गांव की लड़की चोद डाली

मैंने पूछा- कमला तुम्हें मजा आ रहा है ना?
वो बोली- हां, मजा तो बहुत आ रहा है, पर बहुत डर भी लग रहा है. यहां हमें कोई देख लेगा तो आफत हो जाएगी.
मैं- बस थोड़ी देर और मजे लेने दो, फिर चलते हैं.

मैंने उसके चूचे जोर जोर से दबाए, होंठ चूमें और उसकी सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत पर हाथ फिराना शुरू किया.
वो आहें भरने लगी थी- आहहह आहहहह मत करो ना… अजीब सा लग रहा है.

मैंने उसका हाथ अपने पैंट के ऊपर से ही लंड पर रख दिया. पहले तो उसने हाथ हटा लिया, पर जब मैंने उसकी चूत सहलाई तो उसने भी थोड़ी देर बाद उसे पकड़ लिया और लंड सहलाने लगी. अब मैंने उसकी कमीज ऊपर उठानी शुरू की और उसकी ब्रा साईड में हटा के उसके निप्पल चूसने लगा. इसके साथ ही मैंने अपने हाथ को नीचे ले जाकर उसकी सलवार को नाड़ा खोलना चाहा. पहले तो उसने नाड़ा खोलने ही नहीं दिया, पर जब थोड़ी देर चुत रगड़ने के बाद जब उसकी चूत गीली होकर पानी छोड़ने लगी तो उसकी पकड़ भी ढीली होने लगी. मैंने उसकी सलवार और पेन्टी घुटनों तक नीचे कर दी और उसकी गीली चूत में हाथ चलाने लगा.

आज मैंने पहली बार किसी लड़की की चूत देखी थी. उसकी चूत बड़ी प्यारी लग रही थी. ब्लू फिल्में देखने के कारण मुझे पता था कि अब आगे क्या करना है. थोड़ी देर हाथ से उसकी चूत सहलाने के बाद मैंने अपनी जीभ उसकी चूत पर लगा दी और धीरे धीरे उसे चाटने लगा. कमला ने तो मजे के कारण अपनी आखें ही बंद कर लीं और जोर जोर से आहें भरने लगी. उसकी चूत बहुत पानी छोड़ रही थी. थोड़ी ही देर की उसकी चूत चुसाई और चुचियां दबाने के बाद ही वो झड़ने लगी. मैंने उसकी चुत का सारा नमकीन पानी चाट कर साफ कर दिया.

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अब मेरे लंड का बहुत बुरा हाल हो गया था. मैं उसकी चूत मारना चाहता था पर वो यहां हो नहीं सकता था क्योंकि जंगल के अन्दर इस खुली जगह पर कोई भी आ सकता था. मैंने अपने पैंट की जिप खोलकर लंड को उसके हाथ में दे दिया. उसने शरमा कर नजरें नीची कर लीं.

मैंने कहा- मेरी जान अब शरमाओ मत… ये तुम्हारा ही तो है, चलो अब इसे थोड़ा प्यार करो, जैसे मैंने तुम्हारी चूत को प्यार किया था.
वो बोली- मैं इसे कैसे प्यार करूँ?
मैं- अरे इसे अपने मुँह में लेकर चूसो जान.
कमला- नहीं मैं नहीं चूसूंगी इसे… ये गंदा है.
मैं- अरे मेरी रानी, कोई चीज गंदी नहीं होती है. मैंने तुम्हारी चूत नहीं चाटी क्या? इसमें बहुत मजा आता है, एक बार करो तो, मेरी खातिर इसे अपने मुँह में लो.

उसने लंड मुँह में ले लिया, पर अगले ही पल बाहर निकाल दिया और उल्टी करने जैसा करने लगी.

कमला- नहीं… मैं नहीं ले पाऊँगी, मुझे अजीब सा लग रहा है.
मैं- रानी कोई बात नहीं, फिर कभी सही, अभी इसे अपने नरम हाथों में लेकर हाथ से ही हिला दो.

मैं उसकी चूचियों पर हाथ चला रहा था और वो मेरे लंड पर हाथ चला रही थी. मैंने थोड़ी ही देर में उसके हाथ रस से सराबोर कर दिए. फिर हमने एक दूसरे को साफ किया और अपने कपड़े सही किए. एक बार फिर एक दूसरे को किस किया और घर की तरफ निकल पड़े.

रास्ते में मैंने पूछा- अच्छा बता तो, कमला मजा आया न तुम्हें?
कमला- हां मजा तो बहुत आया… पर वहां डर भी बहुत लग रहा था, कोई आ जाता तो. आज के बाद मैं तुम्हें ऐसे नहीं मिलूँगी.
मैंने- ठीक है मेरी जान, जब कभी और मौका मिला तो देखेंगे.

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हम ऊपरी मजा तो कभी कभी ले लेते थे, पर मैं उसे चोद नहीं पा रहा था. मेरे लंड का बड़ा बुरा हाल था. सामने चूत खुली होती थी, पर उसके मजे अब तक नहीं मिल सका था.
मैंने कमला को बोल भी दिया था कि अब सहन नहीं होता है. मेरा लंड तुम्हारी चूत में जाना चाहता है. उसका अपनी चूत के साथ मिलन करवा दो.

उसका भी मन अब चुदने को कर रहा था पर कोई ढंग की जुगाड़ नहीं बन पा रही थी. आग दोनों तरफ लगी थी, पर बुझ नहीं पा रही थी. वो रात में कहीं आ नहीं सकती थी और दिन में गांव वालों का देखने का डर था. पर कुंवारी चूत कब तक बचती. अब वो समय भी नजदीक आने वाला था, जब मैंने उसकी कुंवारी चूत में लंड डालकर उसकी सील तोड़ डालने का मौका तलाश लिया.

कुछ दिनों बाद ही हमारे गांव में एक लड़की की शादी थी. सभी गांव वाले शादी देखने में व्यस्त थे क्योंकि वो दिन की शादी थी और शादी देखने कमला भी आई थी. मैंने उसे इशारा किया तो वो मुझे पानी पीने के बहाने पानी की टंकी के पास मिल गई. मैंने उसे शादी के घर से थोड़ी दूर दिख रहे खेतों पर आने को बोला. पहले तो वो मान ही नहीं रही थी, पर थोड़ा समझाने पर वो वहां आ ही गई. मैं तो पहले से ही उसका वहां इन्तजार कर रहा था.

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