दोस्त की सिस्टर की चुदाई मदद करने के बाद

मैं उसी पोज़िशन में पूरा लंड अन्दर डाल कर उसे चोदने लगा.
मेरे दोस्त की सिस्टर बोलती रही कि प्लीज़ पैर नीचे कर दो … मुझे दर्द हो रहा है.
मैंने उसकी बात नहीं सुनी.

कुछ देर करने के बाद मैं भी बेड पर आ गया और फिर लंड अन्दर बाहर करने लगा. वो पागलों की तरह ‘आअह्ह … आह्ह्ह्ह..’ कर रही थी. अब उसका भी दर्द ख़त्म हो गया था.

फिर थोड़ी देर करने के बाद मैं बेड पर लेट गया और उसे लंड के ऊपर बैठा लिया. लंड को चूत में फिट करने के बाद मैंने उससे ऊपर नीचे करते हुए चुदाई करने को कहा.

वो कोशिश कर रही थी, लेकिन कर नहीं पा रही थी. फिर मैंने दोनों हाथों को उसके चूतड़ों पर रख कर उसे उठाने लगा और अन्दर बाहर करने लगा.

वो बोलने लगी- आह … पूरा अन्दर जा रहा है … मुझे हल्का सा दर्द भी हो रहा है.
मैंने पूछा- मज़ा आ रहा है?
वो बोली- बहुत … लेकिन अन्दर जाने पर थोड़ा थोड़ा दर्द करता है.

दस मिनट तक धकापेल चुदाई हुई. अब मेरा निकलने वाला था. मैंने उससे पूछा, तो वो बोलने लगी कि प्लीज़ बाहर निकालना … अब मेडीसिन नहीं लेनी है … बहुत दर्द करता है.

मैंने उसे लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गया. अब मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा और माल निकालते समय उसके चेहरे पर आ कर लंड हिलाने लगा.
उसने मुँह बंद कर लिया, वो समझ गयी थी कि मैं मुँह में निकालने वाला हूँ.

मैंने मुँह खोलने के लिए बोला भी, लेकिन उसने नहीं खोला. मैंने अपना सारा वीर्य उसके चेहरे पर निकाल दिया. कुछ उसके बालों पर भी लग गया.

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थोड़ी देर हम वैसे ही लेटे रहे.

वो बोली- उस साले कुत्ते मेरे बीएफ ने मुझे इतनी देर कभी नहीं चोदा और मुझे इतना मज़ा भी कभी नहीं आया था.

मेरे दोस्त की सिस्टर मुझसे चुदने के बाद पूरी तरह संतुष्ट लग रही थी.

फिर वो उठ कर बाथरूम में जाने लगी. मैंने पूछा तो बोली- जोरों से सूसू आई है.
मैंने बोला- मैं चलूँगा.
वो मना करने लगी.
फिर मैंने बोला कि तुमने ही बोला था कि जो मैं बोलूंगा, तुम वो करोगी.

वो मान गई और हम दोनों बाथरूम में आ गए. वो सूसू करने फर्श पर बैठ गई. लेकिन उससे हो नहीं रही थी.
वो बोलने लगी- आप बाहर जाओ, तो होगी.
मैंने बोला- कोशिश तो करो.

कुछ पल बाद उसकी बुर से थोड़ी पेशाब निकली … फिर ज़ोर से निकलने लगी.

मैं उसको पेशाब करते हुए उसकी बुर को टच कर रहा था. कभी ऊपर नीचे … कभी उंगली अन्दर … कभी जहां से पेशाब निकलती है, वहां उंगली लगा रहा था.

उसके पेशाब होने के बाद वो उठने लगी. मैंने बोला- बैठी रहो … मैं भी कर लेता हूँ.
मैंने पूछा- मुँह में करूं तुम्हारे?
वो बोलने लगी- नहीं प्लीज़.
मेरे बहुत बोलने पर बोली- मुँह में नहीं लेकिन बॉडी पर कर लो.

मैंने उसके नंगे जिस्म पर मूतना शुरू कर दिया. थोड़ी देर खड़े रह कर ट्राई करने के बाद मेरा भी पेशाब निकलना शुरू हुआ और सीधे उसकी बॉडी पर जाने लगा. कभी उसके बूब्स, पेट … फिर लंड ऊपर करके उसके चेहरे पर भी कर लिया.

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उसको शुरू में तो अच्छा नहीं लग रहा था, पर एकाएक उसे मजा आने लगा … और वो अपने चेहरे पर भी मेरी पेशाब की धार मजे से लेने लगी.

ये सब करने के बाद वो बोली- आप बहुत गंदे हैं.
मैंने उसकी तरफ देखा, तो वो हंस दी
फिर हम दोनों वहीं पर नहाये और कमरे के अन्दर आ गए. हम दोनों कपड़े पहन कर रेडी हुए और एक बार फिर स्मूच किया.

इस तरह मैंने अपने दोस्त के सिस्टर की चुदाई की. मैंने उसके साथ अपनी मर्जी चला ली थी. उसको भी मेरे साथ बहुत मजा आया था. मैंने वापस चलते वक्त उससे पूछा- तुमको मेरे कैसा लगा?
तो उसने कहा- बार बार आने को मन करेगा, ऐसा लगा.
मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया और चुम्मी ले ली.

रास्ते में उसने मुझे बताया कि मुझे आज से पहले सेक्स करने में कभी इतना मज़ा नहीं आया था.
मैंने उसे एक गोली दे दी और बोला- इसे ले लेना, पेन नहीं होगा.
वो खुश हो गई.

ऐसी मजबूरी में शुरू हुई थी सिस्टर की चुदाई … जो लड़की को बार बार चुदाई करवाने की चाहत में बदल गया था.

मेरे दोस्त की सिस्टर की चुदाई कहानी पर मुझे अपना फीडबैक देने के लिए कृपया ईमेल ज़रूर करें, ताकि कहानियों का ये दौर, अन्तर्वासना की चुदाई की कहानी वाले पोर्टल पर … आपके लिए यूँ ही चलता रहे.

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