कर्जदार की बीवी से मिला चुदाई का सुख

तभी भाभी जी ने मेरे लंड को किस किया और मैं कुछ समझ पाता कि भाभी जी ने मेरे लंड को लॉलीपॉप की तरह चूसना चालू कर दिया. लंड चुसाई शुरू होते ही मैं सातवें आसमान पर उड़ने लगा था. इतनी अच्छी और खूबसूरत भाभी मेरे लंड को चूस रही हैं, ये मुझे यकीन नहीं हो रहा था. मुझे सपना जैसा लग रहा था.

भाभी जी जोर जोर से मेरे लंड को चूस रही थीं, इससे मेरा जोश बढ़ गया और कुछ ही पलों में मैं भाभी जी के मुँह में झड़ गया.

इधर एक बात बड़ी मस्त लगी कि भाभी जी ने मेरे लंड का पूरा रस अपने मुँह में भर लिया, लेकिन उसको अपने हलक के नीचे नहीं उतारा. फिर भाभी बड़ी अदा से उठीं और मुझे जीभ देखते हुए मेरे लंड का रस मुझे दिखाने लगीं. मैंने आँख दबा कर खा जाने का इशारा किया. पर भाभी जी अपनी गांड मटकाते हुए बाथरूम की तरफ चली गईं. उधर भाभी जी ने अपना मुँह साफ किया और बाहर आ गईं. इसके बाद मैं फिर से भाभी को चूमने लगा.

अब भाभी जी बोलीं- इतना मत तड़पाओ मेरे राजा.

मैंने ओके कहा और भाभी जी के दोनों पैर पकड़ कर उनको बिस्तर पर चित लिटा दिया. मैंने उनके पैरों को फैलाया और अपने लंड को भाभी जी की चूत पर टिका दिया. लंड के सुपारे से भाभी जी की चूत के दाने को छेड़ने लगा और चूत की फांकों पर लंड घिसने लगा.

भाभी इससे तड़प उठीं और जोर जोर बोलने लगीं- आह मत तड़पाओ मेरे राजा … जल्दी से पूरा अन्दर डाल दो.

मैंने उनकी चूत की फांकों को लंड से खोलते हुए अन्दर डालने के लिए एक झटका दे मारा. पहले झटके में ही मेरा लंड इंच अन्दर घुस गया. भाभी जी लंड की मोटाई से तड़फ उठीं और चिल्लाने लगीं ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
मैंने पूछा- क्या हुआ आप तो खेली खाई हो?
भाभी जी ने बताया- शराब पीने के लत ने मुझे मेरे पति संतुष्ट ही नहीं कर पाते थे, इसलिए उन्होंने मुझे महीनों से छुआ ही नहीं है. मैं प्यार की भूखी हूँ … और महीनों से चुदी नहीं हूँ.

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मैं धीरे धीरे भाभी जी को पेलता रहा और उनकी चूचियों को सहलाता रहा. इस तरह मेरा पूरा लंड भाभी जी की चूत की जड़ तक उतर गया.

कुछ पल भाभी जी अपने होंठ भींचे हुए मेरे लंड से होने वाले दर्द को सहती रहीं. मैं भी पूरे लंड को चूत में पेवस्त करने के बाद रुक गया. कुछ पलों के भाभी जी ने अपनी कमर को हिलाया, तब मैंने उनकी कमर के नीचे तकिया लगाने के लिए उनको अपनी गोद में ले लिया.

भाभी जी की चूत इस वक्त मेरे पूरे लंड को अपनी बुर में लिए मुझे चूम रही थीं. मैंने बैठे बैठे ही उनकी चूत पर हमला बोल दिया. फिर चुदाई का असली मज़ा चालू हुआ.
अब मैं जोर जोर से भाभी जी को चोद रहा था … और वो बोले जा रही थीं- आह और जोर जोर से …

मेरा लंड उनकी बच्चेदानी तक जा रहा था. कोई 15 मिनट तक इस तरह से चुदाई का मजा लेने के बाद भाभी जी ने मुझे रोका. मैंने पूछा तो उन्होंने नीचे आने को कहा. मैंने चूत से लंड निकाले बिना ही उनको अपने ऊपर ले लिया.
बस भाभी जी मेरे लंड पर चढ़ गईं और कूदने लगीं.

चुदाई का लम्बा सफ़र चला. अब तक भाभी जी 3 बार झड़ चुकी थीं.

इसके बाद मैंने उनको डॉगी स्टाइल में खड़ा किया और चोदने लगा. ये मेरा फेवरेट आसन है, इस तरह से चुदाई में भाभी को थोड़ी तकलीफ हुई और वो रोने लगीं.

भाभी जी फिर से एक बार झड़ने लगीं. तभी मैंने भी अपनी स्पीड को बढ़ा दिया. कोई 8-10 धक्के बाद मैंने भी भाभी जी की चूत में ही अपना माल छोड़ दिया और उनसे लिपट गया.
हम दोनों एकदम से चिपक कर स्खलन का सुख लेने लगे.

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चुदाई के बाद भाभी जी रोने लगीं. मेरे पूछने पर उन्होंने बताया कि ये खुशी के आंसू है … आज तक उनके पति ने उन्हें ऐसा यौन सुख कभी नहीं दिया था … जो आज मुझसे मिला.

अब 8 बज चुके थे. कुछ देर के बाद भाभी जी तैयार हुईं और घर जाने को बोलने लगीं. मैंने भी उन्हें गले से लगाया, किस किए.

फिर भाभी बोलीं- अब तो तुम मुझे रोज ऐसे शांत करते रहोगे न.
मैंने कहा- ये भी कोई पूछने वाली बात है.

भाभी जी मुझे चूम कर अपने घर चली गईं. हमारा ये खेल ऐसे ही करीब 5 महीने चला. मैंने उन्हें बीवी की तरह चोदा. अब वो यहां नहीं रहती हैं. मैंने जो उनके लोन का पैसा जमा करा दिया था, वो उन्होंने मुझे वापस किया. मैं ले ही नहीं रहा था, पर वो नहीं मानी.

दोस्तों जैसा कि मैंने शुरुआत में ही बताया था कि आप सबकी सेक्स कहानी पढ़ कर ही मुझे सेक्स कहानी लिखने की इच्छा हुई थी. ये मेरी पहली सेक्स कहानी है, हो सकता है कि मुझसे लिखने में गलती हो गई हो, तो नौसिखिया समझ कर माफ कर देना.

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