कमसिन बेटी की महकती जवानी-6

पद्मिनी आँख मूंदे अंगड़ाइयों के साथ कामुक सिसकारियां लेते हुए बापू को किस कर रही थी. आखिर में बापू ने पद्मिनी की दोनों पैरों को दोनों तरफ फैलाते हुए खुद को बीच में घुसा लिया. अपने हाथों से अपने लंड को पद्मिनी की चुत पर रगड़ा, फिर थूक से गीला करके चूत के छेद में डालने की कोशिश में लगा रहा. हर बार जब लंड घुसने वाला होता था, तो पद्मिनी अपनी कमर हिला देती और लंड एक तरफ हो जाता.

मगर बापू थका नहीं.. हिम्मत करके उसने कोशिश को जारी रखा. उसने अपने दोनों हाथों से पद्मिनी की दोनों जांघों को दबाया और अपने लंड को चूत के छेद में घुसाने की कोशिश की. उसके लंड का ऊपर वाला हिस्सा थोड़ा सा अन्दर घुस गया.
लंड अन्दर जाते ही पद्मिनी ज़ोर से चिल्ला दी- नहीं नहीं.. बापू मुझको डर लग रही है.. दुखेगी.. मत डालो अन्दर प्लीज..

बापू ने पद्मिनी को प्यार से सहलाया, गालों पर अपने हाथों को फेरा, पद्मिनी को किस किया, बहुत फुसलाया.. फिर अपने कार्य को जारी रखा.

बापू ने पद्मिनी की चूचियाँ सहलाते हुए उसकी चूत में एक हल्का सा धक्का मारा और उनका आधा लंड पद्मिनी की कुंवारेपन की झिल्ली तोड़कर अन्दर घुस गया. पद्मिनी दर्द से आह आह कर उठी. फिर थोड़ी देर उसने पद्मिनी के होंठों और चूचियों का मर्दन किया. जब पद्मिनी का दर्द कम हुआ और वह मज़े से बापू को देखने लगी, तब बापू प्यार से बोला- बेटा दर्द कम हुआ?
पद्मिनी ने हाँ में सर हिलाया.

अब बापू ने और ज़ोर से धक्का मारा और उसका पूरा मूसल लंड पद्मिनी की नन्ही सी चूत की गहराइयों में धँस गया.

पद्मिनी को यूं लगा कि उसके अन्दर किसी ने कील ठोक दी है. वह दर्द से बिलबिला उठी. बापू उसके आँसू पोंछते हुए उसकी चूचियाँ दबाता रहा और होंठ चूसता रहा.

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थोड़ी देर में पद्मिनी ने महसूस किया कि अब दर्द कम हो गया और मज़ा आने लगा. पद्मिनी ने बापू से कहा कि बापू अब अच्छा लग रहा है.
बापू मुस्कराया और बोला- बेटी.. चुदाई का असली मज़ा तो अब आएगा.

ये कहते हुए उसने अपनी कमर को उठाकर अपना आधा लंड बाहर किया और फिर अन्दर ज़ोर से अन्दर जड़ तक पेल दिया. पद्मिनी की मस्ती से आह निकल गई और वह ‘आह आह उफ़्फ़, बापू और ज़ोर से चोदो..’ बोल उठी.

बापू ख़ुश होकर बोला- वाह बेटी, तुम तो अपनी माँ से भी बड़ी चुदक्कड़ निकलोगी, क्योंकि उसके मुँह से चोदना शब्द निकालने में मुझे दो महीने लग गए थे. तुमने तो चार धक्कों में चुदाई सीख ली और बोलने भी लगी. शाबाश.. बस ऐसे ही चुदवाओ.
यह कहते हुए उसने पद्मिनी को ज़ोर ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया.

पद्मिनी के मस्ती से भरे अंगों को दबाते हुए बापू उसे बहुत ज़ोरदार चुदाई से मस्त कर दिया. पद्मिनी भी मज़े से सिसकारियाँ भर रही थी.
फिर उसका शरीर अकड़ने लगा और वो चिल्लायी- बापू मैं तो गयी..
वो अपने जिस्म को थिरकाते हुए झड़ने लगी. उसी समय बापू भी धक्के मारते हुए आह आह करके झड़ गया.

दो पल बाद बापू उठ गया और उसने अपना लंड अपनी बेटी की चूत से बाहर निकाला. लंड का माल टपक रहा था. इसकी परवाह किए बिना बापू पद्मिनी के बग़ल में लेट गया. फिर वो पद्मिनी को बांहों में लेकर प्यार करने लगा.
कुछ देर बाद वो बोला- चलो, गुसलखाने में चलते हैं.

पद्मिनी उठकर अपनी चूत देखने लगी, क्योंकि उसे वहाँ जलन सी हो रही थी. उसकी नज़र चादर पर पड़ी, जिसमें लाल ख़ून का दाग़ लगा था. उसकी चूत में भी ख़ून की बूँदें दिख रही थीं.

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तभी बापू ने मुस्कारते हुए अपने लटके हुए लंड को दिखाया, जिसमें लाल ख़ून लगा हुआ दिख रहा था.
बापू बोला- जब लड़की पहली बार चुदती है, तो उसकी चूत से थोड़ा सा ख़ून निकलता है. बेटा, ये सामन्य सी बात है.
पद्मिनी बोली- बापू यहाँ नीचे थोड़ा दर्द और जलन भी हो रही है.
वो बोला- बेटी, पहली बार में ये सब होगा, कल तक सब ठीक हो जाएगा.

फिर वो दोनों उठे और बापू पद्मिनी को गोद में उठाकर उसे चूमते हुए गुसलखाने में ले गया. वहाँ उसने उसे पेशाब करने बैठा दिया.

पद्मिनी सू सू करने लगी. वो प्यार से पद्मिनी के सर पर हाथ फेर रहा था. उसका लंड पद्मिनी के सामने लटक रहा था.

फिर बापू भी लंड उठाकर सु सु करने लगा. पद्मिनी मंत्र मुग्ध होकर उसके लंड और उससे निकलने वाली सु सु को देख रही थी.

फिर बापू ने लंड हिलाकर आख़िरी बूंद भी निकाली. इसके बाद वो पद्मिनी के पास आया और बोला- चलो बेटी तुम्हें नहला दूँ, पसीने से भीग गयी हो और मेरे रस से भी सनी हो.

बापू पद्मिनी की चूत की ओर इशारा करते हुए बोला कि चलो आज हम दोनों एक साथ नहाएँगे.
यह कहते हुए पद्मिनी को अपनी बांहों में भर लिया और चूमने लगा. साथ ही वो अपने हाथ को पद्मिनी के चूतड़ों पर फेरने लगा. पद्मिनी भी अपने बापू से चिपक गयी थी.

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