पहला हक़ पापा को चुदाई का

अभी तक मैं झड़ नहीं पाया था| तो पापा ने कहा, ” बेटी तू मेरा चूस मैं तुम्हारा चूसता हूँ| फिर हम दोनो ६९ स्थिति में एक दूसरे के हो गये| मैं झड़ गया| पर पापा नहीं झड़े| पापा ने मेरे मुँह से लंड निकाल लिया| अब वो बिस्तर पर लेट गये| मुझे अपने उपर लिटाया और मेरी कमर पकड़ कर मुझे आगे पीछे कर अपने से रगड़ने लगे| थोड़ी देर में उनका वीर्य निकल गया और मेरी साड़ी गीली हो गयी| पापा ने मुझे बाहों में लेकर निढाल हो गये| “सालों बाद स्वर्ग का आनंद मिला है|” हम दोनो एक दूसरे के आगोश में ही सो गये|

अगले दिन से सब नॉर्मल हो गया| पापा ऑफीस जाते, मैं स्कूल जाता| फ़र्क ये था कि मैं अब दिन में मूठ मारने की जगह रात में साड़ी पहन कर पापा के साथ जवानी के मज़े लेता था| अब तो मैं दिन में भी बानयन की जगह ब्रा और चड्डी की जगह पेंटी पहन कर स्कूल जाता था| लेकिन पापा को अभी भी अपनी गाड़ का मज़ा नहीं दे पाया था| हाँ, लंड चूसने में मैं उस्ताद हो गया था| एक दिन तो मामा भी आए थे| उनके सामने भी मैने अपनी कला का प्रदर्शन किया|

उस रात बहुत बारिश हो रही थी| मैं स्कूल से आ कर साड़ी पहन कर पापा के लंड का इंतेज़ार कर रहा था| पापा ने बहुत फोन किया लेकिन मैने नहीं उठाया| मैं उनकी तड़प का मज़ा ले रहा था| थोड़ी देर में दरवाजे की घंटी बाजी| मैने दरवाजा खोला और भौचक्का रह गया| पापा के साथ मेरे मामा थे| मेरा लंड बैठ गया| पापा ने बताया की बारिश बहुत हो रही थी, तो मेरे मामा जो डॉक्टर भी हैं, उनको यहाँ आना पड़ा| मामा पापा से मिलने दूसरे शहर से उनके ऑफीस आए थे| हर जगह जाम है, तो कहीं जा नहीं सकते| अब मैं समझा की पापा क्यों फोन कर रहे थे| पर पापा मुझे देख कर बिल्कुल ही नहीं अचंभित हुए| “ओह, तो तुम्हारे बेटे को साड़ी पहनने का शौक है| अब
मैं समझा की आजकल तुम्हारे चेहरे पर रौनक कहाँ से आई| चलो बेटी, कुछ है खाने के लिए? तुमने तो खाना बनाना भी सीख लिया होगा?” ये सुन कर मेरी और मेरे पापा की जान में जान आई| मैं चाय लेकर आया| उन्होने चाय लेते समय मेरे गाल पर किस किया|
फिर मैने सबके लिए खाना परोसा| अभी तक मैने साड़ी नहीं उतारी थी| मैं कमरे में जा कर कपड़े बदलने वाला था की मामा ने कहा, “खाना खा लो, फिर कपड़े बदल लेना|” फिर सबने खाना खाया| मैं और पापा आजकल एक ही कमरे में सोते थे| मामा को मेरा कमरा सोने के लिए मिल गया| मामा को मैने पाजामा देने गया| मामा ने कहा, “बेटी, हमें तो कुच्छ और ही चाहिए|” मैं उनका इशारा समझ गयी| आख़िर मुझे भी नये लंड की तलाश थी| मैने उनकी चड्डी उतारी और चूसने लगा| देर होते देख पापा कमरे में आ गये| व्यभिचार होते देख कर वो भी नंगे हो गये| मैं मामा का लंड चूस रही थी, पापा मेरी गाड़ में क्रीम लगा रहे थे| इस बार मैने उनके लंड को पूरे का पूरा अंदर ले लिया|
मैं मदहोश हो गयी| मुँह में लंड, गाड़ में लंड और एक हाथ से मैं मूठ मार रही थी| ये काम क्रिया करीब २० मिनिट तक चला| इस बीच मुझे तरह तरह से चोदा गया|

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पहले कुतिया की तरह| पापा ने मेरी गाड़ में लंड डाला, मामा ने मुँह में पहले ही लंड पेल रखा था| थोड़ी देर इस तरह चुदाई के बाद मुझे पलंग पर लिटा दिया गया| अपने दोनो पैर मैने उठा लिए| इस तरह मेरी गाड़ की छेद बड़ी हो गयी| इस बार मामा ने लंड पेल डाला, और पापा ने ख़ालू की जगह ले ली| करीब २० मिनिट की चुदाई के बाद मैं झड़ गया| पापा मामा अभी तक झड़े नहीं थे| पापा ने तो मेरा लंड चूसने का मज़ा ले ही रखा था| अब मामा की बारी थी| दोनो ६९ स्थिति में आ गये| मामा ने तो ऐसे चूसना शुरू किया कि जैसे बरसों का तजुर्बा हो| जब सारे तृप्त हो गये तो मैं और पापा दूसरे रूम में चले गये (और मुझे साड़ी उतरने की ज़रूरत नहीं पड़ी|)

अगली सुबह मामा बोले कि तुमको लड़का नहीं लड़की होना था| पापा बोले “जहाँ के लिए भले ही लड़का है, मेरे लिए तो बिल्कुल मेरी बीवी जैसा है| अपनी मम्मी की तरह पर्फेक्ट|” मामा ने कहा, “अगर चाहो तो इसे बिल्कुल लड़की ही बना दूँ|” पापा ने इसे मज़ाक समझा और हँसी में उड़ा दिया| बाद में सब तय्यार हो कर काम पर चले गये|

२-३ महीने बाद पापा को ऑफीस के काम से शहर से बाहर जाना पड़ा| ३ दिन के बाद शाम को जब मैं वापस आया तो फोन की घंटी बजी| मैने फोन उठाया| दूसरी तरफ मामा थे| मामा ने कहा, “बेटी कैसी हो? तुम्हारे बदन की प्यास अभी तक गयी नहीं| अब तो तुम्हारी खलजान भी फीकी लगे तुम्हारे सामने|” मैने भी पापा की जाने के बाद चुदास बैठा था| मैने कहा, “फिर सोचना कैसा? मैं भी तय्यार हूँ|” मामा ने कहा, “ऐसा करते हैं की किसी होटेल में मिलते हैं| मेरा वहाँ तक आना संभव नहीं है| तुम बस पकड़ कर १ घंटे में चर्च आ जाना|
बाकी इंतेज़ां मैं कर लूँगा|”

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