नाज़ुक सी कली नाज़नीन

मैंने उसकी आँखों में देखा और फिर एक बार उसके होंठों को चूमा।

उसने भी मेरे होंठों को चूमा।

मैंने फिर उसके होंठों को चूमा, मगर इस बार उसको होंठों को अपने होंठों में ही भर लिया और उसके दोनों होंठों को बारी बारी से चूसा।

सच में आदमी की उम्र जितनी बड़ी होती जाती है, उसको उतनी ही छोटी उम्र की लड़की मजेदार लगती है।
होंठ, गाल चूमते चूसते मैंने उसकी जांघ पर हाथ फेरा, फिर उसके चूतड़ों पर और फिर अपना हाथ उसके टॉप के अन्दर ही डाल दिया और उसकी नंगी पीठ पे हाथ फेरता फेरता उसके ब्रा के हुक तक पहुँचा।और उसके ब्रा का हुक खोल दिया।

मैंने उसे खींच कर अपने ऊपर लेटा लिया और अपने दोनों हाथ उसकी लेग्गिंग में डाल कर उसको दोनों चूतड़ पकड़ लिए।

‘किस मी नाज़नीन…’ मैंने कहा तो उस भोली से लड़की ने अपने दोनों होंठ मेरे होंठों में दे दिए और मैंने अपनी जीभ से उसकी जीभ को
चुभलाना शुरू कर दिया।

मेरा लंड अकड़ा पड़ा था, मैंने उठ कर उसे अपनी गोद में बिठा लिया, उसका टॉप उतारा और ब्रा भी उतार दी।

दो मासूम से स्तन मेरी आँखों के सामने थे।

मैंने उसके स्तन अपने हाथों में उसे पकड़े, बहुत ही चिकने और मुलायम थे, निप्पल के घेरे बन गए थे मगर अभी तक चुचक उभर कर बाहर नहीं आये थे। मैंने अपने हाथों में पकड़ कर उसके दोनों स्तनों को चूसा तो उसने खुद ही मेरे सर को सहलाना शुरू कर दिया।

‘मुझे नंगा करो नाज़नीन!’ मैंने कहा तो उसने मुझे उठाया और खुद भी खड़ी होकर मेरी शर्ट के बटन खोले, शर्ट उतारी, फिर बनियान उतारी, फिर बेल्ट और पेंट भी उतारी।

नीचे चड्डी में मेरा लंड पूरे फुन्कारें मार रहा था।

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मैंने कहा- नीचे बैठो नाज़नीन, मेरी चड्डी उतारो।

उसने वैसा ही किया, तो मैंने अपना लंड उसके होंठों से लगाया, जिसे उसने एक प्रोफेशनल गश्ती की तरह से मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।

मगर सिर्फ चुसवाने से मेरा दिल नहीं भरता था, मैं बेड पे लेट गया और नाज़नीन से कहा- मेरे ऊपर लेट जाओ, मैं तुम्हारी चूत चाटना चाहता हूँ।

वो बोली- अंकल, मैंने धोई नहीं है, पहले धो आऊँ।

मैंने पूछा- क्या पेशाब करने के बाद नहीं धोई थी?

वो बोली- जी…

मैंने कहा- कोई प्रॉब्लम नहीं, मैं वैसे भी चाट सकता हूँ।

मैंने उसे कमर से पकड़ा और अपनी ताकत से घुमा कर अपने ऊपर लेटा लिया।

जब मैंने उसकी चूत में जीभ फेरी तो सबसे पहले उसके पेशाब का ही नमकीन सा स्वाद आया।

चूत चाटनी मुझे बहुत पसंद है और यह तो एक कच्ची कलि सी लड़की की चूत थी, अगर यह पेशाब कभी कर देती तो मैं तो इसका पेशाब भी पी जाता।

मैंने उसकी छोटी सी बाल रहित चूत सारी की सारी अपने मुख में ले ली और पूरे स्वाद ले ले कर उसकी चूत चाटी।
उसकी चूत बिल्कुल सूखी थी, मगर जब मैंने चाटी तो वो भी पानी छोड़ने लगी।

नन्ही सी मुलायम सी चूत के साथ मैं उसकी गांड भी चाट गया।

मैंने अपनी पूरी जीभ उसकी गांड के सुराख पे फिराई और अपने थूक से उसकी गांड को गीला करके अपनी उंगली उसकी गांड में डालनी चाही तो उसने मना कर दिया- नहीं अंकल, ये मत करो!

उसने रोका तो मैं रुक गया।

वो मेरा लंड चूसती रही और मैंने जी भर के उसकी चूत चाटी और उसकी चूत से निकलने वाले पानी को चाटा।

जब चूत चाट के दिल भर गया तो मैंने उसे नीचे लेटने को कहा।

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वो बेड के बीचों बीच लेट गई और उसने अपनी टांगें भी खोल दी।

मैंने एक कंडोम अपने लंड पे चढ़ाया और लंड उसकी चूत पे रखा- पहले कितनी बार सेक्स किया है?
मैंने पूछा और अपना लंड उसकी छोटी सी चूत में घुसा दिया।

चूत गीली थी तो लंड का आगे का लाल टोपा उसकी चूत में घुस गया।

‘ज्यादा नहीं… बस 3-4 बार…’ उसके चेहरे पर दर्द के भाव थे।

‘क्यों करती हो ऐसा?’ मैंने पूछा।

‘बस कुछ घर से खर्चा पूरा नहीं मिलता और कुछ एक बार जो इस दलदल में फँस जाये, वो कहाँ निकल पाता है…!!!’

मुझे उस पर बड़ा तरस आया मगर मैं तो खुद उसे और गहरे धकेल रहा था।

फिर मैंने अपने मन को समझाया कि जो काम करने आया है वो कर, अपना मज़ा ले, यहाँ तो सबकी कोई न कोई कहानी होती है।

मैंने उसे करीब दस मिनट वैसे ही खुद चोदा, मगर दस मिनट में मेरी सांस फूलने लगी थी।

मैंने उसे कहा- क्या तुम ऊपर आओगी?

वो बोली- ओ.के, लगता है आप थक गए हैं।

मैंने हाँ कहा और मुस्कुरा कर नीचे लेट गया।

वो उठी और आकर मेरी कमर पर चढ़ गई और मेरा लंड पकड़ के उसने खुद ही अपनी चूत पर सेट किया।

उसके बाद तो क्या स्पीड दिखाई उस लड़की ने…

मैं तो उसे हल्की सी समझता था मगर वो तो बहुत तगड़ी निकली… पूरे 7-8 मिनट वो मेरे ऊपर लगातार एक ही स्पीड से चुदाई करती रही।

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