मेरी मौसी ने मेरा लंड पकड़ लिया और अपनी चूत में सेट करके बोली- अब चोद दो बेटे! अब मत तड़पाओ।

मैं तो यही सुनना चाहता था।
मैंने जैसे पहला झटका मारा तो मैंने पूरा जोर लगा दिया.

मेरा लंड एक ही बार में अंदर हो गया.
मौसी ने बड़ी मुश्किल से अपनी चीख रोकी और मेरे हाथ पकड़ कर मुझे रुकने को कहा।

मेरी मौसी की आंखों में आंसू थे।
जब मैंने पूछा तो उन्होंने कहा कि ये खुशी के आँसू है बेटा! आज पूरे 1 साल बाद चुद रही हूँ।

वैसे मुझे ये बात जानकर आश्चर्य नहीं हुआ क्योंकि मौसा जी अक्सर बाहर ही रहते हैं।

मैंने अपनी मौसी को उस रात 3 बार अलग अलग तरह से चोदा।
मौसी बहुत खुश थी. वो मुझे गले लगाकर सो गई।

तब के बाद से ये हमारा रोज का काम हो गया था।
अब तो मैं मौसी को उसके गांव जाकर भी चोद आता हूं।

दोस्तो, यह थी मेरी पहली कहानी।
जैसी भी आपको लगे … मुझे मेल कीजियेगा।
और अगर आप मेरी मामी की चुदाई की कहानी पढ़ना चाहते हो तो मुझे ज्यादा से ज्यादा मेल करें।
आपका अपना

Dont Post any No. in Comments Section

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!