गर्लफ्रेंड की सहेली की प्यास बुझाई

थोड़ी बहुत बातें करने के बाद उन्होंने फोन काट दिया और बोलीं- अब तू यहीं रहेगा। मम्मी को लेकर नहीं आया इसलिये तुझे ये सज़ा मिलेगी।
इस पर सभी हँस दिए।
मैंने कहा- नहीं आंटी, दरअसल यहाँ कोई काम नहीं था तो मुझे थोड़ी ऊब भी हो रही थी।

आंटी- अच्छा तो तुझे काम करना है।
आंटी- देखिये भाभी, मैं बोल रही थी ना, कितना अच्छा लड़का है।
ऐसा वो अपनी जेठानी से बोल रही थीं।

उधर काजल अपना मुंह दबा कर हंस रही थी।

उनकी जेठानी ने कहा- राहुल बेटा अगर तुम्हें कोई दिक्कत ना हो तो मेरा एक काम कर दो।
मैं- बोलिये आंटी।
वो- बेटा मैं नहीं चाहती कि बाद में कोई दिक्कत हो, तो क्या तुम बाज़ार मेहमानों के लिए कुछ और मिठाइयां पैक करवा सकते हो? सबको गिफ़्ट में पैक करा लेना।
यह बोलकर उन्होंने मुझे सब समझाया और दस हज़ार रुपये दे दिये।

जब मैं निकलने लगा तो पीछे से काजल की मम्मी बोलीं- बेटा काजल को भी साथ ले लो, ये भी कब से ऊब गई होगी।
मैं कुछ नहीं बोला, मगर अब काजल भी मेरे साथ आ रही थी।

होटल के नीचे आते ही उसने मुझे एक जोरदार किस किया।
मैंने उसे रोका और कहा- क्या कर रही हो, कोई देख लेगा तो।
काजल- अब इतना इंतज़ार करवाया तो बदले में कुछ देना भी तो था।
मैं हंस पड़ा।

वो मेरे पीछे बाइक पर बैठ गई; वो बिल्कुल चिपक कर बैठी थी; उसके चूचे मेरी पीठ पर रगड़ रहे थे और मुझे मज़ा आ रहा था।

थोड़ी देर में मैंने 25 किलो मिठाई पैक करवाई और होटल भिजवा दी। हम भी आ गए और सब कार्यक्रम चलने लगा।

मैंने काजल से धीरे से कहा- मेरा भी तो कुछ होना चाहिये।
उसने कहा- रुको मैं देखती हूँ।

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थोड़ी देर बाद काजल आई तो वो काफ़ी खुश लग रही थी, बोली- चलो।
मैंने कहा- कहाँ?
काजल- मेरे घर।
मैं- ऐसा क्या बोल दिया कि काम हो गया?
काजल- मैंने बोला मम्मी से कि मेरी पीठ में दर्द है, घर जाना चाहती हूँ पर कोई जाने वाला नहीं है। तो उन्होंने कहा राहुल के साथ चली जाओ।

हम दोनों अब चल दिये लेकिन बाहर आने से पहले ही जया मिल गई, उसने पूछा- कहाँ जा रहे हो तुम दोनों?
काजल- घर जा रहे हैं मेरी पीठ में दर्द है।
जया- अरे मुझे भी ले चलो ना, वैसे भी यहां सिर्फ पक रही हूँ मैं।
काजल- अरे एक बाइक पर तीन कैसे आएंगे?
जया- अरे हो जाएगा चलो तो!

हम दोनों को गुस्सा तो बहुत आ रहा था लेकिन मना भी नहीं कर सकते थे, अगर काजल की मम्मी को पता चलता तो मुसीबत हो जाती।

अब हम तीनों चले, जया बीच में बैठी थी, वो अपनी चुचियाँ रगड़े जा रही थी, इधर मेरा खड़ा हो रखा था।

खैर हम घर पहुंच गए। जया मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी और काजल पास में थी तो मैं चुप था।
सब अंदर गए तो काजल ने जया से सीधे बोला- देख जया, तू मेरी सबसे अच्छी दोस्त है ना, तो जानती ही होगी कि हम दोनों यहां सेक्स करने आए हैं।
तो जया हंसने लगी।

“अब कवाब में हड्डी मत बन और दूसरे कमरे में जा।”
जया ने मुस्कुरा कर मुझे एक आंख मारी और चली गयी।

हम खुश हुए और एक दूसरे को चूमना शुरू कर दिया। हम कुछ देर तक स्मूच करते रहे, और फिर धीरे धीरे हम दोनों के कपड़े शरीर से अलग हो गए। मैं काजल को गर्दन और सीने पर चूम रहा था। वो भी मुझे पागलों की तरह चूमे जा रही थी।

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धीरे धीरे मैं नीचे बढ़ता रहा, अब मैंने काजल की नाभि, पेट को चूमना शुरू किया, अगले ही पल मैं नीचे उसकी चूत पर पहुंच चुका था। जैसे ही मैंने अपनी जीभ लगाई, उसकी ज़ोरदार सिसकारियां शुरू हो गईं।

थोड़ी देर मैं चूमता रहा, और पीछे से उसके चूतड़ों को अपने हाथों से रुई की गेंद की तरह दबाता रहा। देखते ही देखते उसने पानी छोड़ दिया।

अब हम दोनों खड़े हुए, एक दूसरे की आंखों में देखा, फ़िर मुस्कुराने लगे।
अब हम दोनों बिस्तर पर आ गए।

मैंने कहा- तुम दुनिया में सबसे खूबसूरत हो काजल!
काजल- तुम अपने इसी तरीके के लिए तो मुझे पसंद हो।

इस बार वो नीचे आई और अपने हाथ से मेरे लण्ड को आगे पीछे करना शुरू करने वाली थी, कि तभी वहां जया आ गई, और इस बार उसके बदन पर कपड़े नहीं थे। मैं समझ गया कि इसकी जवानी की प्यास भड़की हुई है.

उसका बदन क्या बताऊँ, बिल्कुल साफ, झांटों का तो नाम भी नहीं था। उसकी चूचियाँ बड़ी बड़ी और कसी हुई थीं और गांड काजल से भी बड़ी थी।

हम दोनों ही आश्चर्य से उसे देख रहे थे कि तभी काजल रोने लग गई। मैंने तुरंत उसे बांहों में भर लिया और उससे रोने का कारण पूछा तो उसने कहा- जया, तू तो मेरी सबसे अच्छी दोस्त है, और तू ही राहुल को मुझसे छीन लेगी।

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