एक कुंवारी एक कुंवारा-1

दिन गुज़र रहे थे और बारहवीं के प्री-बोर्ड के इम्तिहान नज़दीक आने वाले थे। एग्ज़ाम्स की गहमागहमी स्कूल में शुरू हो चुकी थी।
एक दिन गौतम ने कहा- यार तू मेरे घर आ जा ना, दोनों साथ में बैठ के कुछ पढ़ लेंगे, मुझसे अकेले में नहीं पढ़ा जाता।
मैंने कहा- ठीक है, मैं आ जाऊंगा।
मन में अंदर ही अंदर लड्डू फूट रहे थे, क्योंकि मैं तो उसके पास जाने का मौका ढ़ूढ़ता ही रहता था। लेकिन वो पास के दूसरे गांव से आता था। मुझे माँ को इसके लिए मनाना था। बात पढ़ाई की थी तो माँ जल्दी ही मान गई।

रविवार को दोपहर के समय मैं गौतम के घर पर पहुंच गया। मैंने उसके घर के बाहर जाकर डोरबेल बजाई और उसको आवाज़ लगाई- गौतम?
2-3 मिनट बाद अंदर से मेरी माँ की उम्र की औरत ने गेट खोला तो मैंने अंदाज़ा लगाया कि ये गौतम की माँ होगी।

“नमस्ते आंटी… गौतम ने पढ़ने के लिए बुलाया था.”
आंटी ने कहा- क्या नाम है बेटा तेरा?
“अंश!” मैंने कहा.
आंटी ने आवाज़ लगाई- गौतम… कोई लड़का अंश तुझसे मिलने आया है.

मुझे आंटी ने अंदर आने को कहा, मैं अंदर दाखिल हुआ तो आंटी ने गेट ढालते हुए दोबारा आवाज़ लगाई- अरे कित बड़ रया है… यो छोरा गेट प खड़ा। सुणता नी तन्नै?
गौतम अंदर से आवाज़ लगाता हुआ बोला- आया माँ…

2 मिनट बाद वो अंदर के कमरे से बाहर निकल कर आया. उसने आसमानी नीले रंग का स्पोर्ट्स वाला शार्ट्स पहन रखा था जिसमें अंदर लटक रहा उसका लंड उसके कदमों के साथ इधर-उधर डोलता हुआ एक बार दाईं.. तो एक बार बाईं जांघ से टकरा रहा था। उसने छाती पर काले रंग की सैंडो बनियान डाली हुई थी। उसकी गोरी-गोरी जवान छाती और कंधों से साइड में निकलते मीडियम साइज के डोले … छाती पर नई जवानी के हल्के-हल्के भूरे बाल अभी उग ही रहे थे, जिनको देखकर मेरे लंड में गुदगुदी सी हो उठी थी।

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नज़र फिर से नीचे की तरफ ताड़ने लगी तो देखा कि जांघों के बाल छाती के बालों की तुलना में थोड़े ज्यादा बड़े और काले हो गए थे। कुल मिलाकर वो जवानी की दहलीज पर कदम रखता हुआ जवान लौड़ा बनता जा रहा था। मैंने पहली बार उसको बिना शर्ट और पैंट के देखा था।

वो नंगे पैरों मेरे सामने आकर खड़ा हो गया; मैं उसको देखकर हल्के से मुस्कुराया।
वो बोला- अंदर आ जा अंश… मेरे कमरे में बैठकर पढ़ते हैं।

मेरे हाथ में नोटबुक तो थी ही इसलिए आंटी ने भी कोई सवाल-जवाब नहीं किया। हम दोनों उसके रूम में अंदर चले गए। बेड पर बैठकर मैंने नोटबुक खोल ली। सामने चल रहे टीवी पर उसने एफटीवी चैनल लगा रखा था। मैं समझ गया कि ये बिकनी वाली मॉडल्स को देखने में बिज़ी था इसलिए इसका लंड अपने आकार में आया हुआ था।

मैंने कहा- टीवी तो बंद कर दे… टीवी देखते हुए डिस्टर्बेंस होगा, पढ़ाई नहीं हो पाएगी।
उसने रिमोट उठाकर टीवी बंद कर दिया और आलथी-पालथी मारकर बेड पर मेरे सामने बैठ गया।

इस पोजिशन में उसकी जांघों पर शार्ट्स कुछ और ऊपर सरक कर उसकी जांघों को लगभग उसके उसके आंडों के पास तक और नंगा करने के बाद रुक गए थे, अब अगर शार्ट्स को थोड़ा और ऊपर की तरफ चढ़ा दिया जाए तो उसके आंड ही दिखाई दे जाते। उसके आंडों की शेप नीले शॉर्ट्स में नीचे बैग बनाकर अलग से दिखाई दे रही थी। उसकी जांघें काफी गोरी थीं जिन पर ऊपर तक बाल उगे हुए थे लेकिन वो बाल अभी नए-नए लग रहे थे। मेरे सामने बैठे हुए उसने दोनों कुहनियाँ अपने दोनों घुटनों पर टिकाई हुई थीं और उसकी बनियान अब छाती पर से ढीली होकर आगे की तरफ लटक सी गई थी जिससे मुझे उसकी छाती के अंदर तक का नज़ारा भी दिखने लगा था। हल्के बालों से भरी हुई उसकी छाती के अंदर उसके निप्पल भी दिखाई दे रहे थे। जिनको देखकर मेरी हालत खराब हो रही थी और मन कर रहा था कि उसकी बनियान को उतारकर उसके निप्पलों को चूस लूं।

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उसकी नज़र नोटबुक में थी और मेरी नज़र कभी उसके शार्ट्स पर और कभी उसकी छाती पर बारी-बारी से ताड़ रही थी। कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था। लेकिन शुरूआत करूं भी तो कैसे। हम पढ़ने लगे।

10-15 मिनट हुए थे कि आंटी ने बाहर से आवाज़ लगाई- गौतम, मैं ज़रा तेरी ताई के घर जा रही हूं। बाहर का ध्यान रखना कभी अंदर ही घुसा रहे।
“ठीक है माँ.. ” उसने अंदर से आवाज़ देते हुए कहा।
आंटी ने फिर आवाज़ लगाई- गेट न भीतर तै बंद कर ले ऊठ कै…

वो गेट बंद करने चला गया और मैंने एक गहरी सांस ली। मैं कमरे में इधर-उधर देख ही रहा था कि वो फिर से दाखिल हुआ, अंदर आकर वो बेड पर लेट गया।
मैंने कहा- पढ़ना नहीं है क्या…लेट क्यूं गया?
वो बोला- रूक जा यार, किताबी कीड़े। इतना पढ़ूंगा तो दिमाग की दही हो जाएगी। थोड़ी कमर सीधी करने दे।

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