जीजू के लंड के मज़े

हेल्लो फ्रेंड्स, मेरा नाम स्वाती है. मैं दिखने मे अच्छी हू और मैं सिटी मे रहती हू तो दिखने मे थोड़ा फॅशनबल भी हू.

मैं अपने आपको बहुत मेनटेन रखती हू. मैं भी अब जवान हो रही थी और अपनी सहेली के साथ मैं भी सेक्स के बारे मे बातें करती थी.

हम सब लोग एक अपने अपने बाय्फ्रेंड थे और हम सब लोग अपने बाय्फ्रेंड के साथ डेट पर जाते थे और अपने बाय्फ्रेंड के साथ सेक्स भी करते थे.

मेरे भी एक बाय्फ्रेंड था और मैं भी उसको बहुत प्यार करती थी लेकिन दुनिया ही ऐसी है जहा सब लोग एक दूसरे को धोखा देते है. मैं एक बार अपने बाय्फ्रेंड को किसी दूसरी लड़की के साथ होटेल मे देख ली थी और मैं उससे ब्रेकप कर ली थी.

एक बार मैं और मेरी सहेलिया हम सब लोग होटेल मे जाकर पार्टी करने का प्लान किए थे. हम सब गये तो मेरी एक सहेली ने बताया की तुम्हारा बाय्फ्रेंड किसी दूसरी लड़की के साथ होटेल मे आया है.

मुझे देख कर बहुत बुरा लगा की जिस लड़के से मैने इतना प्यार किया और उससे चूत चुदवायि उसने मुझे धोखा दे दिया.

मैने ब्रेकप कर लिया और मैं सिंगल हो गयी. मेरी सहेलियों के साथ अब मेरा मन नही लगता था और मैं ज़्यादा अपने घर मे रहने लगी.

मैं क्या करू इतनी चुद गयी थी की मेरी चूत को लंड की ज़रूरत थी. मुझे अब सेक्स करने का मन करने लगा था. मैने बहुत दिन से सेक्स नही किया था और मुझे सेक्स के लिए बहुत मन करता था.

पर मैं अकेले कुछ कर भी नही सकती थी, इसलिए मैं अपनी चूत मे उंगली करती थी और जैसे तैसे मैं अपनी चूत को शांत करती थी.

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मेरी सहेली तो अपने बाय्फ्रेंड के साथ खुश थी और वो लोग हमेशा की तरह डेट पर जाते थे और सेक्स भी करते थे. मैं थोडा अकेला फील करने लगी और मुझे कुछ समझ नही आ रहा था की मैं किससे अपने दिल की बात करू की मुझे सेक्स करने का मन कर रहा है.

मैं हमेशा जीजू से बात करती थी और हम लोग अपने लिमिट मे ही बात करते थे. जीजू कभी कभी मुझसे डबल मीनिंग मे बात करते थे तो मैं उतना ध्यान नही देती थी लेकिन अब मैं भी अपने जीजू से थोड़ा नॉटी बातें करने लगी.

हम दोनो लोग एक दूसरे के करीब आने लगे. मुझे सेक्स की इतनी आदत हो गयी थी की मैं अपने जीजू को पसंद करने लगी. मेरे जीजू तो मुझे बहुत पहले से ही पसंद करते थे.

मेरी भी मजबूरी थी और मुझे अपनी चूत के लिए लंड चाहिए था और मुझे अपनी चूत की खुजली को शांत करना था.

जीजू और दीदी को हमारे यहा आए हुए बहुत दिन हो गये थे और कुछ दिन के बाद मम्मी ने जीजू और दीदी को घर बुलाया और दोनो लोग घर आए.

मैं और जीजू हम दोनो लोग बहुत बात करते थे एक दूसरे से तो हम लोग एक दूसरे से मिल कर बहुत खुश हुए. मैं किचन मे गयी और सबके लिए खाना बनाई और उसके बाद सब लोग एक दूसरे से बातें करने लगे.

जीजू और मैं हम दोनो लोग अकेले मे एक दूसरे से बात कर रहे थे और जीजू मुझे थोड़ा सिड्यूस करने की कोशिश कर रहे थे.

जीजू मुझसे बात करते करते अपना हाथ मेरी कमर पर रख रहे थे. हम दोनो लोग एक दूसरे को देख कर स्माइल कर रहे थे और एक दूसरे से बात कर रहे थे.

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हम दोनो लोग बहुत दिन के बाद एक दूसरे से मिले थे इसलिए हम दोनो लोग बहुत देर तक बात किए. जीजू और मैं हम दोनो लोग बात कर रहे थे.

तो दीदी मुझे बुलाई और दीदी मुझसे बात करने लगी और मेरे बारे मे पूछने लगी और जीजू गेस्ट रूम मे आराम करने चले गये.

दीदी मुझसे कुछ देर बात करने के बाद मम्मी के साथ बात करने लगी. जीजू मुझसे इशारे से गेस्ट रूम मे बुलाए और मैं जीजू से मिलने गेस्ट रूम मे गयी. जीजू ने मुझे अपनी बाहों मे ले लिए और मुझे किस करने लगे.

मैं जीजू को मना करने लगी लेकिन जीजू बोलने लगे की मुझे पता है की तुम भी मुझसे पसंद करती हो तो क्यू मेरा साथ नही दे रही हो.

मैं जीजू को बोली की ये सब ग़लत है जीजू दीदी को पता चल जाएगा. तो जीजू बोले की तुम्हारी जीजी को बताएगा कौन की तुम्हारी दीदी को पता चलेगा और उसके बाद हम दोनो लोग एक दूसरे को किस करने लगे.

मेरे जीजू ने मेरी टॉप निकाल दिए और मैं ब्रा मे थी जीजू मेरी ब्रा निकाल दिए और मेरी चुचि को चूसने लगे. उन्होने मेरी निपल्स को अपने हाथ मे लेकर मसलने लगे और मैं भी गरम होने लगी.

जीजू मेरे नेक को किस कर रहे थे और उसके बाद उन्होने मेरी जीन्स निकाल दिए और मैं पेंटी मे थी. उन्होने मेरी पेंटी निकाल दी और मेरी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगे.

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