मेरी मां और मौसी की वासना

मैं अपनी विधवा मां और तलाकशुदा मौसी के साथ पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक छोटे गांव में रहता हूं। दोनों का बदन सेक्सी चोदने लायक है भरा हुआ. एक रात मैंने खेत वाले कमरे में देखा कि …

दोस्तो, यह कहानी मेरे मां, मौसी और गाँव के एक आदमी की है। यह मेरी पहली कहानी है अगर कुछ गलतियां हो तो माफ़ करें।

मेरा नाम है आयुष, उम्र 21 साल। मैं एक शुद्ध ब्राह्मण परिवार से हूं। मैं अपनी मां और मौसी के साथ एक बहुत ही छोटे गांव में रहता हूं। मेरे पिता का देहांत 12 साल पहले हो गया था।
हम बहुत ही गरीब हैं लेकिन हमारे पास एक जमीन का टुकड़ा है तो हम अपना गुज़ारा उसी पर खेती करके करते हैं।

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मेरी मां नाम संगीता है. उनकी उम्र 40 साल, फूले हुए शरीर की मालकिन, 40″ की दूध से भरी हुई चूची और 44″ की कहर ढा देने वाली बाहर को निकली हुई सुडौल गान्ड … जिसे देख गांव में हर कोई अपना लौड़ा मसलता और मेरी माँ की चुदाई की फिराक में होता था।

अब बारी मेरी मौसी की … उनका नाम अमिता उम्र 35 साल. मौसी भी अपनी बहन से कुछ कम ना थी. 36″ की टाईट चूची और 38″ की बल खाती मटकती हुई गान्ड।
अमिता मौसी का तलाक हो गया था. तलाक होने के बाद मौसी हमारे साथ ही रहने लगी क्योंकि यहां माँ भी अकेली ही थी।

हम तीनों दिन भर खेत में मेहनत करते और शाम को माँ और मौसी घर चली जाती खाना बनाने. और मैं रात तक वहीं कुएं पर नहाकर खेत पर बने छोटे से कमरे में रुकता।

रात को 8 बजे मौसी आती और वो रात भर वहीं रुकती खेत की रखवाली करने।
मैं और माँ घर पर सोते थे।

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हमारा खेत गांव से काफी दूर था. यहां आसपास कोई दूसरा खेत भी नहीं था इसी वजह से किसी को वहां रखवाली करने रुकना पड़ता।

हम अपना खेत से निकला हुआ पूरा अनाज गांव के एक लेनदार, जो पूरा अनाज बाहर दूसरे शहर जाकर बेचता था, उसको बेच देते थे।
उसका नाम था मुकेश वो एक ट्रक ड्राइवर था और वो ही पूरे गांव का अनाज ले जाता था। उसका एक भाई भी था मनीष जो गाँव के बाहर मांस की दूकान करता था।

एक बार की बात है ठंडी का समय था. खेत की कुटिया में कोई कम्बल नहीं था तो माँ ने मुझे कम्बल लेकर भेजा कि जा मौसी को दे आ।
जब मैं खेत के पास पहुंचा तो मुझे अजीब सी आवाजें सुनाई दी।

तो मैं दबे पांव कुटिया के पास जाकर वहां दरवाजे के छेद से झाँका तो देखा कि मेरी मौसी पूरी नंगी पड़ी थी और मनीष जो करीब 50 साल के थे वो बड़ी बेरहमी से मौसी की चूत को चोद रहे थे।

मनीष- आह अमिता … साली तुझे रोज चोद कर भी जी नहीं भरता. साली गांव की इतनी औरतें और लड़कियां चोदी मगर तेरे जैसी बात नहीं उनमें।
अमिता- ऊऊह आह … मनीष जी आपके खातिर ही तो अपने हिजड़े पति से तलाक लेकर यहां आई हूं। मैं एक दिन भी आपसे चूदे बिना नहीं रह सकती हूं.
मनीष- मेरी रण्डी, तो मैं कहाँ जा रहा हूं. रोज पूरी रात तो तुझे चोदता हूं साली छिनाल!

अमिता मौसी- उह आह चोदो और तेज़ उम्म्ह… अहह… हय… याह… मालिक ऊह!
मनीष- आह साली अमिता रण्डी … तुझे रोज चोदता हूं, तब भी रोज मज़ा आता है तुझे चोदने में। तो तेरी बहन को चोदेगा मेरा लौड़ा तो कितना मज़ा आएगा! क्या भरा हुआ एक गदराया माल है संगीता! गांव के सब लौड़े मरते हैं उस पर।

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अमिता- हाँ मनीष जी, साली रण्डी पर पूरा गांव फिदा है. और वो है कि 12 साल से चुदी नहीं है।
मनीष- क्या सच अमिता? उस साली को चोदने में तो और मजा आएगा. साली की फुद्दी और बड़ी गान्ड में अपना 8 इंच का लौड़ा डालूँगा और रण्डी को रुला रुला कर अपनी रखैल बना लूंगा। अमिता कुछ कर … साली को मेरे लौड़े पर सुला कैसे भी करके! मेरा लौड़ा तड़प रहा है उसकी लेने के लिए।

अमिता- मनीष जी, मैं कुछ करती हूं। वो कुछ ही दिनों में आपके नीचे होगी। अभी तो अच्छे से मेरी चूत की चुदाई कर दो।
मनीष- हाँ रण्डी … तू अगर मुझे संगीता दिलाएगी तो तुझे मैं और एक मोटे लौड़े से चुदवाऊँगा रण्डी!

और मनीष अपने 7 इंच के लौड़े से अमिता मौसी की चूत को बहुत बुरी तरह चोद रहा था. अमिता मौसी भी अपनी मोटी गान्ड उछाल उछाल के उसका लौड़ा ले रही थी।
यह दख मुझसे रहा नहीं गया और मैंने मुठ मार ली और कम्बल वहीं छोड़ घर को आ गया.

अगले दिन जब मां दोपहर का खाना बनाने घर गई तो मौसी ने मुझे मुझे पास बुलाया और बोली- आयुष, तू कल रात कम्बल लेकर आया था?
मैं- हां मौसी, मैं ही आया था.
मौसी- तो दिया क्यूं नहीं? बाहर छोड़ कर क्यूँ चला गया

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