महिमा की नशीली चूत का आनंद

मैंने महिमा से कहा महिमा देखो तुम्हें जब भी मेरी जरूरत होगी तो मैं हमेशा तुम्हारे साथ खड़ा हूं मुझसे जितना बन पड़ेगा मैं हमेशा ही तुम्हारे लिए करूंगा लेकिन मैं तुमसे शादी नहीं कर सकता महिमा कहने लगी मुझे मालूम है, महिमा ने कहा कि मम्मी की बात को छोड़ो। कहीं ना कहीं दबे पाव हम दोनों के रिश्ते की बात चलने लगी थी और मैं भी उस रात सोचने लगा कि यदि महिमा के साथ मेरी शादी होगी तो शायद मैं खुश रहूंगा क्योंकि उसके जैसी समझदार और अच्छी लड़की मुझे शायद ही मिल पाएगी। मैं महिमा को काफी समय से जानता भी हूं लेकिन शायद मैं अपने दिल में गलत ख्याल पैदा कर बैठा था महिमा के दिल में मेरे लिए ऐसा कुछ भी नहीं था। हम दोनो जब भी मिलते तो हम एक अच्छे दोस्त के नाते मिला करते और जब भी उसे मेरी जरूरत होती तो मैं सबसे पहले उसके साथ खड़ा होता। वह मुझे अपनी हर बात बताया करती थी उसके जीवन में जो भी होता वह मुझसे जरूर शेयर किया करती थी। एक दिन मैं और महिमा मिलने वाले थे जब हम लोग मिले तो मैंने महिमा से कहा हम लोग कहीं घूमने चलते हैं मैंने अपनी कार में महिमा को बैठा लिया। हम दोनों बात कर रहे थे तभी एक बड़ा सा गड्ढा रोड पर था और मैं महिमा से बात कर रहा था मेरा ध्यान उस गड्ढे की तरफ नहीं गया तभी गाड़ी का टायर उस गड्ढे में चला गया और महिमा को चोट लग गयी। मैंने जब महिमा की तरफ देखा तो महिमा के सर पर काफी तेज चोट लग गई थी जिससे कि उसके सर से खून आने लगा था। मैं घबरा गया और उसे एक हॉस्पिटल में लेकर गया वहां पर हमने उसके मरहम पट्टी करवाई मैंने महिमा से कहा तुम ठीक तो हो ना महिमा कहने लगी हां मैं ठीक हूं। मैंने महिमा से कहा मेरी वजह से तुम्हें चोट लगी है महिमा कहने लगी कोई बात नहीं मैं अब ठीक हूं तुम चिंता मत करो परंतु मुझे उस वक्त एहसास हुआ कि महिमा को काफी तकलीफ हुई होगी।

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मैंने महिमा को कार में बैठाया और उसे कहा मेरी वजह से तुम्हें बहुत चोट लगी महिमा ने मुझे कहा अरे नहीं बाबा ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है मैं ठीक हूं तुम बेकार में ही टेंशन ले रहे हो। मैंने महिमा को गले लगा लिया और न जाने उस वक्त मेरे दिल में कहां से इतना प्यार उमड़ पड़ा। मैंने महिमा को अपने गले लगा लिया और हम दोनों के अंदर एक अलग ही फीलिंग आने लगी और वह शायद सेक्स को लेकर थी। मैंने महिमा के होठों को चूमना शुरू किया और उसके होठों को मैंने किस करना शुरू कर दिया मैं उसके होठों को अपने होठों में लेकर चूम रहा था उसे बहुत ही अच्छा लगता। वह मेरा पूरा साथ देती उसके रसीले होठों को मैंने काफी देर तक किस किया हम दोनों ही पूरी तरीके से एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए तैयार हो चुके थे। मैं महिमा को एक सुनसान जगह पर ले गया वहां पर मैंने अपनी गाड़ी के शीशों को बंद कर दिया और मैंने महिमा के स्तनों का रसपान करना शुरू किया उसके निप्पल को जब मैं अपने मुंह में लेकर चुस रहा था तो मुझे बड़ा मजा आ रहा था।

मैं उसके स्तनों का रसपान काफी देर तक करता रहा मुझे बहुत आनंद आया मैंने उसकी योनि को चाटना शुरू किया तो मुझे और भी मजा आने लगा। मैं बहुत ज्यादा खुश था मैंने उसकी गिली योनि के अंदर अपने लंड को घुसाया तो उसकी योनि से खून का बहाव आने लगा और उसके मुंह से चीख निकल पडी। उसके मुंह से सिसकिया निकलने लगी मैं उसे धक्के दिए जा रहा था और वह मादक आवाज मे सिसकिया निकल रही थी। मैं उसे बड़ी तेजी से धक्के दिए जाता हम दोनों के अंदर कुछ ज्यादा गर्मी पैदा होने लगी और हम दोनों ने एक दूसरे के साथ बड़े अच्छे तरीके से सेक्स का आनंद लिया, हम दोनों बहुत ज्यादा खुश थे। मुझे उस वक्त एहसास हुआ की महिमा कि मैं कितनी ज्यादा फिक्र करता हूं लेकिन उसके बाद भी मैंने महिमा से शादी करने के बारे में कभी नहीं सोचा। उसके साथ जिस प्रकार से मैंने सेक्स का मजा लिया वह मेरे लिए बड़ा ही मजेदार था और उसकी सील पैक चूत के मजे मैने लिए थे मैने ही उसकी सील सबसे पहले तोडी।

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