मेरा कौमार्य भंग नवविवाहिता भाभी के संग

भाभी भी ‘आह ऊह्ह ह्ह्ह्ह…’ की आवाजें निकाल रही थी। मैं एक हाथ से भाभी का एक चूचा मसल रहा था और एक को मुँह में भरकर चूस रहा था। क्या शानदार पल था मेरे लिए, मेरे सपनों की मल्लिका आज खुद को मुझसे चुदवाने के लिए बेकरार थी।
मैंने कहा- भाभी मेरा लंड चूसो!
तो वो गुस्सा हो गयी और कहने लगी- भाभी नहीं, मुझे गरिमा कहो।

मैंने फिर से कहा- गरिमा डार्लिंग, मेरा लंड चूसो!
तो वो तुरंत ही मेरा लंड अपने मुँह में भरकर चूसने लगी।
मेरा यह पहला अनुभव था, मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

फिर हम 69 की पोजीशन में आ गए। करीब 10 मिनट की चुसाई के बाद हम दोनों ही निढाल हो गए। थोड़ी देर में मेरा लंड फिर से खड़ा हुआ और मैंने अपनी गरिमा डार्लिंग की चूत पर गौर किया, एकदम गुलाबी चूत जो निकले हुए रस से एकदम गीली हो चुकी थी।
गरिमा ने कहा- अब कितना परेशान करोगे मेरे आयुष्मान, डाल दो अपना लंड मेरी फुदकती चूत में।

मैंने भी अब ज्यादा देर करना सही नहीं समझा, गरिमा की चूत पे लंड टिका कर जैसे ही मैंने झटका मारा, मेरा लंड फिसल गया और गरिमा हँसने लगी।
गरिमा ने कहा- लगता है, पहली बार है?
तो मैंने भी हाँ में सर हिलाया।
उसने कहा- कोई बात नहीं, मैं तुझे इसमें उस्ताद बना दूँगी।

फिर से मैंने उसके कहने अनुसार लंड सेट किया और झटका मार दिया, इस बार लंड अन्दर चला गया और हम दोनों की चीख निकल गयी फिर धीरे धीरे धक्के पे धक्का चलता रहा।
हमारी चुदाई करीब 15 मिनट चलती रही, इस बीच वो एक बार झड़ चुकी थी।
अब मेरा भी होने वाला था, तो मैंने पूछा- कहाँ छोड़ूँ?
तो गरिमा डार्लिंग बोली- अन्दर ही छोड़ दो, मैं भी आने वाली हूँ।
फिर वो मेरे ही साथ वो दोबारा झड़ गयी।

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हमने एक दूसरे को फिर से किस किया.

फिर उस रात मैंने भाभी को 3 बार और चोदा।

तब से यह सिलसिला रोज़ चलने लगा। अब तो गरिमा जैसे मेरी बीवी बन गयी थी। लेकिन एक महीने पहले भैया का ट्रान्सफर बंगलौर हो गया। पहले तो वो अकेले ही गए लेकिन 15 दिन बाद मेरी पत्नी (गरिमा) को भी ले गए। अब मैं फिर से अकेला हो गया हूँ।

यह कहानी मैं उसी की अनुमति से लिख रहा हूँ। अब मैं फिर से किसी नए साथी की तलाश में हूँ। जैसे ही कुछ नया होता है तो अपने साथी की मर्ज़ी से नयी कहानी लेकर आपके सामने आऊंगा। सभी सुंदर लड़कियों, भाभियों, और आंटियों को आयुष्मान का प्रणाम।

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