एक कुंवारी एक कुंवारा-1

मुझे भी खुशी हुई कि इसको कुछ तो अच्छा लगा मेरे अंदर… मैंने अब और ज्यादा प्यार से उसके सिर को मसाज देना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में वो खर्राटे लेने लगा। मैंने उसके चेहरे को देखा तो उसके लाल होंठ हल्के से खुले हुए थे। बहुत दिल किया उनको चूसने का लेकिन ये सिर्फ ख्याली पुलाव ही थे। असल में ऐसा कुछ करता तो पता नहीं वो कैसे रिएक्ट करता इसलिए मैंने ध्यान को वहां से हटा लिया और हल्के से उसके बालों में हाथ फिराता रहा।

10-15 मिनट तक ऐसे ही प्यार से उसके बालों में हाथ फिराते हुए उसके चेहरे को देख रहा था कि तभी फिर से गेट की घंटी बजी और आंटी की आवाज़ सुनाई दी- गौतम… गेट खोल।
उसकी आंख खुली तो मैं उससे अलग हो गया, वो उठकर गेट खोलने गया और 2 मिनट बाद वापस कमरे में दाखिल हुआ तो उसका लंड उसके शार्ट्स में तंबू बनाकर, उसको पूरे जोश में उठाए हुए था… शायद सोकर उठने के बाद की सारी ऊर्जा उसके लंड में आकर इकट्ठा हो गई थी।

कहानी अगले भाग में जारी रहेगी।

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