मौसम की करवट

यह कहानी एकदम सच्ची है और मेरी अपनी है जो मेरे साथ तब घटी जब मेरा लंड जवान हो रहा था। यह कहानी मेरे प्यार की कहानी है, उम्मीद करता हूँ कि आपको पसंद आएगी… आप अपनी राय मुझे मेल करके जरूर बताईयेगा…

अन्य लड़कों की तरह मैं भी अपने लंड को लेके काफी आकर्षित था, लंड का बार बार बड़ा होना, फिर उसका चिपचिपा होना मुझे बहुत पसंद आने लगा था इसलिए मैं अपना लंड हाथ में लेकर मजे लेता था।

ऐसे ही एक दिन मैं अपने बिस्तर पर लेटा अपने लंड को सहला रहा था, तब मुझे लगा कि कोई मुझे देख रहा है। लेकिन देखता कौन? घर में तो कोई नहीं था, सब लोग बाहर गए थे…

मुझे थोड़ा डर लगने लगा…मैंने अपने कपड़े ठीक किये और देखने के लिए उठा तो वहाँ कोई नहीं था…

हमारा घर काफी बड़ा है इसलिए मुझे खोजने में वक्त लग रहा था। जब मैं पीछे गार्डन की ओर गया तो मुझे घर की घण्टी बजने की आवाज आई। मैं देखने गया तो वहाँ प्रिया खड़ी थी।

प्रिया मेरी रिश्तेदार, एक सुन्दर अप्सरा, उम्र 18 साल, गोरी, लंबी, कद 5’9″ स्तन ३४” और सबसे ज्यादा प्यारी उसकी कमर 24″ चूतड़ 34″ के… कुल मिला कर एकदम सुन्दर लड़की, नैन नक्श भी कातिलाना हैं।

जब मैंने उसको देखा तो मैं थोड़ा डर गया कि कहीं प्रिया ने तो नहीं देखा था मुझे?

वो मुझे देखकर थोड़ा शरमाई और घर के अंदर चली गई। मैं भी उसके पीछे पीछे चला गया। वो हॉल में सोफ़े पर बैठ गई। मैं थोड़ा डरा हुआ था।

तब उसने बात चालू की, उसने पूछा- सब लोग कहाँ हैं?

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मैं- सब बाहर गए हैं…पड़ोस में शादी है।

“आप क्यों नहीं गए?”

मैं- यार, मुझे शादियों में जाना पसंद नहीं है, तुम्हें पता है ना…

“तो यहाँ पर क्या कर रहे थे?”

तब मुझे पता चल गया कि बेटा, तुझे इसने देख लिया है… मैंने सोचा कि अब तो तू गया…

मैं- मैं क्या?…कुछ भी तो नहीं…तुमने कुछ देखा क्या?

“हाँ…बहुत कुछ…!”

असल बात यह है कि प्रिया और मेरी शादी बचपन में ही तय हो गई थी और हम दोनों एक दूसरे को मन ही मन पसंद भी करते थे। लेकिन इस बारे में कभी बात कभी नहीं की थी।

मुझे डर लग रहा था कि वो क्या सोचेगी मेरे बारे में?

तब मैं बोला- प्लीज तुम बुरा मत मानो लेकिन मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था, इसलिए…सॉरी…

वो बोली- अरे नहीं, मैं नाराज नहीं हूँ कि तुम ऐसा कर रहे थे…बस थोड़ा बुरा लग रहा है।

मैं बोला- बुरा क्यों लग रहा है?

तब उसने बोला- मुझसे तुम्हारी यह तड़प देखी नहीं जा रही… मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ…कोई अपने प्यार को तड़पता देख सकता है क्या?

मेरा मुँह खुला का खुला रह गया…वो आकर मेरी गोद में बैठ गई और अपनी बाहों को एक हार की तरह मेरे गले में डाल दिया। मैंने भी उसको अपनी बाहों में लिया और हमारी प्रेम कहानी शुरू हो गई…

उसने अपने नर्म गुलाबी होंठ मेरे होंठों पर रख दिए, हम दोनों हमारे पहले चुम्बन का लुत्फ़ उठा रहे थे, मैं तो जैसे जन्नत मैं था। वो भी बहुत उत्तेजित लग रही थी… वो पूरे मजे लेकर मुझे चूम रही थी… लेकिन यह मजा हम ज्यादा देर नहीं उठा पाए… घर के सभी लोग वापिस आ गये थे और हम प्यासे रह गए…

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वो मेरी मम्मी की लाडली है, उसको देख कर मम्मी खुश हो गई…

रात होने वाली थी तो मम्मी ने उसको घर पर ही रोक लिया। हम दोनों तो जैसे खुशी से पागल हो गये… हमने साथ में खाना खाया और सोने के लिए मैं अपने कमरे में जा रहा था तभी मुझे मम्मी ने आवाज लगाई और कहा- आज प्रिया को तेरे कमरे में सोने दे और तू हॉल में सो जा…

तब मैंने अपना बिस्तर हॉल में लगाया और मैं सो गया या यह कहो कि सोने का नाटक कर रहा था…

अब मैं कुछ होने का इंतज़ार कर रहा था… लेकिन बहुत देर हो गई थी और प्रिया ने अपना यानि मेरे कमरे का दरवाजा भी नहीं खोला था… इंतज़ार करते करते मैं 11 बजे सो गया क्योंकि मुझे रोज जल्दी सोने की आदत थी…

लगभग दो घंटे बाद मैंने अपने पास किसी को लेटा हुआ महसूस किया… रात का समय था और ऐ.सी भी चालू था तो मुझे काफी ठण्ड लग रही थी…

मैंने अपनी करवट बदली तो देखा कि प्रिया पास लेटी है, उसकी पीठ मेरी तरफ थी। मैंने A.C. बंद करने के लिए रिमोट उठाया।

तभी उसने अपनी करवट बदली और बोली -रहने दो ना प्लीज, मुझे ठण्ड में सोना बहुत पसंद है।

इतना कहकर उसने अपनी करवट बदली या यूँ कहो कि ठण्ड के मौसम ने करवट बदली और उसने मुझे अपनी बाहों में ले लिया। वो जानती तो थी कि मैं बहुत शर्मीला हूँ इसलिए पहल उसको ही करनी पड़ेगी…

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