जीजा दीदी चुदाई देखकर मचल गई चूत

कभी कभी तो दीदी लंड को बाहर निकाल देती थी और तेजी से हाँफने लगती थी. मगर जीजा जी फिर से उनके सिर को पकड़ कर अपने लंड को उनके मुंह में डाल देते थे. जब दीदी की सांस फूलने लगी तो उन्होंने उनके मूसल लंड को अपने हाथ में पकड़ कर हिलाना शुरू कर दिया.

जीजा ने फिर से अपने लंड को दीदी के मुंह में डालने की कोशिश की मगर दीदी ने ये कहते हुए मना कर दिया कि उनका मुंह अब दुखने लगा है. उसके बाद जीजा ने भी अपनी जीभ को दीदी की चूत से बाहर निकाल लिय़ा और दीदी को घोड़ी की पोजीशन में झुका लिया.

घोड़ी की स्थिति में झुकाने के बाद जीजा ने अपना लंड एक ही झटके में दीदी की चूत में घुसा दिया. दीदी इस जोर के प्रहार से बिलबिला उठीं और बोली- आज आपको क्या हो गया है?
परंतु जीजा जी ने कुछ सुना ही नहीं और पूरी ताकत से झटके मारने लगे. कुछ देर बाद दीदी भी सेक्स के रंग में रंगने लग गई और जीजा के मोटे लंड से चुदाई का मजा लेते हुए आह … आह … की आवाज करने लगी.

कुछ देर इस पोज़ में चोदने के बाद जीजा जी ने आसन बदला और दीदी को खड़ी कर दिया. उन्होंने दीदी का एक पैर ऊपर की ओर करके उठा लिया तथा फिर एक बार जोर लगाते हुए पूरा का पूरा लंड दीदी की चूत में घुसा दिया.
दोनों की सेक्स की ट्रेन फिर से शुरू हो गई. आज जीजा जी शायद सेक्स करने में पगला गये थे इसीलिए वो आज बुरी तरह दीदी को ठोक रहे थे. मेरे शरीर में भी अब कुछ-कुछ होने लगा था. जब मैंने अपनी पैंटी पर हाथ लगा कर देखा तो मेरी पैंटी भी गीली हो चुकी थी.

कुछ देर की इस चूतफाड़ चुदाई के बाद दीदी का पानी निकल गया था और दीदी की दोनों टांगें पानी से चिकनी होने लगीं. दीदी ने जीजा जी से उनकी चुदाई रोकने के लिए कहा लेकिन वह रुक ही नहीं रहे थे. जीजू दीदी की चूत में अपना लंड पेलते रहे. जब तक उनका वीर्य उनके लंड से निकल न गया उन्होंने अपने मोटे लंड से दीदी की चूत की जोरदार ठुकाई जारी रखी. वीर्य को उनकी चूत में खाली करने के बाद जीजा जी कुछ देर के लिए शांत हो गये.

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मैंने सोचा कि उन दोनों का सेक्स खत्म हो गया है लेकिन मैं गलत सोच रही थी. जब मैं अपने कमरे में अंदर जाने ही वाली थी तो जीजा ने मेरी दीदी को फिर से पकड़ लिया. उन्होंने दीदी के चूचों के बीच में ले जाकर अपने लंड को रगड़ना शुरू कर दिया. दीदी वैसे तो थकी हुई थी लेकिन चूचों पर लंड की रगड़ से शायद उनको भी मजा आना शुरू हो गया था इसलिए वो भी अपने दोनों चूचों के बीच जीजा के लंड को भींचने लगी थी.
जब जीजा जी का लंड पूरी तरह से तन कर बिल्कुल किसी रॉड की तरह टाइट हो गया तो एक बार फिर से जीजा जी ने दीदी को घोड़ी बना दिया.

बाहर खड़ी हुई मैं भी सब देख रही थी. मैं भी हैरान हो रही थी कि जीजा को आज हो क्या गया है. इतने बड़े चोदू हैं मेरे जीजा? जब उन्होंने मेरे साथ सेक्स किया था तो मैंने उनका ऐसा रूप नहीं देखा था. हाँ उनके सेक्स में जोर बहुत था मगर जबरदस्ती नहीं थी. मगर अपनी ही बीवी को जीजा जी इस तरह से पागलों की तरह चोदने पर उतारू हो रहे हैं ये सब देख कर मैं हैरान हो रही थी.
उन्होंने दीदी के कूल्हों को पकड़ लिया और दीदी की चूत में लंड को न डालकर दीदी की गांड के छेद पर सेट कर दिया. अगले ही पल जोर का धक्का देते हुए उन्होंने दीदी की गांड में लंड को पूरा का पूरा उतार दिया.

जीजा जी के इस प्रहार को दीदी बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी लेकिन मेरे चोदू जीजा ने मेरी दीदी के कूल्हों को अपने हाथों में पकड़ रखा था. उनके लंड को दीदी ने अपनी गांड में समा कर सेट करके एडजस्ट करने की पूरी कोशिश की लेकिन उससे पहले ही जीजा के धक्के दीदी की गांड में लगने शुरू हो गये.

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अपने लंड से वह मेरी दीदी की छोटी सी गांड की चुदाई करने लगे और मेरी दीदी की चीखें निकलने लगीं. मगर उनकी आवाज इतनी ज्यादा तेज नहीं थी कि बाहर आकर बच्चों के कानों तक पहुंच पाये. बच्चे इस वक्त गहरी नींद में सो रहे थे. दीदी अपने पति से अपनी गांड को चुदवाते हुए नॉर्मल होने की कोशिश कर रही थी मगर जीजा के धक्के बहुत ही तेज थे. मुझे दीदी की हालत पर तरस आ रहा था. बीच-बीच में जीजा जी दरवाजे की तरफ भी देख रहे थे.

वो देख रहे थे कि मैं भी उनकी बीवी की गांड चुदाई को देख रही हूँ. असल में अपने जीजा के इस जोशीले सेक्स से मैं भी बहुत ज्यादा गर्म हो गई थी. मेरा मन कर रहा था कि अपनी चूत को अभी जीजा के सामने ले जाकर फैला दूँ और वो अपने मोटे लंड से मेरी चूत की सवारी करें. मगर अभी तो जीजा का लंड मेरी दीदी की गांड की सवारी कर रहा था.
कुछ देर के बाद दीदी को भी गांड चुदाई में मजा आने लगा. वो अब मेरे जीजा का पूरा साथ दे रही थी. लगभग बीस मिनट की चुदाई के बाद जीजा ने मेरी दीदी की गांड में धक्के लगाते हुए अपनी स्पीड धीमी करनी शुरू कर दी. मैं जान गई कि उनका वीर्य दीदी की गांड में पिचकारी के रूप में भरने लगा है.

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