एक कुंवारी एक कुंवारा-1

वो बेड के सिरहाने की तरफ सिर करके मेरी बगल में लेटा हुआ था और टीवी फिर से ऑन कर दिया। चैनल को फिर से फैशन टीवी पर लगा दिया।
मेरी हंसी छूट गई।
वो बोला- क्या हुआ?
मैंने कहा- तू हर टाइम यही देखता रहता है क्या?
वो बोला- यार… यही तो देखने की चीज़ है… देख साली की चूची कैसे उछल रही हैं बिकनी में, इसकी चूत तो बिल्कुल चिकनी और मखमली होगी।

कहते हुए उसने अपने लंड को शार्ट्स के ऊपर से ही हल्के से सहला दिया। उसकी इस हरकत पर मेरी नज़र उसके लंड पर जा टिकी। वो साइड में अलग से अधसोई अवस्था में उसकी बाईं जांघ पर पड़ा हुआ था। उसने टांगें फैला रखी थी और हाथों को मोड़कर पीछे सिर के नीचे दबाकर लेटा हुआ था जिससे उसके गोरे-गोरे डोलों के निचली तरफ अंडरआर्म के भूरे बाल कुछ ज्यादा ही सेक्सी लग रहे थे।

मैंने कहा- आंटी को पता नहीं चलता तेरी इन हरकतों के बारे में?
वो बोला- बेवकूफ… मैं माँ के सामने ये सब देखूंगा क्या?

तभी टीवी स्क्रीन पर कैलेंडर मेकिंग वाला वीडियो चल पड़ा जिसमें एक मॉडल के चूचों को नंगे ही शूट किया जा रहा था। उसके मोटे-मोटे चूचे जो गेहुंए रंग के थे रेत में सने हुए थे और उसने नीचे पैंटी भी ऐसी पहनी थी जो उसकी चूत के मुंह को भी बड़ी मुश्किल से छुपा रही थी।

उसको देखकर गौतम की सिसकारी निकल गई और उसने सिर के नीचे से अपने हाथ को निकालते हुए सीधा लंड पर रखते हुए उसे सहलाना शुरू कर दिया। देखते ही देखते उसका लंड उसके शार्ट्स में तन गया। उसका लंड वो बार-बार लंड को सहलाते हुए जांघों को हिला रहा था।

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उसके तने हुए लंड को देखकर मेरे मुंह में पानी आना शुरू हो गया था, मन कर रहा था कि अभी उसके शार्ट्स को निकालकर उसको नंगा करके उसके लंड को मुंह में लेकर चूस लूं … लेकिन हिम्मत जुटा ही नहीं पा रहा था। बस धड़कन धक-धक हो रही थी; जिस लंड को देखने के लिए डेढ़ साल से इंतज़ार कर रहा था वो मेरी नज़रों के सामने तनकर उछाले मार रहा था, लेकिन मेरी पहुंच के बहुत करीब होते हुए भी मुझसे बहुत दूर…

तभी बेल बजी और उसने झट से टीवी ऑफ कर दिया। लंड को शार्ट्स की इलास्टिक के नीचे दबाकर बनियान के नीचे छिपाते हुए वो बेड से उठा और कमरे से बाहर गेट खोलने निकल गया। उसको गए हुए 3-4 मिनट हो गए लेकिन वो नहीं लौटा। मैंने कमरे की शीशे वाली खिड़की से बाहर की तरफ देखा तो गेट तिरछे रूप में हल्का सा खुला हुआ था और वो किसी से बातें कर रहा था। बाहर खड़ा इन्सान मुझे वहां से नज़र नहीं आ रहा था। वो बार-बार अपने शार्ट्स के ऊपर लंड को खुजलाते हुए बातें कर रहा था। मैंने उसकी बातें सुनने की बहुत कोशिश की लेकिन कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वहां पर चल क्या रहा है।

इतने में ही उसने अंदर की तरफ देखा तो मैं वापस बैठ गया।
कुछ पल बाद वो भी आ गया।
मैंने पूछा- कोई था क्या गेट पर?
वो बोला- हां, पड़ोस वाली चाची की लड़की थी, माँ को पूछ रही थी, बहुत लाइन मारी इस पर लेकिन साली भाव ही नहीं देती… लेकिन माल है यार… कसम से, इसकी चूत के दर्शन भी हो जाए मेरा लौड़ा तो पानी फेंक देगा।

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मैंने कहा- तेरे जैसे लड़के को भी भाव नहीं देती?
उसने कहा- हां साले, मैं बड़ा शाहरुख खान हूं.. .जो लड़कियाँ मेरे आगे-पीछे घूमेंगी?
मैंने कहा- शाहरुख भी कोई हीरो है? उससे ज्यादा सेक्सी तो तू लगता है।

उसने मेरी तरफ देखा और हंसते हुए बोला- हट बहनचोद, चुतिया बना रहा है.
मैंने कहा- सच में … मुझे तो कोई कमी नहीं लगती तेरे अंदर, मैं लड़की होता तो तुझे बॉयफ्रेंड बना लेता।
वो बोला- हाय… ये बात पड़ोस वाली शीतल क्यों नहीं बोलती। साला मुट्ठी मार-मारकर थक गया हूं उसके नाम की।

मैं मन में थोड़ा खीझ गया… मैं यहां इस पर डोरे डाल रहा हूं और इसको शीतल की पड़ी है। मुझे जलन सी हो रही थी उसकी बातें सुनकर। मुझे लगा, ये तो चूत के पीछे पागल है, मेरा चांस कहां है.
मैंने बात बदलते हुए कहा- वो सब छोड़, पढ़ाई नहीं करनी क्या?
वो बोला- यार, तेरे आने से पहले मैंने मुट्ठ मार ली थी। थकान हो रही है, पढ़ने का मूड़ नहीं है, सिर भारी हो रहा है।
मैंने कहा- दिखा, बुखार तो नहीं है?

बहाने से मैंने उसके माथे पर हाथ रखा तो वो बोला- अंश यार, थोड़ा, सिर दबा दे ना.

मैंने नोटबुक बंद करके एक तरफ रखी और उसके माथे पर हाथ फिराते हुए उसके सिर को हल्के से दबाते हुए उसके बालों में हाथ फिराने लगा।
वो बोला- साले, तेरे हाथ तो बिल्कुल लड़कियों की तरह नरम हैं… पर मज़ा आ रहा है।

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