गर्लफ्रेंड ने चूत चुदाई के लिए घर बुलाया

मैं उसको प्यार से देखने लगा, तो वो मुस्कुरा कर बोली- अन्दर तो आ जाओ, बाद में देख लेना … अभी पूरी रात बाकी है.
उसने इतना कहकर दरवाज़ा बन्द कर दिया. मैंने उसकी तरफ बांहें पसार दीं. वो कटे हुए पेड़ की तरह मेरी बांहों में समा गई.

हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे क्योंकि हम दोनों ही प्यासे थे. दस मिनट किस करने के बाद मैं उसकी गर्दन को चूमने लगा और टॉप के ऊपर से ही उसके चुचे दबाने लगा.
वो सीत्कार करने लगी- आह आह उससस्स ऊम्म्मह!

उसकी मादक सिसकारियां हॉल में गूंजने लगीं. मैं उसको गोद में उठा कर बेडरूम में ले गया. वहां जाते ही मैंने उसको बेड पर लुड़का दिया. साथ ही मैं खुद उसके ऊपर चढ़ गया और उसको चूमने चूसने लगा. उसके पूरे शरीर को सहलाने लगा. मेरा लंड जिया की चूत फाड़ने के लिए रेडी था.

मैंने उसको इशारा किया, तो उसने मेरे कपड़े निकाल दिए. मैंने भी उसके कपड़े निकाल दिए. अब वो सफेद ब्रा और काली पेंटी में रह गई थी. जबकि मैं एकदम मादरजात नंगा खड़ा अपना लंड हिला रहा था.

वो मेरे खड़े लंड को देख कर एक पल के लिए घबरा सी गई. उसके मुँह से कुछ निकल ही नहीं रहा था.
मैंने उससे पूछा- क्या हुआ?
वो मरी सी आवाज में बोली- तुम्हारा ये बहुत बड़ा और मोटा है.
मैंने कहा- हां ये तो तुम्हारा नसीब है कि तुमको बड़ा और मोटा मिला. वरना कुछ तो बड़ी बदनसीब होती हैं … उनको तो जरा जरा से चूहे मिलते हैं.

ये सुनकर उसको अच्छा लगा और वो मेरे लंड को बड़ी लालसा से देखने लगी. मैं उसके करीब आकर लंड को उसके मुँह के सामने हिलाने लगा.

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उसने मेरी आंखों में देखा, तो मैंने उसे लंड पकड़ने का इशारा किया. उसने मेरे लंड को हाथ से पकड़ा और छोड़ दिया.
वो बोली- इसको तो बुखार चढ़ गया है.
मैंने हंस कर पूछा- कैसे मालूम हुआ … क्या तुम लंड की डॉक्टर हो?

वो मेरे मुँह से लंड शब्द सुनकर शर्मा गई और फिर से लंड पकड़ कर बोली- इसमें डॉक्टर वाली क्या बात है, ये गर्म है … इसलिए मैंने कहा कि इसको बुखार चढ़ा है.
मैंने अपने लंड पर उसके हाथ का कोमल स्पर्श महसूस किया, तो मुझे बड़ा मजा आया और मेरा लंड भी हिनहिनाने लगा.

मैंने कहा- तुम इसका बुखार उतार दो.
वो लंड सहलाते हुए बोली- कैसे?
मैंने कहा- इसको ठंडा कर दो.

वो समझ तो गई थी, लेकिन मूड में थी इसलिए वो बोली- मैं इसे ठंडा कैसे करूं … क्या इस पर बर्फ घिस दूँ?
मैंने कहा- बर्फ से तो ये और भी गर्म हो जाएगा. इसको अपने शरीर की गर्मी से ठंडा करना पड़ेगा.
वो आंखें नचा कर बोली- शरीर से कैसे?
मैंने झुंझलाते हुए कहा- इसे मुँह में लो. हो सकता है कि तुम्हारे मुँह से ही ये कुछ ठंडा हो जाए.

ये सुनते ही उसने मेरे लंड को अपने मुँह में लिया और लंड चूसने लगी. मुझे लंड चुसाई में बहुत मज़ा आ रहा था. कुछ मिनट तक जिया का मुँह चोदने के बाद मैं उसके मुँह में ही झड़ गया. उसने मेरी सारी क्रीम खा ली थी और मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल कर मुझे मेरी मलाई का स्वाद चखाने लगी.

मैंने उसके कान में कहा- अब मेरी बारी है.

वो मुझे अलग होकर बिस्तर पर चित लेट गई. मैंने उसकी ब्रा और पेंटी निकाली और उसकी चूत को चाटने लगा. उसकी चूत पहले से ही गीली हो चुकी थी. चुत चटवा कर ज़िया बहुत ही ज़्यादा गर्म हो गई.

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जीभ से चुत चूसने के बाद मैंने उसकी चूत में पहले एक उंगली डाली, फिर दो डाल दीं और उंगली से ही उसकी चूत की चुदाई करने लगा. मैंने उंगलियों से कमसिन चूत को ढीला किया और उसके चुचे अपने मुँह में लेकर चूसता रहा. वो बड़ी मस्त आवाजें निकाल रही थी.

उसके दूध चूसते हुए मैं दांत से उसके निप्पल को काट लेता, तो वो ज़ोर से चीख पड़ती. घर में अकेले होने के कारण हम दोनों को कोई डर नहीं था. इसलिए हम दोनों खुल कर सेक्स के मज़े ले रहे थे.

जब ज़िया ज़्यादा गर्म हो गई, तो वो मुझसे बोली- राज़ अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है. अब तुम अपना लंड मेरे अन्दर डाल दो.

मैं उसको तड़पा रहा था, लेकिन जब ज़्यादा देर हो गई … तो फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और धक्का दे दिया.

ज़िया की चुत नई थी … वो अनचुदी थी, इसलिए उसकी चूत बहुत टाइट थी.

हम दोनों समझ गए कि बिना चिकनाई के काम नहीं बनेगा.

मैंने जिया से तेल या क्रीम लाने का कहा. ज़िया खुद रसोई से तेल लेकर आई और उसने मेरे लंड और अपनी चूत पर लगा दिया. उसको इस समय बड़ी चुदास चढ़ी थी, इसलिए उसने चुदाई की पोजीशन में लेटते हुए मुझे अपने ऊपर खींच लिया.

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