मकान मलिक का बेटा मेरा कुत्ता

हेल्लो मेरे सभी प्यारे दोस्तो, मैं पिंकी पटियाला से हूँ. वैसे तो मैं पिंकी मोगे वाली न्ही हूँ, पर मैं मोगे वाली पिंकी से कम भी न्ही हूँ. मैं आज आप सब के सामने अपनी लाइफ की पहली चुदाई की कहानी ले कर आई हूँ.

मेरा जन्म एक पुवर फॅमिली मे हुआ, मैं शुरू से ही बहोत खूबसूरत हूँ. मेरे घर मे मेरे मम्मी पापा और सिर्फ़ मैं ही हूँ. जब मैं +2 पास करी तो मैने 6 महीने की बॅंक की कोचिंग करी.

भगवान की कृपा से मैं पहले ही एग्ज़ॅम मे पास हो गई. और मुझे बॅंक की नोकारी मिल गई. उस टाइम मेरी उम्र सिर्फ़ 19 साल थी. इतनी कम उम्र मे नौकरी करना मेरे और मेरे घर वालो को थोड़ा अजीब सा लग रहा था.

मैं आज तक अकेली घर से बाहर न्ही गई थी. पर बॅंक की जॉब के लिए मुझे अमृतसर मे जाना पड़ा. मेरा दिल भी न्ही मान रहा था, इतनी दूर जाने के लिए. पर जब मैने अपनी सॅलरी पता करी तो मेरी सॅलरी 25000 थी.

इतने सारे पैसे एक साथ आते किसे अच्छे न्ही लगते थे. वैसे भी अब मुझे ही अपने घर का सुधार करना था. मैने और मेरे घर वालो ने बहोत ग़रीबी के दिन देखे थे. इसलिए अब मेरी बारी थी, की मैं अपने घर वालो को अच्छे दिन दिखा दू.

मेरे पापा मुझे अमृतसर ले आए और मैने अपना ऑफीस देखा. फिर पापा की हेल्प से मुझे बॅंक से थोड़ी ही दूर एक रेंट पर रूम मिल गया. उस घर मे एक हमारी जैसी फॅमिली रहती थी.

ब्स फरक सिर्फ़ इतना था की उस फॅमिली मे लड़की की जगह लड़का था. मेरा रूम छत पर था. रूम के साथ अटॅच बाथरूम था, और मेरे रूम के आगे पूरी छत एक दम सॉफ थी.

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फिर पापा मुझे अकेला छोड़ कर वाहा से चले गये, मुझे थोड़े दिन काफ़ी अजीब सा लगा और अकेला रहने मे काफ़ी मुश्किल भी हो रही थी. पर फिर कुछ ही दीनो मे मुझे आदत सी हो गई थी.

भगवान का शूकर था की मेरे मकान मलिक भी काफ़ी अच्छे थे, वो मुझे अपनी बेटी मानते थे. इसलिए अब मेरा मन वाहा पर लगने लग गया था. मेरे मम्मी पापा हर 15 दिन बाद मुझसे मिलने के लिए आ जाते थे.

उन्हे भी मेरी फिकर कम हुआ करती थी, क्योकि मैं अब एक दम ठीक रहने लग गई थी. धीरे धीरे मुझे वाहा 2 साल हो गये थे. अब मैं 21 साल की हो चुकी थी. 21 साल होने के कारण मेरी जवानी मेरे सिर पर चढ़ चुकी थी.

मैं पहले से काफ़ी बदल चुकी थी, मेरा फिगर अब पहले से एक दम चेंज हो गया था. मैं आपको ज़रा अपने बारे मे बताती हूँ. मेरा रंग शुरू से ही गोरा है. अब मेरा फिगर कुछ ऐसा हो गया था, 32-28-34. मुझे अपने जिस्म पर विश्वास न्ही हो रहा था.

क्योकि मेरे बूब्स और गांड अचानक ही बाहर निकले चुके थे. खैर अब मैं काफ़ी सेक्सी हो गई थी. मैने नोटीस किया की जब मैं बाहर जाती हूँ, या घर वापिस आती हूँ.

तो गली मे काफ़ी सारे लड़के सिर्फ़ मुझे देखने के लिए ही खड़े रहते है. उनकी आँखें मेरे जिस्म पर ही रहती थी. मेरी चिकनी गांड अपने आप उन्हे देख कर मटक मटक कर चलने लग जाती थी.

मैं समझ गई थी, की अब हर लड़का मुझे अपनी रानी बनाना चाहता था. उपर से मेरी मम्मी भी मेरी शादी के लिए कह रही थी. खैर ऐसे ही दिन निकलते रहे, एक दिन मैं अपना अकेलापन दूर करने के लिए.

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अपने घर एक कुत्ता ले आई. मुझे बचपन से ही शॉंक था, की मैं एक कुत्ता पालु. अब मैं अपना काफ़ी टाइम उसके साथ ही बिताती थी, मेरे इस कुत्ते से मेरे मकान मलिक को भी काफ़ी दिक्कत न्ही थी.

इससे मुझे ये फ़ायदा था, की जब लड़के दूसरे की घर की छत पर चढ़कर मुझे देखते थे. तो मेरा कुत्ता शेरू उन्हे भोंक भोंक कर भगा देता था. अब मुझे कोई लड़को की टेन्षन न्ही थी.

एक शाम जब मैं अपने ऑफीस से घर वापिस आई तो मैने अपने शेरू को देखा. वो अपनी दोनो टाँगो के बीच लंड को अपनी जीब से चाट रहा था. उसकी ये हरकत देख कर मेरे जिस्म मे नीचे से लेकर उपर तक एक अजीब सा करेंट दौड़ पड़ा.

मेरी चूत मे हलचल होने लग गई, मुझे समझ न्ही आया की ये मेरे साथ आख़िर क्या हो रहा है. खैर फिर मैं अपने रूम मे गई और चेंज करके आराम करने लग गई.

पर शेरू का लंड बार बार मेरी आँखो के सामने आ रहा था. अगले दिन सनडे था, इसलिए मैं घर पर अकेली थी. मेरे मकान मलिक का लड़का बहोत हॅंडसम था, वो डॉक्टर बनाने वाला था. और अपने लास्ट एग्ज़ाम की तयारि कर रहा था.

सनडे वाले दिन मैं अपने रूम मे शेरू के साथ मस्ती कर रही थी. तभी मुझे उसका लंड फिर से दिख गया. फिर मैने ना चाहते हुए भी उसका लंड अपने हाथ मे पकड़ लिया.

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