पड़ोसन आंटी शालु की चूत चुदाई

मेरा नाम संजू है, मैं मोहाली के पास एक गाव मे रहता हूँ. वैसे उसे गाव कहना ठीक न्ही होगा, क्योकि आज की डेट मे मेरा गाव किसी बड़े शहर से कम न्ही है.

हमारे घर के पास ही बहुत बड़ी बड़ी फॅक्टरी लगी हुई है. मेरा घर जहाँ है, वाहा पर बहुत सारे हिमाचल से आए हुए लोग रहते थे. वो बहुत टाइम से वाहा रहते थे.

उन्होने फॅक्टरी मे काम करके अपने अपने घर हमारे घर के पास ले लिए थे. हम सब का मेल जोल काफ़ी अच्छा था. हम सब बड़े प्यार से घुल मिल कर रहते थे.

सच मे काफ़ी खुशी भरा माहोल रहता था हमारे मोहल्ले मे. मैं उन्ही सब के बीच बड़ा हुआ था. मैने जब 18 साल की उम्र मे अपनी 10+2 की स्टडी पूरी करी. तो मैं बिल्कुल फ्री हो गया था, क्योकि कॉलेज का अड्मिशन होने मे अभी 3 महीने लगने थे.

मेरे पड़ोस मे एक आंटी रहती थी. उन्हे मैं बचपन से ही चाची कहता था. वो हिमाचल से आई हुई थी. दिखने मे एक परी जैसी गोरी, मस्त फिगर की मालकिन.

उसका पति फॅक्टरी मे काम करता था, और उसकी दो बेटी थी. जो अभी स्कूल मे पढ़ती थी. जब मैं जवान होना शुरू हुआ, तो चाची मुझे पसंद करने लग गई.

वो मुझे अपने लड़के की तरह प्यार करती थी. हर छोटे काम के लिए, मुझे याद करती थी. वो मेरे साथ अपनी छोटी छोटी खुशियाँ मेरे साथ मनाती थी. वो मेरे बर्तडे पर भी काफ़ी अच्छे गिफ्ट देती थी.

पर जब मैं जवान हुआ तो मुझे उनकी नियत ठीक न्ही लग रही थी. एक तो मैने कभी सेक्स न्ही किया था. एक दो बार क्लास के लड़को ने मुझे फोन पर ब्लू मूवी दिखा दी थी.

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मैं एक ग़रीब और सीधे साधे परिवार से बिलॉंग करता हूँ. इसलिए मैं अपने घर की इज़्ज़त की बहुत केयर करता था. मैं न्ही चाहता था, की मेरी वजह से मेरे मा बाप का सिर शरम से नीचे हो.

इसलिए मैने अभी कोई गर्ल फ्रेंड भी न्ही बनाई थी. क्योकि अक्सर लड़कियो की वजह से बहुत प्राब्लम हो जाती है. खैर मैं फिर से अपनी कहानी पर आता हूँ. मैं आपको अपनी चाची के बारे मे बता देता हूँ.

चाची का नाम शालनी है, पर सब उन्हे प्यार से शालु ही कहते है. उनका रंग गोरा है, बड़े बूब्स और बड़ी गांड उनकी किसी को भी बड़े आराम से पागल कर सकती थी.

एक दिन की बात है, मैं घर पर फ्री ही बैठा था. करीब 12 बजे मुझे आंटी ने अपने घर बुलाया. मैं 10 मिनिट उनके घर गया और बाहर से शालु चाची कह कर आवाज़ मारी.

चाची – संजू ये तुम्हारा ही घर है, अंदर आ जाओ डोर लॉक करके.

चाची की आवाज़ सुन कर मैं अंदर आया और डोर को लॉक करके आगे गया. आगे मैने देखा की चाची सोफे पर पेटिकोट और ब्लाउस मे बैठी. उनका गोरा चिकना पेट मुझे सॉफ सॉफ दिख रा था. मुझे उन्हे देख कर शरम आ रही थी.

मैं आज पहली बार आंटी को इस हालत मे देख रा था. मुझे बहुत डर भी लग रा था. पर चाची मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी.

चाची – संजू तुम यहाँ बैठो मैं ज़रा नहा कर आती हूँ. तुम टीवी देखना फिर मैं भी आकर तुम्हारे साथ टीवी देखूँगी.

ये कह कर चाची उठ कर बाथरूम मे चली गई. मैं बाहर बैठ कर टीवी देख रा था. कुछ ही देर बाद चाची ने मुझे बाथरूम से आवाज़ लगाई, मैं तभी उठ कर बाथरूम के पास गया.

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मुझे लगा शायद उन्हे मुझसे किसी हेल्प की ज़रूरत हो सकती है. मैं उठ कर जैसे ही बाथरूम के पास गया. तो मैने देखा की चाची मेरे सामने पूरी नंगी खड़ी थी. उनको इस हालत मे देख कर, मेरा छोटा सा लंड 7 इंच लंबा हो गया.

चाची की नज़र मेरे लंड पर थी, और मैं उनके गोरे नंगे जिस्म को देख रा था. थोड़ी देर बाद हम दोनो ऐसे ही एक दूसरे को देखते रहे और फिर मैं बोला.

मैं – क्या हुआ चाची ?

चाची – कुछ न्ही, मेरी कमर पर खुज़ली हो रही है. प्लीज़ आओ ना तुम कर दो.

मैं – न्ही चाची, आप इस हालत मे हो.

चाची – अरे तू तो अपने घर का ही है. इसलिए तुझसे कोई दिक्कत न्ही है मुझसे.

मैने काफ़ी मना किया, पर फिर भी चाची मुझे मनाने मे कामयाब हुई. वो मेरे सामने अपनी कमर करके बैठ गई. मैं धीरे धीरे उनकी कमर की मालिश करने लग गया.

एक बार चाची ने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी गांड पर लगा लिया. मैं पहली बार किसी नंगे जिस्म को छू रा था. जेसे ही मैने उनकी गांड को टच किया. तभी मुझे एक जोरदार करेंट सा लगा. मैने जैसे तैसे अपने आप को संभाला और बाहर आ कर दूसरे रूम मे बैठ गया.

पर एक बात थी, चाची की गांड एक दम चिकनी पड़ी थी. फिर थोड़ी देर बाद चाची सिर्फ़ टॉवेल मे मेरे पास आई और मेरे सामने नंगी हो कर, अपनी ब्रा पेंटी डालने लग गई. पेंटी डालने के बाद वो बोली.

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