हिंदी सेक्स स्टोरी पढ़वा कर लड़की पटाई

कुछ देर के बाद मैंने उसके हाथ में पेपर देखकर कहा- ये क्या है?
पहले तो वो उसे छुपाने लगी. फिर मैंने उसके हाथ से पेपर्स ले लिए और खोलकर देखे. फिर उसकी तरफ देखा, तो वो डर से चुपचाप बैठकर मूवी देखने लगी थी.
मैंने उससे कहा कि तुमको ऐसी स्टोरी अच्छी लगती हैं?
उसने कुछ नहीं कहा.

मैंने कहा कि तुम अभी छोटी हो, तुमको ये सब नहीं पढ़ना चाहिए.
वो बोली कि मैं इतनी छोटी भी नहीं हूँ, मैं सब समझती हूँ. तुमने ही तो मुझे ये सब पढ़ने को दिया है.
तब मैंने कहा- अगर सब जानती समझती हो तो बताओ जब ये स्टोरी पढ़ती हो तो कैसा लगता है?
वो हंस कर बोली- अच्छा लगता है.
तब मैंने आंख दबा कर कहा कि बस अच्छा.. और कुछ नहीं?
वो होंठ काटते हुए बोली- नहीं और कुछ नहीं.

फिर मैंने कहा- रियल में महसूस करना पसंद करोगी?
वो सर झुका कर बोली- नहीं, मुझे डर लगता है.
मैंने कहा- अगर डरोगी तो कभी इसके मज़े नहीं ले पाओगी और फिर मैं तुम्हारे साथ हूँ, मैं कुछ गलत नहीं होने दूँगा.
वो मेरी तरफ देख कर बोली- ठीक है, लेकिन कैसे करना है?
मैंने उससे पूछा- ये बताओ तुम्हारी माँ कब तक आएँगी?
तो वो चहक कर बोली कि वो बाजार गयी हैं, शायद 2 घंटे के बाद आएंगी.

ये सुनकर मैंने दरवाजा बंद किया और उसको बेड पर बैठने को कहा.

इस वक्त उसने टी-शर्ट और जीन्स पहनी थी, तो पहले तो मैंने उससे कहा कि अपनी टी-शर्ट उतार दो.
वो बोली- नहीं मुझे शर्म आती है.

फिर मैंने ही चुदाई का खेल शुरू किया और पहले उसको अपनी तरफ खींच कर उसके होंठों पर किस किया.. वो एकदम से गनगना गई. उसे भी मजा आने लगा. हम दोनों करीब 10 मिनट तक किस करते रहे.
फिर मैंने अपना एक हाथ उसके मम्मों पर रख दिया और दबाने लगा. उसे कुछ-कुछ मज़ा आने लगा था.

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तभी मैंने झटके से उसकी टी-शर्ट उतार दी और देखा कि उसके चूचे अभी छोटे-छोटे थे और उसके पिंक कलर के निप्पल खड़े हो गए थे. मैं उसके एक मम्मों को मुँह में लेकर चूसने लगा. इससे शायद उसे और मज़ा आने लगा था.
वो बिस्तर पर लेट गयी और मैं उसके मम्मों को एक एक करके सक करने लगा. साथ ही धीरे से उसकी जीन्स का बटन खोल दिया और अपना एक हाथ उसकी पेंटी के ऊपर से ही उसकी जीन्स के अन्दर डाल दिया और चूत को रब करने लगा था.

वो बहुत ज्यादा गर्म हो गयी थी और मचल रही थी. मैंने उसकी जीन्स उतार दी. अब वो मेरे सामने पेंटी में थी और उसकी आँखों में नशा भर गया था. उसे देख कर ऐसा लग रहा था, जैसे उसने काफ़ी शराब पी रखी हो.

मैंने उसकी पेंटी भी उतार दी, उसकी चूत बहुत छोटी थी और चूत के ब्राउन कलर के बाल बहुत कम ही आए थे, लेकिन उसकी चूत बिल्कुल पिंक थी.

फिर मैंने अपना एक हाथ जब उसकी चूत पर रखा तो वो जैसे पागल सी हो गयी. मैं उसकी चूत के दाने को अपनी उंगली से रगड़ने लगा तो वो मचल उठी और अपने हाथों से अपने बूब्स दबाने लगी.

तभी मैंने उसकी चूत पर अपनी जीभ रख दी और उसकी चूत के पिंक होंठों को किस करने लगा, तो वो तो जैसे पागल ही हो गयी थी. उसकी आँखें बंद थीं और अब वो अपने मुँह से आवाजें निकाल रही थी.

इस समय उसके दिल की धड़कन काफ़ी तेज हो गयी थी. फिर मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत के अन्दर डाली तो वो तड़प गयी. तभी मुझे बाहर एक कार रुकने की आवाज आई तो मैंने खिड़की से देखा कि कौन है? बाहर उसकी माँ वापस आ गयी थीं, लेकिन वो इन बातों से बेखबर बेड पर लेटी मछली की तरह तड़प रही थी.

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फिर मैंने उसके कान में कहा- तुम्हारी माँ आ गयी हैं.
वो बोली- प्लीज आप जल्दी से मुझे डिसचार्ज कर दो, अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है.

तब मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत में डालकर उसकी चुदाई स्टार्ट की और उसके होंठों को चूसने लगा, तो कुछ ही देर में वो डिसचार्ज हो गयी.

फिर उसने झट से अपने कपड़े पहने और जाते वक़्त मुझे किस किया और बोली कि आज तक मैं इस खूबसूरत मजे को नहीं जान पाई थी कि कैसा होता है? आज आपने मुझे बहुत कुछ सिखा दिया, लेकिन आप ऐसे ही रह गए, मैं जल्द ही ये प्रोग्राम फिर से बनाती हूँ.

अब कब उसने मेरे लंड को शांत किया ये मैं आपको जल्द ही उसकी चुदाई की कहानी लिखता हूँ.
मुझसे बात करने के लिए मेल करें.

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