वो पहली बार, मौसी की चूत का स्वाद

फिर तो उन्होंने और आग लगा दी, मेरे लंड को पैंट के ऊपर से ही दबाने लगी। अब मैं अपने वश में ना रहा; मन कर रहा था उनको वहीं पटक कर चोद दूँ। बस फिर सोच लिया जब कुआँ खुद प्यासे के पास आ रहा है तो क्यों रुकना … अब तो आग दोनों तरफ लग चुकी थी।

बस जैसे तैसे हमने शॉपिंग की और वापस आ गए। अब मेरे मन से भी डर ख़त्म हो चुका था और हम आपस में खुल चुके थे। फिर जब भी मौका मिलता, हम चूमाचाटी करने लगते। छोटी मौसी बहुत गरम हो जाती थी। मैं उनके चुचे दबा देता और चूत को कपड़ों के ऊपर से ही सहला देता था, वो भी मेरा लंड मुट्ठी में भर लेती थी। इसी तरह हम मजे कर रहे थे। अब आग बढ़ती जा रही थी; हमें सही मौके की तलाश थी।

और 1 दिन मौका हमारे हाथ लगा। मेरी मौसी अपनी सहेली के घर पड़ोस में चली गई और मौसा सो रहे थे। कविता के पति की हमें कोई चिंता नहीं थी क्योंकि वे हमेशा पी के रात को ही आते थे और आते ही सो जाते थे।
और अभी तो दोपहर ही हुई थी, गेट बंद थे तो अचानक कोई नहीं आ सकता था।

मैं लेटा हुआ था आँखे बंद करके, हल्की सी नींद आ गयी थी और कविता मौसी नहाने गयी हुई थी। कुछ देर बाद गीले बाल मेरे चेहरे पर महसूस हुए।
उफ्फ…
शैम्पू की मस्‍त खुशबू आ रही थी।

मैंने आँखें खोली तो देखा कि मौसी नहा कर आ गयी थी और गुलाबी सूट सलवार में थी। गोरा बदन और उस पर गुलाबी रंग … बिल्कुल कयामत लग रही थी। उनकी यह हरकत मेरे जिगर में आग लगा गयी। मेरे लंड का तो बुरा हाल हो गया था। मौसी आइने के सामने चली गयी और बालों में कंघी करने लगी।

मैं उनके पास चला गया और उनको पीछे से पकड़ लिया। मौसी के जिस्म की खुशबू मेरी सांसों में समाने लगी। मेरा लिंग उनके बदन की गर्मी से खड़ा होने लगा और उनकी गांड की दरार में टक्कर मारने लगा।
मैं उनके बाल हटाकर उनके कंधे और कमर को चूमने लगा। मुआआआ … आआआह … और मेरे हाथ उनके पेट पर घूमने लगे। वो भी गर्म होने लगी थी।

यह कहानी भी पड़े  नादान बेटे के साथ अपनी कामुकता शांत की

मैंने उनके कंधे को चूमा, फिर उनके कान को दाँत से हल्का सा खींचा उसको चूमा और कान में जीभ डाल के घुमाने लगा। साथ में एक हाथ से चुचे दबाने लगा और दूसरे हाथ से सलवार के ऊपर से चूत को सहलाने लगा, तो महसूस हुआ कि उन्होंने पैंटी नहीं पहनी हुई थी।

अब मेरे होंठ उनकी गर्दन पर चुंबन करने लगे, उनकी साँसें तेज होने लगी, चुचे ऊपर नीचे हो रहे थे। नीचे मेरा लंड उनकी गांड में घुसने की तैयारी में था।
मैंने उनको पलटा तो देखा उन्होंने लिपस्टिक लगाई हुई थी।

मैंने पहले उनके होठों पर जीभ फिराई, फिर होठों को अपने होठों में ले के चूसने लगा और उनके कूल्हे को जोर से दबाने लगा।
उन्होंने अपने हाथ मेरी गर्दन के पीछे लपेट लिए और पूरा साथ देने लगी। फिर मैंने एक हाथ उनकी चूत पे लगा के चूत को मसला तो वे फुदकने लगी।

फिर मैंने मौसी को बेड पे लिटा दिया और उनकी खूबसूरती को निहारने लगा। मैंने उनकी चप्पल उतारी और उनके पैरों को चूमने लगा; पैर के तलवे को अपने गाल पर फिराने लगा। वो बस मुझे प्यार से देखे जा रही थी।
फिर मैं तलवे को चूमने और चाटने लगा।

कविता बोली- बाबू, ये क्या कर रहा है, गुदगुदी हो रही है।
मैंने कहा- आप बस मजा लो। मैं आपके इस खूबसूरत शरीर का आधा इंच भी बिना प्यार किए नहीं छोड़ने वाला आज!
वो चुपचाप मजा लेने लगी।

फिर मैं उनके पैर के अंगूठे को मुँह में ले के मजे से चूसने लगा; मुझे बहुत मजा आ रहा था। ऐसे ही सारी अंगुलियों को भी चूसा; बहुत ही मुलायम उंगलियां थी उनकी। उनके पैर भी एकदम गोरे चिट्टे थे। उनको चूमने चाटने का यह अनुभव मेरे अंदर रोमांच भर रहा था।
उनको बहुत गुदगुदी हो रही थी, वो भी पूरा मजा ले रही थी और आज बहुत प्यार से मुझे देख रही थी।

यह कहानी भी पड़े  अंकल ने कमसिन माँ की चुदाई की

फिर मैं धीरे धीरे हौले हौले ऊपर की तरफ बढ़ने लगा। मैं उनकी सलवार को ऊपर करने लगा पिंडलियों पर से और पिंडलियों को चूमने चाटने लगा। उनके पैर किसी जवान लड़की की तरह मुलायम थे।
मुझे जीवन में पहली बार किसी को प्यार करने का मौका मिला था, मैं इस पल को यादगार बनाना चाहता था इसीलिए जी भर के चूम रहा था, चाट रहा था। मौसी का गोरा मादक जिस्म मेरे मन में रोमांच भर रहा था और लंड में तूफान मचा हुआ था।

उस दिन पहली बार सेक्स वीडियो को देखने और अंतरवासना पर कहानियां पढ़ने का फायदा लग रहा था। विडियो और कहानियाँ में जो भी पढ़ा और देखा था, आज वो सब आजमाना चाहता था।
वो सब याद करके अभी भी मेरा लंड खड़ा हो गया है।
सच में, सेक्स से भी ज्यादा मजा या यूं कहें असली आनंद फ़ोरप्ले में ही है। इससे आप सेक्स करने के मजे को कई गुना बढ़ा देते हैं और लड़कियों के लिए तो ये वरदान है क्योंकि इससे लड़कियां योनि में लिंग के प्रवेश कराने से पहले ही झड़ जाती हैं और उनका कामरस योनि के अंदर प्राकृतिक लुबरिकेंट का काम करता है जिससे उनको योनि के अंदर लिंग जाने के बाद दर्द कम महसूस होता है और वे सेक्स का भरपूर आनंद ले पाती हैं और पूरी तरह से संतुष्ट हो पाती हैं।

Pages: 1 2 3

error: Content is protected !!