एक नर्स के साथ चुदाई

फिर तो वो ऊँगली से मेरी गांड मार रही थी और मैं उसका मुहँ चोद रहा था. करीब 20 मिनट इसी तरह चूसने से लंड मे तनाव आ गया और मैंने उसके सिर को कस के पकड़ के ज्यादा से ज्यादा लंड अन्दर घुसेडने लगा.. और फ़िर मेरा पूरा पानी एक बार फ़िर से निशा के मुंह मे डाल दिया.. इस बार उसने बहुत ही चाव से मेरा पानी अपनी जीभ से चाट कर पी लिया.. इस बार हम दोनों खुल गए.. मैंने उससे पूंछा, ‘निशा अब कहो इस बार सेक्स मे मेरा प्यार नज़र आया’?

उसने हाँ मे गर्दन हिला दी. मैंने उसे अपने पास खींचा और किस किया. इसके बाद हमारी चुदाई का दौर चलने लगा. मेरा जब मूड होता मैं उसे फ़ोन करता और वो मेरे केबिन मे या फ़िर किसी खाली रूम मे आ जाती. वहाँ मैं उसकी चूत मे या मुहँ मे लंड डाल कर चोदता. कभी जब वो गरमाई होती थी उसको मैंने कहा की हमेशा हिन्दी मे रिक्वेस्ट करना, जैसे की – डॉक्टर मेरी चूची चुसो, डॉक्टर मुझे चोदो, मुझे चूत मे लंड चाहिए, चूत मे अंगुली चाहिए.

कभी उसका फ़ोन आता की डॉक्टर चूत मे अंगुली चाहिए. फिर तो मैं उसके पास जाता. एक दूसरे से थोडी देर के लिए चिपकने के बाद मैं अंगुली से उसकी खूब चुदाई करता जब तक वो झड़ नहीं जाती. मैं भी कभी कभी उसे अपने रूम मे बुलाता सिर्फ़ लंड चूसने के लिए. कभी कभी वो दीवाल से पीठ सटा कर मुस्कुराती तो मैं सीधे उठ कर उसकी ड्रेस उठाता और अपना लंड चूत मे डाल देता और उस से अपनी गांड को सहलवाते हुए उसे चोद चोद कर झड़ जाता. कभी वो दीवाल के तरफ़ चेहरा करके खड़ी होती तो मैं पीछे से उसक गांड को थपथपा कर लंड उसकी चूत मे डाल कर खूब चुदाई करता.

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एक दिन वो मेरे घर आई और आकर किचेन में चाय बनने चली गई, मैं नंगा हो गया और किचन में जा कर मैंने निशा के कपड़े खोल दिए और उसके बाल भी खोल दिए. उसके लंबे बाल घुटनों तक आ गए और उसकी गांड बाल से ढक गई. बाल के बीच से मैंने लंड उसकी चूत मे डाल दिया और निशा को सहलाने लगा निशा ने चूत मे लंड लिए हुए ही चाय बनाई. फिर मेरे गोद मे बैठ गई चूत मे लंड लिए, और हम लोगों ने साथ चाय पी.

फिर वो बेडरूम में बिस्तर पे लेट गई और मैंने उसके ऊपर चढ़ कर उसकी चूत मे लंड डाल चुदाई शुरू कर दी. उसने मेरी पीठ को सहला कर गांड को सहलाते हुए मेरी गांड मे अंगुली डाल दी. उसकी चूत और मेरी गांड साथ साथ घिस रहे थे. फिर मैं पीठ के बल लेट गया और वो मेरे ऊपर चढ़ गई और चूची मेरे मुहँ मे अंगूर की तरह लटका कर मेरे से अपने निपल चुसवाने लगी. मैं उसकी पीठ और नंगी मोटी गांड सहला रहा था. तभी वो रूठ कर बोली – डॉक्टर, आपको मेरी गांड अच्छी नहीं लगती?

मैं समझ गया की आज निशा की गांड को भी मेरा लंड चाहिए. मैंने अपनी उंगुली जब उसकी गांड मे डालने की कोशिश की तो वो आराम से चली गई. लेकिन गांड एकदम टाईट थी. मैंने उंगुली निकाली और देखी तो मेरा अंदाजा सही था. निशा बिल्कुल आज गांड मरवाने की तैयारी कर के आई थी, उसकी गांड मे जेली भरी थी चिकनाहट के लिए. मैं उठ गया और निशा को कुत्ती (doggy) पोजीशन मे ले कर के अपना लंड उसकी गांड मे लगाया और उसकी गांड को हाथ से सहलाने लगा. वो बोली – डॉक्टर, आज मैं अपनी कुंवारी गांड तुम्हे सौंप रही हूँ.

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‘निशा, मुझे मालूम है कि तुम्हारी गांड कुंवारी है और मेरा लंड भी तैयार है इसे फाड़ने के लिए.’

‘ठीक है, डॉक्टर’ – बोल कर निशा ने गांड को पीछे किया और मैंने भी धक्का लगाया. जैसे ही लंड का सुपाड़ा अन्दर गया निशा की चीख निकल गई … और मेरे लंड को जेली की चिकनाई मिलने से वो फिसलता हुआ अन्दर होने लगा. मैंने उसके चूतड़ कस के पकड़े और पूरा लंड अन्दर डाल दिया. लंड अन्दर करने के बाद मैंने दो अंगुली निशा की चूत मे डाल कर गांड और चूत दोनों की घिसाई करनी शुरू कर दी. दस मिनट तक डबल घिसाई चलती रही. फिर निशा 2-2 मिनट मे झड़ने लगी थी. करीब बीस मिनट के इस खेल के बाद मेरे लंड ने निशा की गांड में पिचकारियां मारना शुरू कर दिया … निशा बहुत जोर से झड गई. इस तरह झड़ने के बाद हम दोनों थक कर नंगे ही सो गए. उठने के बाद मैंने बाथरूम के टब मे निशा की चुदाई की. निशा को अब प्यार मे चुदाई का पूरा मजा आने लगा था. इसके बाद निशा की चूंचियां, चूत और गांड तीनों मेरी अमानत बन गए और मैं इन तीनों का भरपूर मजा लेता रहा.

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