मेरा सपना और – भाभी की तन्हाई

फिर मैं उसे बाहर ले गया और चॉकलेट दिलाई और वापस आते आते वो सोने लगा।

मैं घर आकर भाभी से बोला- यह सो गया है !

तो भाभी बोली- इसे धीरे मेरे बगल में लिटा दो !

जैसे ही मैं उसे उनकी बगल में लिटा रहा था तो मेरा हाथ उनके एक चूची से छू गया और भाभी कुछ सकपका गई पर कुछ नहीं बोली। उसके बाद मैं भी उन्हीं के कमरे में टीवी देखने लगा और बातें भी करने लगा !

रात के साढ़े ग्यारह बज चुके थे, अब भाभी को नींद आ रही थी पर मैं उनसे पहले सोने का नाटक कर रहा था ! थोड़ी देर बाद भाभी को लगा कि मैं सो गया हूँ तो उन्होंने टीवी बंद कर दिया, रोशनी भी बंद कर दी और बिस्तर पर आकर लेट गई !

करीब आधे घंटे के बाद मैं बाथरूम जाने के बहाने उठा और बिना रोशनी किए बाहर चला गया और अँधेरे में ही वापस आ गया। फिर मैं बेड पर अँधेरे में ही चढ़ने की कोशिश कर रहा था कि तभी मेरा एक हाथ भाभी की चूची पर जा लगा पर उनकी कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। फिर मैं धीरे से जाकर उनके बगल में लेट गया और एक हाथ उनकी पहाड़ जैसे चूची पर रख दिया और दबाने लगा !

शायद भाभी जाग रही थी पर बिल्कुल भी मना नहीं किया तो मेरा हौंसला और बढ़ गया और मैंने अपना हाथ उनके ब्रा के अन्दर डाल दिया और कस के दबाने लगा।

इतने में भाभी बोली- क्या कर रहे हो?

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मुझे कुछ समझ नहीं आया और मैं कुछ नहीं बोला और चूचियों को मसलता रहा।

इसके बाद भाभी को मज़ा आने लगा था और वो खुद ही मेरे से चिपकने लगी ! फिर मैंने अपना दूसरा हाथ उनकी चूत पर रख दिया और उंगली करने लगा भाभी को और मज़ा आने लगा और वो उफ़ उफ़ उफ़ ……….की आवाज करने लगी !

भाभी ने भी मेरा लंड पैंट के अंदर से पकड़ लिया और लंड रॉकेट की तरह उड़ने को तैयार था ! फिर धीरे से मैंने भाभी के ब्रा का हुक खोल दिया और दोनों चूचियां कंडोम की गुब्बारे की तरह हवा में आजाद हो चुकी थी ! मैंने चूचियों को चूसना शुरू कर दिया।

भाभी पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी और उनकी सांसें तेज थी, बोल रही थी- और तेज डार्लिंग और तेज़ ! और जोर जोर से मेरे लंड को चूस रही थी !

भाभी के जिस्म को देखकर लग रहा था कि भाभी को कई दिनों से लंड नसीब नहीं हुआ है।

मेरा सात इंच का लम्बा लंड अन्दर लेने के लिए भाभी तड़प रही थी और बेड पर नागिन की तरह कमर और चूत हिला रही थी !

मैं उनकी चूचियों को सहला रहा था जिससे उनकी साँसें और तेज हो रही थी ! अब हम दोनों नंगे हो चुके और दूसरे से लिपट रहे थे। भाभी की चूत बिलकुल साफ़ और नए गद्दे की तरह उभार ले रही थी !

अब मेरा सपना पूरा हो रहा था !

मैंने भाभी की एक टांग अपने कंधे पर रखी और धीरे से लंड को अन्दर घुसाने की कोशिश की पर चूत थोड़ी कसी थी इसलिए आसानी से नहीं घुस रहा था। मैंने सोचा थोड़ी वैसलीन लगा लूँ, फिर सोचा-

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नहीं ! कुछ भी हो, आज बिना वैसलीन के ही चोदूँगा !

मैंने ज्यादा जोर लगाया और लंड तीन इंच अन्दर जा घुसा।

भाभी चीख उठी, बोली- निकालो बाहर ! मैं मर जाउंगी !

फिर मैंने तीन मिनट तक अपने को रोके रखा और चूचियों और होंठों से खेलता रहा। भाभी को और ज्यादा मज़ा आ रहा था। धीरे धीरे नीचे का दर्द भी कम हो गया, फिर मैंने दूसरा जोर का धक्का मारा और लंड पूरी तरह प्लग के जैसे फिट हो गया। अब मैं धीरे धीरे लंडदेव को आगे-पीछे कर रहा था, भाभी भी मेरा पूरा साथ दे रही थी, अपनी कमर ऊपर-नीचे कर रही थी और कह रही थी- तेजी से

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