एक नर्स के साथ चुदाई

“मेरा मसाज करोगी निशा?”

“अच्छा डॉक्टर कहाँ करना है मसाज?

“निशा मेरे पीठ पर मसाज करना है. ”

उसने कुछ कहा नही पर उसने मेरे शर्ट के ऊपर से मसाज करने लगी मैंने शर्ट के अन्दर से मसाज करने की रिक्वेस्ट करी तो वो मान गई और शर्ट के अन्दर हाथ डाल कर अपने नरम और गरम हाथ से मेरी पुरी पीठ को गरमा दिया . तभी मैंने अपनी पॅंट खोल कर नीचे कर दिया और अपने गांड पे निशा का हाथ पकड़ कर रख दिया और कहा – ‘प्लीज़ निशा यहाँ भी करो’ .

फिर निशा के नरम हाथ मेरे गांड पे मसाज करने लगे . मैं तो मस्त हो गया और फिर पलट गया और मेरी पीठ उसकी तरफ़ थी और उसके दोनों हाथ के बीच मे मैंने अपना लंड रख कर उसके हाथ को पकड़ कर अपने लंड को सहलाने लगा फिर उसके हाथ से अपने बालों से भरे सीने को और जांघों को भी सहलाया . मजा आ गया . ओह्ह फ़िर मेरे मोबाइल का रिंग..मैंने देखा डीन का फ़ोन है किसी ऑपरेशन के लिए और हम अलग हो गए

एक दिन मैंने उससे कहा – “निशा जब तुम मेरे बदन को छूती हो तो मुझे बहुत अच्छा लगता है तुम्हारे हाथों मे जादू है मैं एक अलग दुनिया मे पहुँच जाता हूँ’.

वो मुस्कुरा दी. मैंने कहा इसके बाद जब तुम अकेली रहोगी तो मुझे फ़ोन से बता देना मैं बिना अंडरवियर और बनियान के आऊंगा.. और वो मुझे मोबाइल पर मिस काल देती थी.इस तरह . फिर जब भी हम चूमा चाटी और चिपका चिपकी करते तो वो मेरे पूरे जिस्म को सहलाती और लंड को भी सहलाती जबकि मैं उसके जिस्म को ड्रेस के ऊपर से ही सहलाता . एक दिन फिर जब हम चिपके हुए थे .. मैं उसके ड्रेस के ऊपर से हाथ फिर रहा था.. मेरा हाथ उसकी गदराई चूतड से होते हुए उसके गांड पर पहुँची.. उसकी गांड पे हात फिरते हुए मुझे महसूस हुआ की अन्दर शायद पैंटी नहीं है . मैंने धीरे धीरे सहलाते हुए कन्फर्म किया तो वो खिलखिला कर बोली – “डॉक्टर आप बहुत गंदे है ”

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मैंने कहा, “You are right” – कहके मैंने ड्रेस को कमर के ऊपर उठा कर निशा की नंगी गांड को हथेली से दबाने लगा और मेरे हाथ उसके ड्रेस के अन्दर पहली बार गए थे.. मैं बहुत ही आराम से य्सकी गांड और पीठ को सहलाता रहा वो इस दौरान मेरे सीने से चिपकी रही और मैं उसकी नंगी गांड को और उसके नंगी पीठ को ड्रेस के अन्दर से सहलाया उसकी आँखे बंद हो गई थी.. मैं उसके होंठो को हलके हलके किस भी कर रहा था उसकी चुन्चियों को हाथ से दबा रहा था..अब मैंने अपना पॅंट घुटने तक नीची कर स्टूल पर बैठ गया और उसकी ड्रेस को कमर से ऊपर उठाये हुए अपने गोदी मे बिठाया . निशा ने पहले ही आंखें बंद कर ली थी . मैंने उसके ड्रेस को ऊपर उठाकर उसके ब्रा का हूक खोल कर चुचियों के दर्शन किए , असल मे उसे ब्रा की ज़रूरत ही नही थी.. मेरा खड़ा ७.५ इंच का मोटा काला लंड मेरी गोदी मे बैठे उसके चूत और गांड से सता हुआ था लेकिन मैंने उस दिन चुदाई ना करने का फैसला किया .

क्युकी मैं उसके साथ कोयी जबरदस्ती नही करना चाहता था. मैंने उसकी दोनों चुचियों को बारी बारी से चूसना शुरू किया उसके निपल बहुत ही कड़े थे.. और मैं होंठो मे ले कर चूस रहा था.. उसके ड्रेस के बटन खुल चुके थे और अन्दर काली ब्रा थी जिसका हूक मैंने पीठ सहलाते हुए खोल दिया था..निशा की आँखें बंद थी और वो मेरा सिर अपने सिने पर दबा रही थी .. उसकी गुदाज़ छाती पर मुझे बहुत मज़ा आ रहा था..मैं निपल को कभी कभी हलके से दांतों से काट लेता तो वो सित्कार उठती थी..सी.इ.इ.इ.इ.इ..आह.. और मुझे दबा लेती थी. मैं उसके स्तनों को दबा रहा था और बीच मे कभी उसे सीने से चिपका कर उसके नंगी पीठ और गांड को सहलाता जिसकी की निशा को आदत हो चुकी थी. उस दिन एक घंटे तक मैंने उसकी चुंची चुसी और गांड और पीठ और जांघों को सहलाया. फिर मैंने पूंछा – “निशा ये प्यार है या सेक्स?”

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“डॉक्टर, यह तो प्यार है ” बोल कर वो फिर चिपक गई.

उसकी पीठ को सहलाते सहलाते मैंने फिर पूंछा – “निशा, एक बात पूछूं?”

“पूंछो डॉक्टर.”

“सेक्स ख़राब है या बिना प्यार के सेक्स ख़राब है.”

“डॉक्टर आप बहुत बदमाश हो.”

यह बोल के उसने अपने दोनों पैर मेरे कमर के दोनों तरफ़ दाल दिए और मेरे सिने से चिपकने लगी मैंने अपने जाँघों पर गीलापन महसूस किया.. उसकी चूत ने अब पानी छोड़ना शुरू कर दिया था.. वो गोदी मे बैठे बैठे अपने कमर को आगे की तरफ़ धक्का देने लगी जिस से मेरा लंड उसके चूत मे लगने लगा वो और आगे की तरफ़ खिसली और लंड के सुपाड़े को अपने चूत के दाने से घिसने लगी मैंने उसे कमर और चूतड से पकड़ के करीब खिंचा तो गीली चूत के मुंह को खोलते हुए मेरे लंड के सुपाड़े ने अन्दर जाने की कोशिश की.. और निशा के मुंह से आह निकली .. डॉक्टर तुम्हारा ये बहुत मोटा है.. कहते हुए वो थोड़ा और करीब आ गई मैंने उसके गांड पर हाथ रखा और उसके होंठो को किस करते हुए लंड को दबाया और सुपाड़ा अन्दर हो गया.

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