मेरे दोस्त की कामसिन गर्लफ्रेंड

मेरा नाम सागर है, आज आपके लिए एक कहानी ले कर आया हूँ. जिसमे मैं ना चाहते हुए भी, अपने खास दोस्त की गर्ल फ्रेंड को चोद दिया. ये सब कुछ मेरे साथ पिछले वीक मे ही हुआ है.

जब से मेरे साथ ये हादसा हुआ है, तब से मैं सोच रा हूँ. क्यो ना ये मस्त किस्सा आप सब के साथ शेयर करूँ. इसलिए मैं आज ये किस्सा एक कहानी के रूप मे लिख रहा हूँ.

मुझे उमीद है, आपको मेरा काम पसंद आएगा. तो चलिए अब देर किस बात की, कहानी शुरू करते है.

मेरा नाम सागर है, और मैं चंडीगड़ से बी.टेक कर रहा हूँ. मेरा घर कॉलेज से बहुत दूर है, इसलिए मैने रेंट पर एक रूम ले रखा है. मेरा रूम कॉलेज से थोड़ी दूर ही है.

कॉलेज मे आते ही मेरा एक दोस्त बना था. जो मुझे क्लास मे पहले दिन ही मिल गया था. उसका नाम मनीष है, वो दिखने मे ठीक ठाक ही है. पर साला पैसे वाला है. पर वो दिल का ठीक है, इसलिए मैने उससे दोस्ती कर ली. कुछ ही दीनो मे हम दोनो काफ़ी अच्छे दोस्त बन गये.

एक दिन मैं और वो कॉलेज मे ही थे. मनीष ने मुझे काहा की उसे मेरा रूम थोड़ी देर के लिए चाहिए. मैं समझ गया, की साले पक्का लड़की को चोदना होगा, मैं फिर बोला.

मैं – हा भाई क्या हुआ, जो तुझे मेरा छोटा सा रूम चाहिए ?

मनीष – भाई मैं एक लड़की से काफ़ी टाइम से बात कर रहा हूँ. आज वो सेक्स के लिए मान गई है.

मैं – अच्छा तो सॉफ बोल ना चुदाई करनी है.

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मनीष – हा भाई.

मैं – चल जा बे साले मेरा रूम मेरा घर है, कोई रंडी खाना न्ही है समझा.

मनीष – भाई प्लीज़ दे दे ना. थोड़ी देर के लिए चाहिए प्लीज़.

उसकी शकल देख कर सॉफ लग रा था, की वो पहली बार सेक्स करने वाला है. इसलिए वो थोड़ा पागल सा लग रहा था. वो सेक्स करने के लिए बहुत उतावला हो रा था. मैं उसकी हालत को समझ गया और बोला.

मैं – चल ठीक है, पर किस टाइम आएगा.

मनीष – थॅंक यू भाई, थॅंक यू सो मच.

मैं – ओ चुतिये, मैं पूछ रहा हूँ. कब आएगा ?

मनीष – आज रात 8 या 9 बजे आउँगा, और फिर 1 या 2 घंटे के बाद वाहा से निकल लूँगा.

मैं – ठीक है, आज रात आ जा टाइम से. और पहले फोन कर देना.

मनीष – ठीक है भाई.

मेरी हा सुन कर वो उछल रहा था. उसके पैर ज़मीन पर न्ही लग रहे थे. मैं समझ सकता था, जब कोई लड़का पहली बार सेक्स करता है, तो उसकी क्या हालत होती है. उसने अपनी गर्ल फ्रेंड को बता दिया, की उसने रूम का इंतज़ाम कर लिया है.

रात को 8:30 पर मुझे मनीष का फोन आया की वो 30 मिनिट मे आ रहा है. मैने अपना रूम अच्छे से सेट कर दिया. वो रात के 9 बजे मेरे रूम मे आया. जब मैने उसकी गर्ल फ्रेंड देखी, तो मैं उसे देखता ही रह गया.

मनीष ने मुझे उससे मिलवाया, उसका नाम दीक्षा था. मैं अपने मन मे सोच रा था, की इस चूतीए को ये कहाँ से मिल गई. दीक्षा देखने मे परी जैसी थी. उसका रंग गोरा, बड़े बूब्स, और पतली कमर के नीचे नॉर्मल गांड.

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नॉर्मल गांड से मेरा मतलब ये है, की उसकी गांड ना तो ज़्यादा मोटी थी. और ना ही ज़्यादा पतली थी. सही कहूँ तो दीक्षा एक परफ़ेक्ट लड़की थी, जिसके साथ हर कवारा लड़का सेक्स करना चाहेगा. दीक्षा को देख कर तो मेरी भी नियत खराब हो गई थी.

मेरा लंड भी उसको चोदने के लिए खड़ा होने लग गया. मैने उन दोनो अपने रूम मे बिठाया और उन दोनो को कोल्ड ड्रिंक देकर वाहा से निकल गया. मैने उन दोनो अकेला छोड़ दिया, ताकि वो दोनो जिस काम के लिए आए है. वो काम वो आराम से करें.

मैं बाहर पार्क मे घूमने और बाहर कुछ खाने पीने चला गया. मैं बाहर तो आ गया था. पर मेरी आँखो के सामने से दीक्षा न्ही जा रही थी. उसने वाइट कलर का टॉप डाला हुआ था. जिसमे से उसके 34 के बूब्स बाहर आने को तड़प रहे थे.

नीचे उसने एक ब्लॅक कलर की स्कर्ट डाली हुई थी. उसकी चिकनी टाँगे मुझे बार बार याद आ रही थी. मैं 30 मिनिट बाद ही वापिस लौट आया, मैने देखा की मनीष बाहर अपनी कार पर खड़ा है, मैं उसे देख कर हैरान हो गया. मैं उसके पास गया और बोला.

मैं – हा भाई क्या हुआ, तू नीचे क्या कर रा है ?

मनीष – भाई मेरे घर से फोन आया है, पापा की तबीयत ठीक न्ही है. मैं अभी पापा को मेडिसिन दे कर आता हूँ. तब तक तू प्लीज़ दीक्षा के पास बैठ मैं आता हूँ.

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