दीप्ती भाभी ने डिनर पर बुला के लंड लिया

मैंने कहा: नहीं भाभी आप आराम से लेटो, नो टेंशन!

और फिर ये कह के मैंने अपने हाथ से भाभी के बाल खोले और उनके साथ खेलना चालू कर दिया. दीप्ती भाभी: सच में तुम्हारे साथ में बड़ा अच्छा लग रहा हैं.

मैं: आप भी बड़ी क्यूट हो भाभी और सच कहूँ तो संदीप बड़ा लकी हैं.

ऐसे बाते चालु ही थी की मेरा ध्यान भाभी के पल्लू पर गया जो निचे गिरा हुआ था. भाभी की आँखे बंद थी और उसके बूब्स जैसे बहार आने के लिए बेताब लग रहे थे. उसके गोरे दूध से भरे हुए सेक्सी बूब्स एकदम भरे हुए थे.

और उसके ऐसे रूप को देख के मेरे लंड से प्रिकम निकलना चालू हो गया था. मैं पल्लू की खाई को ही देख रहा था और दीप्ती ने अपने पल्लू को ऊपर कर के सही कर लिया. भाभी ने मुझे देखा तो मेरी निगाहें वही पर थी. मेरे लंड के अंदर जैसे सैलाब सा आ गया था. और दीप्ती भाभी के ऊपर भी मस्ती सही तरह से चढ़ी हुई थी.

मैंने कहा, पल्लू को निचे रहने दो ना!

वो बोली: मुझे पता हैं की तुम कहा देख रहे हो.

मैंने कहा, मुझे लगा की पल्लू निचे ऐसे ही गिर गया था गलती से.

वो मस्ती से बोली: नहीं मैंने जानबूझ के निचे कर दिया था. ताकि तुम उन्हें देख सको. क्या तुम्हे मेरे बड़े बूब्स अच्छे लगे?

मैंने कहा: हां.

वो बोली: आज मौका वैसे एकदम सही हैं. हम दोनों यहाँ हैं और संदीप काम पर. अगर तुम चाहो तो हम दोनों अपने बदन की आग को शांत कर सकते हैं.

बस इतना सुनते ही मैंने अपने हाथ को भाभी के चूचो के ऊपर रख दिया. वो टच करने पर एकदम सॉफ्ट सॉफ्ट से थे.

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दीप्ती भाभी के मुहं से आह निकल पड़ी और वो मेरे हाथ के ऊपर अपने हाथ को दबा के बोली, अह्ह्ह दबाते रहो इन्हें और जोर जोर से, जरा भी स्टॉप मत करना प्लीज़. आज तुम मुझे इतना प्यार करो की मैं तुम्हारी ही हो के रह जाऊं; अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह. और फिर दीप्ती भाभी ने अपने ब्लाउज के बटन को खोल के अपने दोनों बूब्स को मेरे लिए बहार निकाल दिया.

अंदर भाभी ने पेड़वाली ब्रा पहनी थी. लेकिन पेड़ के हटने पर भी वो बूब्स की मोटाई कतई कम नहीं हुई थी. दीप्ती भाभी के ह्यूज टिट्स को देख के मेरे अन्दर की वासना और भी भड़क गई. अब मैं एकदम जोर से भाभी के मम्मो को दबाने लगा और उन्हें मुहं में ले के चूसने भी लगा. दीप्ती भाभी के मुहं से अह्ह्ह अह्ह्ह ओह ओह निकल रहा था. वो बोली: आई लव यु प्रवीन! अह्ह्ह अह्ह्ह सक माय टिट्स आह्ह्ह आह्ह्ह्ह!

मैंने दीप्ती भाभी को उठा लिया अपनी गोद के अन्दर और उसे अन्दर ले गायक. और फिर मैंने उसके बदन के ऊपर से पेंटी के सिवा सब कपडे खोल दिए. भाभी की पेंटी ब्लेक रंग की थी और मैंने उसके अन्दर अपने एक हाथ को डाल के उसकी गर्मी चेक की. और पेंटी को ऊँगली से टटोलते हुए मैंने दीप्ती भाभी के बूब्स को चुसे. मैंने देखा की भाभी की चूत एकदम गीली हो चुकी थी.

दीप्ती भाभी बोली: प्लीज़ प्रवीन और मत परेशान करो मेरे को. जल्दी से अपना लंड मेरे अन्दर डाल के फक कर दो मुझे.

और फिर भाभी ने अपने हाथ से मेरे लोडे को बहार कर दिया. मेरे बड़े लोडे को देख के निचे झुकी और मुहं को खोल के उसे अंदर भर लिया. वो बड़े ही सेक्सी ढंग से मेरे लंड को चूसने लगी थी. और उसके ऐसा करने से मेरे लंड में और भी जान आ गई थी. लंड और बड़ा हो चूका था. अब मैंने भाभी को बेड में पूरा लम्बा लिटा दिया. और फिर मैंने उसकी फांको को खोल के चूत को चाटना चालू कर दिया. वो भी एकदम जोश में आ गई थी और उसकी पुसी से बहुत सब पानी निकल रहा था.

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दीप्ती भाभी ने अपनी चूत को ऊपर उठा के कहा, जोर से चाटो मेरे राजा और जोर से मजा आ रहा हैं मेरी जान!

मैं भी भाभी के साथ के इस एक एक लम्हे को पूरा एन्जॉय कर रहा था.

और फिर दीप्ती भाभी ने कहा, अब जल्दी से करो रुकना मत, अपने लंड को मेरी बुर में पेल दो मेरे राजा!

मैंने अपने लंड को सीधे भाभी की चूत में डाला और उसे चोदने लगा. वो मेरे से लिपट गई थी और अह्ह्ह अह्ह्ह कर के गांड को उठा उठा के चुदने लगी थी. हम दोनों ने एक दुसरे को जोश से पकडे रखा और पुरे 20 मिनिट तक मस्त सेक्स किया. और फिर हम दोनों शांत हो चुके थे.

संदीप का पुरे एक घंटे के बाद कॉल आया तब भाभी घोड़ी बन के मेरा लंड ले रही थी. संदीप ने कहा की मुझे आने में दो जितना हो जाएगा. दीप्ती भाभी ने फोन रख के कहा, 2 बजे तक टाइम हैं मुझे चोदने का मेरे राजा.

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