मकान मालकिन और उसकी सहेली एक साथ चुदाई

मैं मनीष आज अपनी लाइफ का एक हसीन किस्सा आपके के सामने रखने जा रहा हूँ. ये किस्सा सच मे काफ़ी हसीन था, इसे याद करते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है. मुझे उम्मीद है, जब आप मेरी कहानी पढ़ोगे तो आपको भी उतना ही मज़ा आएगा.

मेरा नाम मनीष है, और मेरी उम्र 24 साल है. मैं दिखने मे सिंपल पर जवान लड़का हूँ. मुझे चुदाई करने मे बहोत मज़ा आता है. मैने आज तक बहोत सारी चूत और गांड भी मारी है. मेरा लंड 7 इंच लंबा और करीब 3 इंच मोटा है.

जो लड़की मेरे लंड को देखती है, वो इसे चूसे बिना न्ही रहती. इसलिए मुझे अपने लंड पर बहोत नाज़ है. आज का किस्सा मैं आपके साथ शेयर करने जा रहा हूँ. उसमे मैं आपको अपनी लाइफ का पहला ग्रूप सेक्स बताउँगा.

तो अब मैं ज़्यादा टाइम खराब ना करते हुए, सीधा कहानी पर आता हू.

ये बात आज से 7 महीने पहले की है. मैं एसबीआई बॅंक मे काम करता हू. मेरा काम अच्छा होने की वजह से बॅंक ने मुझे बनसार घूमने के लिए भेजा. मैं काफ़ी खुश था, मैं जाने की तयारि करने लग गया.

मैं देल्ही मे रहता हूँ, पर जिस दिन मेरी ट्रेन थी. उस दिन मेरी ट्रेन कॅन्सल हो गई. इसलिए मुझे टॅक्सी मे जाना पड़ा, खैर जैसे तैसे मैं बनसार आ ही गया. मेरा जहाँ पर रूम बुक था, मैं वाहा पर गया.

वो एक बड़े से बज़ार के बीच मे था. बाहर से तो वो काफ़ी छोटा और खराब सा लग रहा था. पर जब मैं अंदर गया तो मैं देख कर हैरान रह गया. क्योकि अंदर से वो काफ़ी ज़्यादा सुंदर था.

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सच मे काफ़ी आलीशान था वो होटेल. उसे हम होटेल न्ही कह सकते. वो घर जैसे एक बहोट अच्छी जगह थी. फिर थोड़ी ही देर बाद मेरे सामने एक लेडी आती है. उन्होने मुझे देखते ही पहचान लिया.

फिर उन्होने मुझे मेरा रूम दिखाया और कहा की मैं रेस्ट कर लू. शाम को डिन्नर पर आजना. मेरे रूम मे चाय और खाने का कुछ समान पहले से ही रखा हुआ था. मैं उनकी ये सर्विस देख कर काफ़ी खुश था.

मैं उस लेडी को मेडम कह कर बुला रहा था. शायद वो ही जगह की मालकिन थी. दिखने मे वो 29 साल की लग रही थी, पर आज भी काफ़ी जवान लग रही थी. उसके बूब्स 34 कमर 30 और गांड करीब 36 की होगी.

साली जब मटक मटक कर चल रही थी, तब मेरा लंड खड़ा होने लग गया था. खैर अब मैं नहा कर सो गया, मैं शाम को उठा तो मैं बाहर आया. बाहर मेरे लिए खाने की काफ़ी आइटम्स रखी हुई थी.

मेडम मेरे पास आई और मुझे सब के बारे बता कर टेस्ट करवाने लग गई. खाना खाने के बाद वो मुझे बाहर घूमने के लिए ले कर गई. वो मुझे घाट पर ले गई, और वाहा पर मैने आरती भी अटेंड करी.

माहॉल काफ़ी अच्छा बना हुआ था, मुझे काफ़ी मज़ा आ रहा था. वो भी मुझे अच्छे से गाइड भी कर रही थी. फिर मैने थोड़ी सी शॉपिंग करी और वापिस जाने लगे. रास्ते मे हम दोनो बातें करते हुए जा रहे थे.

मैं – मेडम वैसे आपकी सर्विस बहोत अच्छी है.

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मेडम – थॅंक्स. वैसे आप भी कम अच्छे न्ही हो.

मैं – जी क्या मतलब ?

मेडम – काफ़ी हॅंडसम और स्मार्ट हो.

मैं – थॅंक्स मेडम.

मेडम – वैसे क्या तुमने कभी ग्रूप सेक्स किया है.

उसके मूह से सेक्स का नाम सुन कर मैं एक दम चोंक गया.

मैं – क्या ग्रूप सेक्स ?

मेडम – क्या हुआ तुम सेक्स न्ही करते ?

मैं – न्ही ऐसी बात न्ही है, मैं करता हूँ पर.

मेडम – पर वर को मारो गोली. मैने जब तुम्हे पहली बार देखा था. तभी मैं समझ गई थी की तुम एक नंबर के चोदु इंसान हो.

मैं – वो तो आपने सही पहचाना. पर ये ग्रूप सेक्स का क्या पंगा है.

मेडम – देखो मेरी एक फ्रेंड है. उसका पति उसे खुश न्ही कर पता. तो मैं तुम्हारे जेसे चोदु बन्दो से उसकी चुदाई करवाती हूँ और बीच मे खुद भी मज़े ले लेती हूँ.

मैं – ठीक है. पर वो है कौन ?

मेडम – उसका नाम शालु है और वो मेरी अच्छी दोस्त है. हा तुम्हे उसको खुश करने के पैसे भी मिलेगें.

मैं – ओके पर कोई पंगा तो न्ही होगा ?

मेडम – अरे सब कुछ तुम्हारे रूम मे ही होगा. किसी को कुछ न्ही पता चलता तुम फिकर मत करो.

मैं – ठीक है फिर, बुलाओ उसे कल.

मेडम – ठीक है कल दोपहर को तयार रहना.

फिर हम वापिस घर आ गये और खाना बनाने वाली खाना बना कर चली गई थी. मैने डिन्नर किया और फिर मैं अपने रूम मे सोने के लिए चला गया. मुझे रात को काफ़ी अच्छी नींद आई.

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