मैं रेशमी सी रेशमा

कुछ देर के बाद वो घर के मेन गेट पर था. मैंने फोन में अन्तर्वासना हिन्दी सेक्स स्टोरी साइट खोली और फोन को टीवी के पास रख दिया. उसके बाद मैं गाऊन ऊपर डाल कर गेट खोलने गयी. मुझे गाऊन में देख कर शैलेश अचंभित सा रह गया.
मगर मैंने तभी कह दिया- अच्छा हुआ तुम आ गये. मैं टीवी के बिना बोर हो रही थी.

उसके बाद मैं उसे अंदर लेकर आ गयी. मैंने अपनी ब्रा उठायी और उसके सामने ही बाथरूम में लेकर जाने लगी. वो बेचारा शर्म के मारे पानी पानी हो रहा था. मैंने कहा कि जब तक मैं नहा कर आती हूं तुम जरा सेट टॉप बॉक्स को देख लो. उसने हां में गर्दन हिला दी और मैं अंदर चली गयी.

मैंने अंदर जाकर दरवाजा पूरा बंद नहीं किया. मैंने अंदर से देखा कि शैलेश ने सेट टॉप बॉक्स देखा और उसकी नजर पास में रखे मेरे फोन पर गयी. उसने फोन को हाथ में उठाया और देखने लगा.

फोन में मैंने पहले से ही भाई-बहन के सेक्स और चुदाई की कहानी खोल कर रखी हुई थी. वो कहानी को पढ़ने लगा. उसका चेहरा एकदम से लाल हो रहा था. मैंने देखा कि कहानी पढ़ते हुए उसका लंड भी आकार लेने लगा था. वो अपने लंड को अपने हाथ से सहला रहा था.

मेरा काम बन गया था. मैंने जल्दी से अपने बदन को गीला किया. बालों को भी गीला किया और ब्रा-पैंटी पहन कर तौलिया ऊपर से लपेट लिया. तीन-चार मिनट में ही मैं बाहर आ गयी.

मैंने बाहर आते हुए देखा कि मेरा चचेरा भाई अपने लंड पर हाथ रख कर फोन में सेक्स कहानी पढ़ने में मशगूल था. मगर जैसे ही उसे आहट हुई कि मैं बाहर आ रही हूं तो उसने फोन एक ओर रख दिया और टीवी को चेक करने का नाटक सा करने लगा. उसके शॉर्ट्स में उसका लंड अलग से तना हुआ दिखाई दे रहा था.

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बाहर आकर मैंने कहा- कुछ पता चला क्या?
उसने हड़बड़ाते हुए कहा- नहीं दीदी, देख रहा हूं कि क्या दिक्कत है.
मैं उसके पास आ गयी. मेरी ब्रा की स्ट्रिप तौलिया में से बाहर अलग से दिख रही थी. मेरी वक्षरेखा पर पड़ी पानी की बूंदें देख कर शैलेश की हालत टाइट होने लगी.

उसके हाथ कांपने लगे.
मैंने कहा- क्या हुआ भैया, तुम्हारी तबियत तो ठीक है ना?
वो बोला- हां… हां … बस ऐसे ही थोड़ी गर्मी लग रही है.
मैंने तौलिया उतार दिया और वो मेरी ब्रा में कैद मेरी चूचियों को घूरने लगा.

मैंने कहा- गर्मी तो मुझे भी लग रही है.
इतना बोल कर मैंने उसके शॉर्ट्स में तने हुए लंड पर हाथ रख दिया.
वो बोला- दीदी… ये क्या … क्या कर रही हो. हम भाई-बहन हैं. ये सब.. ठीक नहीं… है।
मैंने कहा- श्श..स्स..!

शैलेश के होंठों पर उंगली रख कर मैंने उसका हाथ अपनी ब्रा में कैद चूचियों पर रखवा दिया. उसका लंड झटके खाने लगा. मैंने उसकी शर्ट को खोलना शुरू कर दिया. उसकी शर्ट उतार कर मैंने एक ओर डाल दी.

धीरे से उसके कांपते होंठों पर अपने तपते होंठ रख कर मैंने उसके होंठों को पीना शुरू कर दिया. वो भी मेरी गांड को दबाते हुए मेरे होंठों का रस पीने लगा. मैंने अपनी ब्रा को खोल कर अपनी चूचियों को आजाद कर दिया.

मेरी मोटी चूचियां उसके सामने नंगी थीं. उसने मेरी गर्दन पर बने टैटू पर किस किया और मेरी चूचियों की ओर आते हुए किस करते हुए मेरे निप्पलों को पीने लगा. मैंने उसका हाथ अपनी पैंटी के ऊपर से अपनी चूत पर रखवा दिया.

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उसका हाथ अब मेरी जालीदार सफेद पैंटी को सहला रहा था. पहली बार मुझे किसी लड़के के हाथ का स्पर्श अपनी चूत पर महसूस हो रहा था. मैं उसको वहीं सोफे पर लेकर लेट गयी. उसके शॉर्ट्स में हाथ देकर मैंने उसके लंड को पकड़ लिया और सहलाने लगी.

हम दोनों एक दूसरे के अंगों के साथ खेलने लगे. अब शैलेश की शर्म भी खुल चुकी थी. वो मेरी चूत पर तेजी के साथ हाथ से सहला रहा था और मैं उसके लंड पर अपने हाथ को ऊपर नीचे कर रही थी.

उसके बाद मैंने अपनी पैंटी भी उतार दी. मेरी चूत गीली हो चुकी थी. मैंने शैलेश को अपनी चूत की ओर धेकला और उसका मुंह अपनी चूत पर दबा दिया. मैं अपनी चूत को उसके होंठों की ओर धकेलने लगी. वो भी उत्तेजित होकर मेरी चूत में जीभ देकर चूसने और चाटने लगा.
मुझे ऐसा मजा मिला कि मैं बेकाबू हो गयी. मैंने उसके शार्ट्स को उतार कर उसे पूरा नंगा कर दिया. मैं उसके लंड को मुंह में लेकर तेजी के साथ चूसने लगी. मेरा यह पहला एक्सपीरियंस किसी मर्द के लंड को मुंह में लेकर चूसने का. मगर सेक्स की प्यास ऐसी थी कि बहुत मजा आ रहा था.

शैलेश मेरी चूत में तेजी से जीभ से चाटता रहा और मैं उसके लंड को चूसती रही. जब उसका लंड एकदम से कड़क हो गया तो मैंने अपनी टांगें उसके सामने फैलाते हुए अपनी चूत को उसके सामने खोल दिया. उसे पता था कि उसे क्या करना है.

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