Hindi Porn Kahani हरामी बलमा

मेरे कमरे का बल्ब मैने फ्यूज़ कर दिया था. कमरे में एक सुगंधित सेंट च्चिड़का दिया और कुरती के उप्पेर वाले दो बटन खोल दिए. मेरे हुस्न का जादू चलाने में कोई कसर बाकी ना थी. मेरा हाथ ज़बरदस्ती मेरी चूत पर जा कर उसको बे-रहमी से मसल्ने लगा. दरवाज़े पर दस्तक हुई. मैने झट से जा कर दरवाज़ा खोला. सामने राजा खड़ा था. मेरा दिल धक धक करने लगा. मैने उस्स्को अंदर बुला कर दरवाज़ा बंद कर दिया. ” बल्ब कहाँ है?” मैने उसस्का हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और बोली, ” अंदर कमरे में.”

छत बहुत उँची थी और हाथ पहुँचना मुश्किल था. ” नंदिनी, ऐसा करो, तुम टेबल पकड़ कर रखो और मैं उप्पेर चढ़ता हूँ, ठीक है,” मुझे शरारत सूझी और मैं बोली,” उप्पेर तो मर्द ही चढ़ते हैं, और क्या मैं चढ़ूंगी? राजा भैया, और जो मर्ज़ी पकड़ा दो, टेबल नहीं पकड़ सकती, मुझ से नहीं संभाल सकता. ऐसा ना हो कि आप गिर जाएँ.” मेरी दोहरी मतलब वाली भाषा समझ कर राजा हंस पड़ा और नट खाट अंदाज़ में बोला,” ऐसी बात नहीं है नंदिनी, अगर तुम चाहो तो तुम भी उप्पेर चढ़ सकती हो, मैं तुझे नीचे से थाम लूँगा, अगर मेरी ताक़त पर विश्वास हो तो”

कमरे में धीमी रोशनी थी. राजा ने टेबल रखा और मुझे उप्पेर चढ़ने को कहा. जब मैं ना नुकर करने लगी तो उसने मुझे बाहों में उठा कर टेबल पर खड़ा कर दिया. उसका शरीर जब मेरे शरीर से स्पर्श किया तो मेरी चूत रो पड़ी. उसके बदन का स्पर्श मुझे करेंट मार रहा था. उसस्के हाथों ने मुझे चूतड़ से पकड़ कर उप्पेर उठाया तो मेरा बदन पसीना पसीना हो गया. टेबल के नीचे खड़ा राजा मेरी जवानी को निहार रहा था. उसने मुझे बल्ब पकड़ाते हुए कहा, “इसको होल्डर में घुसा दो, नंदिनी,” मैने कभी बल्ब नहीं लगाया था. “मुझ से नहीं होता” मैने कहा.” ठहरो मैं भी उप्पेर आता हूँ.”

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टेबल छ्होटा था और हम दोनो एक साथ सॅट कर खड़े थे. मैं गिरने के डर से राजा के साथ चिपक कर खड़ी हुई थी. उसने मेरे कंधे पर हाथ रखा हुआ था और बल्ब लगा रहा था. मेरा संतुलन बिगड़ने लगा तो मैने राजा को थाम लिया और अफ़रा तफ़री में मेरा हाथ उसके लंड से जा टकराया. राजा गन्गना उठा. लंड लोहे की तरह तना हुआ था,” उई, यह क्या है, राजा भैया? मुझे बहुत डर लग रहा है. मुझे संभाल लो प्लीज़!” उसने मुझे अपने सीने से लगा लिया. मेरी साँस तेज़ी से चलने लगी, उसका हाथ मेरी कमर के गिर्द कस गया. मेरी चुचि उसकी बलिश्त छाती में धँस गयी. उसका लंड मेरे पेट से टकराने लगा. मैं और भी उतेज़ित होती हुई उसके आलिंगन में घुसती चली गयी.

राजा ने मेरे चेहरे को हाथों में लेकर मुझे होंठों पर किस कर लिया. मेरे आनंद की कोई सीमा ना रही. बल्ब लग चुका था और मेरे अंदर वासना का बल्ब भी जगमगाने लगा.” तुम बहुत सुंदर और सेक्सी हो नंदिनी. मैं तुझ से प्यार करता हूँ. क्या तुम भी मुझे प्यार करती हो?” मैने उसस्के लंड को हाथ से स्पर्श करते हुए कहा,’ हन राजा भैया, मैं भी तुझे बे हद प्यार करती हूँ.” वो झल्ला कर बोला,” तो बार बार मुझे भैया क्यो कह रही हो? मैं तेरा आशिक़ हूँ भैया नहीं. मेरा जो…तुमने पकड़ा हुआ है, उस से भी नहीं पता चला” मैं मुस्कुराते हुए बोली,” राजा, भाई बेहन के रिश्ते की दीवार के पीच्छे ही हम सारा खेल खेल सकते हैं. अगर एसा नहीं किया तो सारे मोहल्ले ,में बदनाम हो जाएँगे. तुम मुझे सब के सामने दीदी कहा करो और मैं तुझे भैया, क़िस्सी को शक भी नहीं होगा”

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“ओके, इसका मतलब है, बाहर बेहन भाई, अंदर करें चुदाई. ठीक है नंदिनी बहना अब नीचे जा कर असली काम करें. और अधिक देरी कर दी तो तेरे हाथ में ही लंड महाराज उल्टी कर देंगे.” मैने उसस्का लंड छ्चोड़ दिया और हम दोनो नीचे उत्तर गये. नीचे उत्तरते ही राजा मुझ पर टूट पड़ा. वो ज़ोर ज़ोर से मेरी चूचियाँ मसल्ने लगा. मेरे चुचक में आग लग रही थी. मैने भी हाथ नीचे कर के उसका लंड मसल दिया. “हाई राजा, ये क्या कर रहे हो, मेरा बदन जलने लगा है, मुझे शांत कर दो राजा,” मेरे मूह से निकल गया और राजा बिना कुच्छ बोले मेरी कुरती उतारने लगा. मेरी चुचि कड़ी हो चुकी थी. मेरी नंगी चुचिओ से खेलने लगा मेरा नया यार. मैने अपनी जांघों को भींच लिया था क्यो कि मेरी चूत से रस टपकने लगा था. राजा ने अपने गरम होंठ मेरे निपल्स पर रख दिए और अपना हाथ निकर के उप्पेर से मेरी चूत पर रख कर मसल दिया.

मेरी चूत फूल चुकी थी और मैं गरम हो कर उसस्के हाथ पर अपनी चूत को रगड़ रही थी. वासना ने मुझे बेकाबू कर दिया था और मैने राजा के पॅंट्स की ज़िप खोल कर उसस्के लंड बाहर निकाल लिया. मैने उसको उप्पेर नीचे करना शुरू कर दिया. लंड के छेद से रस की बूँद मेरी उंगलिओ पर गिर पड़ी. दूसरे हाथ से मैने राजा के अंडकोष पकड़ लिए. काले काले बालों में छुपे हुए अखरोट बहुत सेक्सी लग रहे थे, राजा मेरी चुचि दबा रहा था और निपल्स को चाट रहा था.” नंदिनी, अपनी निक्केर भी उतार दो और मैं भी नंगा हो जाता हूँ, फिर मज़ा आएगा” मैने उसके लंड को मुठियाते हुए कहा,”राजा, मेरी कुरती उतारते वक्त मुझ से पुचछा था क्या? अब निक्केर भी उतार दो, रोका किस ने है, भैया?”

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