मैं रेशमी सी रेशमा

मेरी उंगली मेरी सहेली की चूत के अंदर बाहर हो रही थी. पांच सात मिनट तक मैंने उसकी चूत को सहलाया और फिर एकदम से उसकी चूत से बहुत सारा पानी निकलने लगा. मेरा पूरा हाथ उसकी चूत के पानी से गीला हो गया.

फिर वो शांत हो गयी. उसने अपना फोन मुझे पकड़ा दिया. मैं भी अन्तर्वासना पर सेक्स स्टोरी पढ़ने लगी. उस दिन मुझे पहली बार अन्तर्वासना हिन्दी सेक्स स्टोरी के बारे में पता चला. उसमें एक लड़की और उसके चचेरे भाई की चुदाई की कहानी थी.

वो कहानी पढ़ते हुए मेरी चूत पूरी गीली हो गयी. मेरे घर के पास में भी मेरा एक चचेरा भाई रहता था. पता नहीं कब मेरे मन में उसी के लिंग के खयाल आने लगे. इससे पहले मैंने कभी उसके बारे में ऐसे नहीं सोचा था. मगर उस दिन ऐसा मन किया कि उसके लिंग को हाथ में लेकर देखूं और उसके लिंग को अपनी चूत पर रगड़वा कर मजा लूं.

उस रात को मेरी सहेली ने मेरी चूत को जीभ से चाटा. मैं पहली बार स्खलित हुई और मुझे ऐसा आनंद मिला कि मुझे इसकी आदत सी लग गयी. अब हर तीसरे दिन मेरी सहेली के साथ हॉस्टल में हम दोनों का लेस्बियन सेक्स होता था.

कभी मैं उसकी चूचियों के साथ खेलती और उसकी चूत को चाटा करती थी और कभी वो मेरी चूचियों को जोर से दबाते हुए मेरी चूत में उंगली कर दिया करती थी. काफी दिन हो गये थे उसके साथ लेस्बियन सेक्स का मजा लेते हुए.

अब मेरा मन किसी जवान लड़के के लिंग को देखने, छूने और उसको अपनी चूत में लेने के लिए करने लगा था. अपने चचेरे भाई के लिए मेरी प्यास हर दिन तेज होती जा रही थी. मैंने सोच लिया था कि अबकी बार जब घर जाऊंगी उसका लंड चूत में लेकर ही रहूंगी.

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मेरी सहेली के साथ मैं काफी खुल गयी. उसके अलावा मेरी बाकी सहेलियों के साथ भी मैंने खूब मस्ती और मजा किया. मेरी सहेलियों की देखा देखी मैंने भी अपनी नाभि और अपनी गर्दन पर टैटू बनवा लिये. कानों में मैंने ऊपर तक पीयरसिंग करवा ली थी और उनमें बालियां डाल ली थीं. मैं अपने चचेरे भाई को उत्तेजित करने की पूरी तैयारी करके जाना चाहती थी.

फिर जब कॉलेज की छुट्टियां हुईं तो पापा मुझे लेने के लिए आ गये. एक बार तो वो मुझे पहचान भी नहीं पाये. मेरा रूप बदल गया था. मगर मैं उनकी लाडली थी इसलिए उन्होंने कुछ नहीं कहा. मैं अपने घर वापस आ गयी. साल भर में ही मेरा रूप एकदम से बदल गया था. अब मैं जब खुद को आइने में देखती थी तो खुद पर ही इतराने लगती थी.

गर्मियों के दिन थे और बगल की छत पर मेरा चचेरा भाई अक्सर मुझे शाम को टहलते हुए दिख जाया करता था. मेरे चाचा के घर और हमारे घर की छत एक दूसरे से सटी हुई थी. मैं भी शाम होते ही छत पर पहुंच जाती थी.

एक दिन ऐसे ही मैं अपने चचेरे भाई के इंतजार में छत पर टहल रही थी. कुछ देर के बाद वो ऊपर हवा लेने के लिए आया. उस दिन मैंने एक डीप गले का टॉप पहना हुआ था जिसमें से मेरी वक्षरेखा और मेरी चूचियां लगभग आधी नंगी दिख रही थीं.

उस पर भी मैं छत पर बनी चारदीवारी पर झुकी हुई थी. जिससे मेरी चूचियों का नजारा सीधे मेरे चचेरे भाई की नजरों से टकरा जाये. जैसे ही वो ऊपर आया तो उसका ध्यान मेरी चूचियों पर पड़ गया. मगर ये देखते ही उसका चेहरा शर्म से लाल सा हो गया. उसने मुंह दूसरी ओर घुमा लिया.

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मेरा चचेरा भाई दरअसल काफी शर्मीला किस्म का लड़का था. 21-22 साल का जवान लड़का था. उसके शॉर्ट्स में से उसका लंड का उठाव देख कर मेरी चूत में टीस सी उठ जाती थी. शक्ल का भी अच्छा था और शरीर भी गठीला था उसका. मगर जरूरत से ज्यादा शर्मीला था.

बहुत कोशिश की उसको उसकसाने की लेकिन वो अपनी तरफ से शायद पहल नहीं कर पा रहा था. मैंने सोच लिया था कि उसके लंड को खड़ा करके अपनी चूत की प्यास तो मैं उसी के लंड से बुझवा कर रहूंगी.

एक दिन की बात है कि हमारे घर वाले कहीं बाहर गये हुए थे. मैंने शैलेश (चचेरे भाई) को अपने घर बुला लिया.
वो बोला- क्या काम है?
मैंने कहा- हमारे टीवी का जो सेट टॉप बॉक्स है, उसने अचानक से काम करना बंद कर दिया है. अगर तुम्हें उसके बारे में कुछ पता हो तो एक बार देख लो.
वो बोला- ठीक है, मैं थोड़ी देर में आता हूं.

मैं वापस अपने रूम में आ गयी. मैंने जल्दी से अपने कपड़े निकाले और तौलिया लपेट कर नहाने के लिए तैयार हो गयी. मेरा प्लान था कि मैं अपनी चूचियों के दर्शन शैलेश को करवा दूं और उसे उत्तेजित कर दूं.

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